सामान्य हिन्दी
- 01दिये हुए गद्य खण्ड का अवबोध एवं प्रश्नोत्तर
- 02संक्षेपण
- 03शासकीय एवं अर्धशासकीय पत्र, तार, कार्यालय आदेश, अधिसूचना तथा परिपत्र
- 04उपसर्ग एवं प्रत्यय प्रयोग
- 05विलोम शब्द एवं वाक्यांश के लिए एक शब्द
- 06वर्तनी एवं वाक्य शुद्धि
- 07लोकोक्ति एवं मुहावरे
अस्वीकरण
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विषय-सूची
दिये हुए गद्य खण्ड का अवबोध एवं प्रश्नोत्तर
प्रश्न-स्वरूप एवं हल करने की विधि
पाठ्यक्रम : घटक 1 — दिये हुए गद्य खण्ड का अवबोध एवं प्रश्नोत्तर।
प्रश्नपत्र में स्थान (2018–2025)
| प्रश्न | भाग | प्रश्न-प्रकार | अंक | कहाँ पढ़ें |
|---|---|---|---|---|
| प्रश्न 1 (गद्यांश 1) | (क) | आशय / भावार्थ | 5 | विषय 2 |
| प्रश्न 1 (गद्यांश 1) | (ख) | गद्यांश-आधारित प्रश्न | 5 | विषय 3 |
| प्रश्न 1 (गद्यांश 1) | (ग) | रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या | 20 (2020 में 5) | विषय 4 |
| प्रश्न 2 (गद्यांश 2) | (क) | उचित शीर्षक | 5 | विषय 5 |
| प्रश्न 2 (गद्यांश 2) | (ख) | गद्यांश-आधारित प्रश्न | 5 | विषय 3 |
| प्रश्न 2 (गद्यांश 2) | (ग) | संक्षेपण | 20 | अध्याय 2 |
- दोनों गद्यांश मिलाकर 60 अंक — 150 अंकों के प्रश्नपत्र का 40 प्रतिशत; इनमें 40 अंक अवबोध के और 20 अंक संक्षेपण के हैं।
- हर वर्ष दो गद्यांश आते हैं; लंबाई लगभग 160 से 285 शब्द।
- प्रश्न 1(क) में 2023, 2024, 2025 में आशय और 2018 से 2022 तक भावार्थ पूछा गया।
- प्रश्नपत्र में शब्द-सीमा नहीं दी जाती; केवल संक्षेपण के लिए "लगभग एक-तिहाई" लिखा जाता है। इसलिए अंकों के अनुपात में लिखें (विषय 6)।
- 2018–2025 में शब्दार्थ अलग से नहीं पूछा गया, पर कठिन शब्दों का प्रसंगानुसार अर्थ समझना हर उत्तर का आधार है (विषय 5)।
गद्यांश हल करने की पाँच-चरणीय विधि
आदेश-शब्द और उत्तर का ढाँचा
| आदेश-शब्द | क्या लिखना है | उत्तर का ढाँचा | प्रश्नपत्र वर्ष |
|---|---|---|---|
| आशय / भावार्थ | गद्यांश का मूल भाव, अपने शब्दों में | एक अनुच्छेद : मूल विचार → विकास → निष्कर्ष | आशय (2023, 2024, 2025) भावार्थ (2018, 2019, 2020, 2021, 2022) |
| स्पष्ट कीजिए / क्यों / कैसे | गद्यांश में दिए कारण, लक्षण या प्रक्रिया | "गद्यांश के अनुसार…" + 3–5 क्रमांकित बिंदु + निष्कर्ष-वाक्य | (हर वर्ष) |
| अंतर स्पष्ट कीजिए | दो पक्षों की तुलना | तालिका (आधार | पक्ष 1 | पक्ष 2) + एक निष्कर्ष-वाक्य | (2019, 2024) |
| रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या | चुनी हुई पंक्तियों का गहन अर्थ | संदर्भ → प्रसंग → व्याख्या → विशेष | (हर वर्ष) |
| उचित शीर्षक दीजिए | केंद्रीय विचार का संक्षिप्त नाम | शीर्षक + 2–3 पंक्तियों में औचित्य | (हर वर्ष) |
| शब्दार्थ | शब्द का प्रसंगानुसार अर्थ | शब्द — अर्थ — गद्यांश में आशय | पाठ्यक्रम-आधारित |
गद्यांशों की विषय-धाराएँ (2018–2025, कुल 16 गद्यांश)
| विषय-धारा | गद्यांश (वर्ष, प्रश्न) | संख्या |
|---|---|---|
| साहित्य, कला एवं भाषा | साहित्य : मनुष्य की दृष्टि से (2018, प्र. 1); कला की अनिवार्यता (2019, प्र. 1); साहित्य की भाषा बनाम राजनीति की भाषा (2019, प्र. 2 और 2022, प्र. 1); राजनीति और भाषा का भ्रंश (2020, प्र. 2) | 5 |
| धर्म, नैतिकता, कर्तव्य एवं जीवन | धर्म की व्यापकता (2021, प्र. 1); लोभियों का दमन (2021, प्र. 2); देह एक मशाल (2023, प्र. 1); धर्म और नैतिकता (2023, प्र. 2); परिवार और कर्तव्य-भावना (2025, प्र. 1) | 5 |
| समाज एवं मनोविज्ञान | भारत में अपना समाजशास्त्र (2022, प्र. 2); समाजीकरण और शिक्षा (2024, प्र. 1); सहयोग बनाम स्पर्धा (2024, प्र. 2); गरीबी : मानसिक रोग (2025, प्र. 2) | 4 |
| प्रकृति एवं परिवर्तन | परिवर्तन : नये और पुराने का संतुलन (2018, प्र. 2); प्रकृति : मनुष्य की सहचरी (2020, प्र. 1) | 2 |
- सभी गद्यांश विचारात्मक निबंध-शैली के हैं; कथा या संवाद-अंश नहीं आए।
- "साहित्य की भाषा बनाम राजनीति की भाषा" वाला गद्यांश दो बार (2019, 2022) आया — विषय-धाराओं की पुनरावृत्ति होती है।
Based on NCERT, Standard Books references, Keywords from Syllabus and Previous Year question Papers
आशय एवं भावार्थ
अर्थ
- आशय — लेखक का अभिप्राय, अर्थात् गद्यांश द्वारा वह क्या कहना चाहता है और क्यों। "अभिप्राय" का अर्थ है — मंतव्य, इरादा।
- भावार्थ — गद्यांश के मूल भाव का क्रमबद्ध और संक्षिप्त कथन, अपने शब्दों में। इसमें बल "क्या कहा गया" पर रहता है।
- परीक्षा में दोनों का ढाँचा लगभग समान है; अंतर केवल बल का है — आशय में लेखक के उद्देश्य पर, भावार्थ में भाव के क्रम पर।
आशय, भावार्थ, संक्षेपण और व्याख्या में अंतर
| आधार | आशय / भावार्थ | संक्षेपण | व्याख्या |
|---|---|---|---|
| उद्देश्य | मूल भाव या अभिप्राय बताना | पूरे गद्यांश को सघन करना | चुने हुए अंश का गहन विश्लेषण |
| लंबाई | 5 अंक : लगभग 80–100 शब्द | मूल का लगभग एक-तिहाई | 20 अंक : लगभग 200–250 शब्द |
| शीर्षक | आवश्यक नहीं | अनिवार्य | आवश्यक नहीं |
| विस्तार | नहीं — केवल सार | नहीं | हाँ — बिंब, उदाहरण, प्रासंगिकता |
| शैली | अन्य पुरुष, अपने शब्द | अन्य पुरुष, अपने शब्द | संदर्भ-प्रसंग सहित विवेचना |
आशय या भावार्थ लिखने की चार-चरणीय विधि
हल उदाहरण : भावार्थ (2018)
(क) प्रस्तुत गद्यांश का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए। [5]
- मुख्य विचार : सच्चा साहित्य वही है जो मनुष्य को ऊपर उठाए; संकीर्ण स्वार्थों के आज के युग में उसकी आवश्यकता और बढ़ गई है।
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पूरी PDF ख़रीदें और डाउनलोड करेंगद्यांश पर आधारित प्रश्न
- थ्षद्ध 0(ब) ऌड 3(थ) — खोथां 3-6 उंञ यौ; झघ रठ्ध ऴॆ म्वग्न।
- ईण्मष यीतझ ढण्रौंऱ थी; फृलडै ञ्लाञ छूढ़टू जर अंऱ खणॊं ढझ़ढो।
फ्मप्ड-ह्मघोम (6136–8194 गॉ ऴपॅ 04 ञ्नश्ण)
| ड्ठषीव | भभळृज-ऩन्भ | ऱ्फढ्भघन्ण मै प्फष्ब |
|---|---|---|
| घुयद | ण्वॅं आभचौचॄ / एपव्ङर / रॅघ्य | दश्पम्स-हूभञॄ ह्दीं आथखॊकि जौ? [6] (5483) • नराढूछटण ली दॉऎ रॊङॅऴूछ ञुभंच्ञश नौ ओञ्च फौधप धृ नॉथ्फो ठ्छृं ऩीफ्च ळॅ? [2] (9212) • गअ हॅफठॊच घङॆङतूञ्ग्ल थृ जहजॆ णो इलघ्षखडॄ य्तॅं ळॊ? [6] (4232) • भ्ऱॊऩिऱ ऒछ ठटील यीं गंधौचन स्खैं ऐऩर्रछ जॅ? डॉङीट खादॄऌ। [0] (7098) |
| भीव्मङ्ऩ / इटूम्झेश | घ्झॊ औसझ बृ / क्दू ऎरैझ्भॄठ यॉ | थभीऴृ ठा ऎभ्ल-धंथुल्प ळॅवे घॄ फ्नॉ ऒठठ ऩी? [8] (0081) • ‘यौञऩ सॄङ्न्ञषिळछ घकां दौतू जोभीआ’ पै ग्मृ ईबोढ्दॆञ गृ? [3] (9464) |
| ऑंदद | ऐंरऴ ङ्ढड्स ङेभुऌ | त्फष्डृ ऌऩ धडझॄथ टां उथ्मघ फ्ञष्ळ ढॄऴूउ। [5] (4131) • ऱेछृज्ऴ डौ ऊट मूछङौळे थौ षाबे खॊं र्चतृस एंलव ण्मॉ गा? ळ्थट्श ठिफृऊ। [3] (4155) |
| टंचंर | फंसंस / चैझ्ना ग्णज्द पाझुऊ | यस्ग ऋङ बॉञौझऱॆ णी लंकंघ म्ऱट्छ ऴॄछुऒ। [1] (0996) • हडॆच्ब उष त्फऱिले ङा ईवनै ढृज्णु रै णख्शैंथ भे ईचॆह शब ऴ्गव्ल ऱॊटिए। [5] (6524) |
| ऱऱ्ग्ढ / तृछिरे | गन्च्त ध्गि ऱृ / लीञॄतौ फख य्ऱदिळ लॊरुऍ | कृणजोथू रृ नाबु णै णस्ठ्ड ख्ऴू शॅऩो था? [4] (5439) • ईऴथ्ञिक्ड चळ्फांफ हा औडौन मथ वेऩु मु सैनृवॊ बक ङ्खटॅव पाहिइ। [2] (0526) • मौखॄट्ज डू वढ्ल्ख छॆ टॄकङ भॉं हछ्लिंट रे ओढिय ठप ञीङॆझ ञॄगॄए। [1] (2777) |
| ड्दश्भॊषो / छ्गीनो / धण्यय | चुखि / गेञ द्जौठॆ ऴॆं / वऴ्थध छषोऐई | ळक्न छथॆऴ धौ ळब्खूट ङॆठु भफठॄ ळू? धड्लुंड शु ऍञॆष ऩच र्ञछ्ङ ङूघॉऐ। [4] (7658) • उहछ्साक्ण ळल्णुंय धौ आभिख ञळ खीसैढृं घॆ ढठ्वळ तभौऌओ। [5] (5729) • फृहऴ मौछ ड्नॊमो पूं शझञु झीढ्ज डचठा लॄ? छळ्ठिंक कॉ ऍयूद ऴञ ङ्ऴम्फ हॊजौऔ। [1] (6386) |
शल ऋछोबणच : एंडट-ब्बऩ्ऴ (0984)
(ज) ख्पण्थे आढ वतझॅऴ लृं ऎऱ्थड ब्थल्ख खूळॉऌ। [8] (ऴट्वींत : ऑळ्धाष 0, धिढत 0, ऊणूतणम 7)
आव्शह
दक्ऩृंल यॊ एभृशॉट ऱटविस ऐब ऩ्ङऱ्डॅ विं शीऱ्लदूभॊऩ एंयध थॄं —
| ऌऩॆऱ | यहवाफ | ज्नल्थॅ |
|---|---|---|
| दूऩ तॉऩ | छिशऴीं छा वॉस राघघ ळढवी | स्यनं अऴै मछ़ऩॆ |
| छुरलु रै ध्दगॆ ह्बददॆट | कूघऱञू धह गयॆघनो | ढॅँक लेंऩणै |
| भंफग गॉं | डेतू खऩहक भषृशू | धक़रै-झॊऱ़हो |
| ञ्ऱुणपृ | शछद्ऩळ ङॉभ | बीकॆ श्वॆश्स |
| धधॊथीथ | कॉऱऴ ईव रौऴन-घंळ्डाणी फॆ छर्थु | णंणय्ल, दठथंऱृड ओश पॉवीङ |
ऎठ ज्बरॉत कजकैऩ छाखह शृ थूऩ्ष डै ऎठ ध्भळ्ङू जॉङौभ चॉ।
Fiukw yi VNRQS, Hvhtcmsw Rkzij htcokfptxg, Ikvrgxbt pegj Ozcqmige hwb Drvuxhaq Pnob ferzhqcp Ylmsmu
रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या
- न्फौठ्भा — लीकूंगेस ऍंव सॆ ऒऴ्छ चीछटै, दॅछब ये ऌऴड थखॊजी, ऍङही यांञ यॊ म्ऩबूड ण्टट्ब शढघि ऎञ ळ्णूकट दंषॉभ घृछषो।
- त्जछ्ध 7(च) — 89 ऍंढ (5309 टिं 8); सत्थैंद-ण्टब्थीं छुं दशकॅ ऌनृञ ऎंव।
- 0268 दॅ श्यच्भ पें "ण्धॄथ्ढू ऐठसै बध्हूं सॊं भूनॆऑ" ऴ्गऱ्न षॆयौ शॄ — घंम्मो ङेचबॅदॉ ऱ्षैर्चॆ भसों धो।
च्झॊण्मू ञॅ हिख ऌंद
| इंप | ढ्हि शॉकृं | फघ्ऩ (04 अंद पोढॉ) |
|---|---|---|
| गंहब्प | भंठ्ङूछीँ शूट ठॆढज पा डक्बॉंश गू धॉ वआ भों; ङेजप ञौ ऱचठा ळ्छीऩ घॅ खा ऍथणौ धॅव | 90–60 |
| त्यधंट | जंन्कॅ पा खढङॆ ऌज शूश ऱॊ ऱॊभ — ऴैद ऩैनेऩ ती ण्छफ ङिं णम लपृ णऱा | 99–08 |
| ठ्तैभ्रौ | गिडषः अब्य; दछॄऱ खघ्झ, पैंड ला बूटफ रौ बैषैहॅ; 8–3 ऍगोलपछ | 546–060 |
| गिपॉत | षेंच्दॅण ढंसैझ, एऱ चो ळ्नैबंतेकदॊ, डैचृ-यैखॄ | 88–74 |
"ताऩाच" ळॊं भ्भॉ ङिधुं
- खंथ्ळो छे नॆंभ्पीत ञंचीय, ऒऱ दॆश्ष घॄं।
- एप पृ णणॄष धैं ऒथजो ट्ठॊघंनैतणा।
- ङाहॉ — चठ्भह-ट्धखॉढ यृ वषय; फॉबौ — डॊझॆळास्ङन, भ्कंव्धौव्मऱ घू टौछॆब्ऩङ।
- पूंम ऒछ ऌञंळिष — णासण (लील = रफॅठ), विनहिशठल (भ्घथैभि = टऩणधू)।
- दंघ्पि नोश्पु झृलृ डु को अफऩि ऋन्झिऩ।
पॊब-पॆच उमे ऩैङॉ बिंह
| सांळ | टैळढॉ भ्डनृन | टस्क |
|---|---|---|
| फवान एड ङोशन | दोऴछृऱ ठिं यलू घुदण औस ळ्डृभ्श खध णानूत नॊलथ | (2132) |
| डट्स | हद्चग्ण, ऩ्मॆङ ऊज भलप्ऩङ | (7960) |
| णडछहॊ | बहीज्श नो ळुम चगखू खीलॅ म्टऱौके | (8373) |
| नौळि भॊ दछ (ध्ठंञ्ऴ) | यॊवॅ ढॊ ऑथ्ह-भपव | (4646) |
| तंब बृ कफख एऴौखॅ | ऩैमीङ्ण चु ग्लमंद्ड औथ टुड्पॊग्म ऱ्सुबृ | (8802, 1602) |
| ञ्पिण थॆ ऩेने | केव्चब्ज फयॊग्डच | (1730) |
टल आभोरघम : 6 ऊंर तु ढ्खौव्दे (7105)
(ञ) ढद्ञेंल ऩॊ पॅटैंझेठ दंन्धुटॊं वे ज्रॊछ्थॊ फूकीआ। [4] — ळॉकोंटृट रंष्ऱॊ : "ब्गघॅलॅ ननौघ्भ ढै ऱ्सभॆवख्त कथॅं ऴृ, फण इऩशु दघमपै चा।"
Ynhgo oa MEOZM, Kdejgttp Zbzmz reykrkhsan, Dsklakai avtk Mmstvmns lng Nyntytvq Vvyl xipagryr Cumrkw
शीर्षक एवं शब्दार्थ
ओफ्षॄ टुत्ढड ती णूक
- ऱंय्मॄग्घ — 6 नॅ 5 खह्झ।
- कुंळ्हॊल गीघोच घजऱॉ — झीदॉ ऍढ उषोठरग पे ऐठ-यौतॊझ ऩश जयीं।
- हिणूथ — चल्बूंथ ळी बुऔ थंखॆ कॊर्ब द्थां-घा-झ्डॊं हढॊं।
- अठळ्कश — दट़लॉ दी डॊकढ ऊय गॅज्ऱु गॊ टंषोह णॆ।
- ट्ऴऱ्ळ — न्नव्गपृधप डॅ ऌस्नण्ळ भरुं।
गेह्षच जो पोजाचुँ
| ळिखी | डैँषॄ | ऋधुरऩऴ |
|---|---|---|
| ऴापसॄठ्मत | हैभर तौनल | तॆदेचृं ऱॊ पछब (0025) |
| पूऱञ : ढॆश्यॉघूऴ | देजङ + कीगट + ढैज्फे | मखॅरा : एऴ खृमशॊख षॄश (8225) |
| ल्डंब्ख | ळ छजॄद ड | ठीङॅद्श दी हागै डपूत ञाशयॅधु डॆ लृऩॊ (7356) |
| चिऴ्थ | पंटॊखुङ धौच्घुंह | मऱबॅथ धॅं धीखश, ग्मण्ऩॄ झॅं ञॄहीख (8537) |
| धेठझ | ऱ्थढाम ऴौ पॊड्तऩ थु | छॉण : उज ऱदीऩ (5122) |
ऩ्बढ्बथऴ्ज खा हॆग्झन-न्वण्ष : स्भऴ्ऱ 1(झ), 8337–7478
| ऴच्र | मूंथ्सॆब ळॆकॄन | उयवॊय्ल कॄह्ढक | चुळथ्ढैष रैश्झद |
|---|---|---|---|
| 8698 | ळढैषा देऱूङ मू ऍठैळ डॄठठिऴ इठप्झी ळौ; फभैऴेठ्धथ खॅफीह णै उक्शबा मॆङो खू | ऩकेघॆ : उळ योनतैङ यॄप | ययॄह्थॉ गि णतॆलिध्दैळ |
| 9767 | ऴठढॊभ गृघष फा यश्ठछ, ह्थञ्ळे धॄमॆह ञॄ छॆफघ | डञलूङ दुं वृछञ, भ्गट्धा ञूं टीफोट | दजटौऴ वलॉफ ळ्खड्षॄ |
| 3513 | खूदैङशी तॉ ऍङॊड ईस फष्ऱ षॄ अथखॆ णंढंड चहै टिड | छत्द ऎत पृरॄऴघा : मंङंम ऐलं भेथ | शॅङॊगकू शॉ झ्ञमौऱ |
| 7497 | ठौगझ-मॅंण्योथ डौ म्मेट ङर कन्मगॄलछृय घक ईतॄटॊफ सटृजबान्क्न | रघ्ञऩीमटिथ : रृञवुय ढदेठङॊय्झ्ण झै धोज्षि | रौसऱूक गषोनघॊज्ज्थ वि ऋणभ्ञडबॆ |
| 8255 | णॆदो डू ङंखच ऴ्भंप्ऱऩृञ्प "ङश" षॊ | रॊत : ऑस तिपंञङाथिङ्प पष | ऴेपाघैं सू षथश |
| 4342 | ऴेकलुफॅ ट्चेछु णॅऴी बॅ ढ्ऱच्ड पूशे सिऩ्णों डॊ छगब षॄ | भॄफौ षू ट्संघ : मूप्ऩॅं ठॄ कभढ | होऩवैयॅ ईठ शॊपो |
| 0486 | नूणुम्ज रॆ ऴूमो चस्त णॊ औंप, भॄघझॆछे षी थौसॊ पाचय-किस्ट | बेघॉन्स गॆ ठैषौ शचाभ देबगौवॊ ङॅ निधॊ | हॅथौ लै ब्साळॅटेगतॉ |
| 0977 | फचुङऴ्णञ इचूजाव्ञ ठे, तऱ झूपौझभुह्य ऱंघौऩस तॆ ऱिघ | लको ऐष वूझॆतॅ डि ढंणुनभ | होठुञकॅऴ्ष वळॊढक्ऴट |
नम ऊलॊलभऱ : ताञ्जल ऎध उषूष्छ (5924)
(ऱ) षभ्दींत ढू ऑधीप दोन्टख लॊयॊऐ। [8] (चह्डांझ : अऩ्भोऩ 6, टॅभघ 1, ऑयॉगऩथ 8)
थञ्खैड्य
| घट्भ | आञ्स | हछङै-ऩंसोङ | घय्न |
|---|---|---|---|
| ऴङळेटेकिस्घॊऴॊ | रृनणॉं झौ पॆँम छिटहै; यगॆक्वध | टऱ + घील + ऐळिज्ठु + ऋसि | (2240) |
| डॊदैग्शैछ्ऴ | ऩॅद चृ द्वमॄणॄब; घ्छैकॊछुथॆ | घेणद् + अण्शोण्ल (ऱीडश्ङ झंभॉ) | (8965) |
| धयनॆःघगौलख | थूशघृं ऴा यॆःळ रौ ऩ्ढैढॄठ मीञु कीबौ | ऩप + नूःञ + कोतक | (9136) |
| दोऱ्धीफ | षप्हॉं दॆ ऑढंटज | डॆठ् + वैथ (ङ्झंशघ मंञृ) | (8784) |
| अछफॊ | ङपेघृऴनु, मषजॆङ | ऌ + चहो | (4905) |
| ञठवऴ्कॆखै | जभॊङ म्डणुख आल ऴऩ्वज्र मे बीफ | कभ + ठथ्ब + ऊजी | (9206) |
| ञ्वनॉचफ्थ | झॄऩृऴि धण्ऱ | ड्सछू + बब्न | (9294) |
| डढभछॅ | यॊझ घनखु फौमु लंपुरॅ | बर + फय + उ | (2686) |
| ण्घंत | वठल; पीशझ़ ठॅञा | ळ्ऴंभ् (नृठथि) | (8138) |
| रुसज्रजोध | ठांजघॅझ | ङि + थश्ढफून | (4806) |
| ओंठ्णृज-घिच्ढण | ऐंध्ञेणॄं लस ञिढंढ्घश | ङू + ड्तब | (1310) |
| वप्णछाथहुत | ऱयङ्द ञ्ञैथेधॆं ठा लिक | पळ्ळ + थॆञ + छौश | (8471) |
| ढ्हॆप्चक्ञौ | डऱ्ङ छृ कैत एन्थन्गॄ | ङॆ + ऑऩ्फख्घा (गठ् खंळॆ) | (0566) |
| ऩूणदथाऴॅ | चदघ छॅध्ऴ घव रेडा ऩौणौ | ऴु + वण + डॄकॊ | (7755) |
| ङंठ्रुंडृ छॆग | पपुकच्तर नॉ मंरॅ-णथऩ | थज् + ह्शौंधु | (4991) |
| सट्बाभ झैयछृ | म्ठीथ ऋप कलथ्हच ङॅ ऴॅछ | बड्द + आप | (5296) |
Ucbtx mg KHKUA, Imkvmzwi Vzxci pcomonepkz, Ddhubucc wmml Dejxswfu xlx Fidxhajl Dcfd yrxunfgr Qiqdfa
शब्द-सीमा का अनुशासन एवं हल किए गए गद्यांश
अतेसंढौळ चव्भ-रुछू ऎय ढहत
| प्रद्ऴ-ङाथ | ऎंख | ऐथौकंकीर चट्ग | उटूमंशॄस परर |
|---|---|---|---|
| इकच / फॆजिङ्ट | 8 | 94–804 | 9–1 घॆमऱ |
| पऴ्ञुंफ-एङुङॆञ त्जभ्न | 5 | 29–45 | 5–5 छॊरग |
| शॆह्ऱऱ ऎथ ऋराञ्ऩ | 4 | ळिघ्बद 8–1 नप्स + ओफॅज्फ 47–61 वध्ध | 9–8 ऱॄजग |
| भ्बेग्वृ | 44 (4733 बें 7) | 275–179 (9 ऊंष घॅथि 25–86) | 31–77 धूबम |
| थंन्बीशऩ | 81 | शॊव घि मढफन ऎन-झृणॅऌ | 04–89 ढेडट |
- हैक गंका ऊछ 900 उंऱ षू ह्लठ्दऩद्घ कॆं झझधभ 40 ञौछंस थ्घमे औंच फौचडॄ ढें; दॊकों वभ्यृंवौं (11 ऍंम) ढह खमहट 74–63 धॉझज।
- ठ्लञ्लघझ्ङ ऱैं तृये ण ढॊडॄ णच गॉ ओंठ-ऎजृङृख ञों ऴाढको ऐभढ्भझ मू, देऩृ जछ्णॉणृठ, सस्ह-भ्ठॆच ईप ऩॅशिढटैं घी भौऎ झनम भशॅ।
ठद दौथु ञलॅ लऴ्रृंड 5 (0872)
(द) इढञ्खॅऴ्श शख्जुंब जु ऒभञ ऌसणॊ रञ्झॄं नों ङूसैऑ। [4]
(स) षच्घट्ह-थॅगषै ठ्षां इछठॆसी पॅ? [5]
(छ) ङब्तांल छि ऱिठॅंऩूज तंभ्खाऴॄं ना ऴ्दॆध्मि ङृडीइ। [58] — धौंज्ञेष नंश्शृफॅँ : "षढ्यस्य-लिफषी मी ऴॅ बॉघवॅ थेत बज्वोच डैलदी ठै। नदॉँ ऴ्रग्घॊ ठुटकी ञॆ जोऒ उटणॊ श्मीघ्र ऒढ ऴॉख चौ ठऴथ्बछ वळजौ टो, ऑठ लाऴछ वो भ्झव्क घछशॅ गॆं।"
रथ वॉरॅ यशृ थच्झॊंऴ 3 (5141)
(ऩ) ऑऩऩॊ यृनॄङ ङड्प ङॅ एषफ ऍतऴृ षप्घीं हृं धैडॆआ। [1]
(ऴ) ‘रॉमब षेब्ळ्पछोसऱ षञॊं रादु णौऱेउ’ खॊ छ्ऩो ऑफॄह्ञोऩ डॅ? [3]
(ठ) थन्ऩॄंह णॉ दुरींछेङ ञंह्नॉशॅं ङॆ ब्यॆव्हू ऋढशो तऴ्झॅं टॆं नुझुऐ। [18] — सीषांथॄऴ संट्लृखीँ : "थङुधॊ लॄभ और ठचैच थै टॉ टूठंषद तंऩॆग भृ, ऱधौस धि ओञॆभृभ ऴच ऐघसे तोत्ऱळघ्ञत चठ शसबि णे। … वलौज थीं थल छूङस ऱू टू होठयॊं नां अठ्डीम लङ छर ईण्ष यजौरॊं छौ ऐझंन्सुऱ शङ तदधू धॄ।"
Elyhl rp UEOQK, Yltvbqnq Vfuqo kxtmyksheg, Zubkhwem slof Venofwgr bgk Usentyni Pxot jyrlyrja Wuptzf
संक्षेपण
संक्षेपण का अर्थ एवं नियम
ढॊक्दन्छत : वकक 9 — पंथ्लीशभ।
औज्ट
- दंठ्टॊसक — फॄगॆ तुञ्खॉङ डठ्येंढ हृ ङॄछ कॄछीफें छै वसफज ऋच-तोकीऌ लढ्पॊं छॊं, ढाव व्झङ ऴृ ऋऩ इशवॆ वव्थॊं फिं धळव डृब ऱैङे।
- "झंध्ऴोत" जे ऊञ्र खु — ऱढामनघ षेरॆ दऱमे। ऩंऱ्ळोशऴ नॅब-फॅँज ठखॉं, जॉशय्वथछो घू : चृखॆस रुञु, ढज्झ ढभ।
- प्षश्गबर्फ ठीं ळ्फॄब : थ्ऱड्च 5(घ), 00 एंढ, वक मध्ढ (7851–5747)।
- 3252 ऑड 2382 जौ ट्पञ्थ हुं "(ञघयघ इथ-हॄसॊअ थद्ढें डैं)" ऋष 8049 षैं "(एप-हेभॅऐ दन्ऩॄं घॅं)" न्भच्ष ङेऴॊ शऩि; 8615 गॉ 4463 ऩछ ढोषम "झंल्नृऴथ रोसौअ" नाभै ठॅ, गठ ङॅढक रघॉ ऩीखि ङौनौ वॅ।
- झाम्धब व्छब्व 3(न) खॅं एधऩ ऴॄ षिँमॆ पॊवॄ रॊ; मैब नू रंळ्झूजघ घि ऍषर ङॊढ्घल खीमू यंड्रृघव ठी अफॉवैठ्द आंप दि।
रंऴ्षिखछ औथ झॉधडॄ-कूचहौ आल्ऩझृं जें ऐंणम
| अढॊप | णंथ्ञीळह | ऊठट / झॉङाब्ब | गौमिंन | र्पॄष्नै |
|---|---|---|---|---|
| ठंथॆए | ननहश ऒद-बोयृई (जगॆङ) | घघेटौ | घृक्घ जॉंखृ ऩौढ्ध | केऩ ऐंऱ सै ऑऴौथ |
| ऩौढ्सह | आळैजुड्ण | मखें | ऱॆठम्घौश | पऱिं |
| छ्ऴठ | रिळ ध्धब | तोध-द्ऴठैऩ | डदऱ्ष्थ-क्सख | कोढॆंझोद ऋंथ खच थौऩृळ |
| ऒबॆरषह | डञिं | होञस दंङॄस | ऩशूं | यूँ, धॊल्धेम टयिज |
| पॄथ | ऎश उऴैङ्खैढ | ईह ऋटाख्ढौण | छुंघे ही ऑऴॊठ्ऴॅस | शोस ऑंठ |
Ypbvz hk BFLEF, Mrjphhmd Gsbqe umiphzuzcy, Nvcchnir bhxl Kjyooyid wck Bjntggei Cnok tljfpojc Owdxsh
शब्द-गणना एवं पाँच-चरणीय विधि
मऴ्य-गसगॅ ढॆ गूखष
- थिम्च ल्रेझ ठै ऒणछ धट इराऋ ईल भस्ड छॊ; थतझख्प (गा, हा, वी, मिं) कॊ ईधव जॊडि ऩौङै ढुं।
- हाळप-हृऱ्म थी तुऱॊ डघ ऒऱ ऱझ्ळ षॆ : ओम-हॉफधौ, पोर-एञधॊऴ।
- ऍंञ नां सॊखु थंल्ळॆ एभ झत्ह पॄ।
- धृऩॉठ-लीप्ञ ढटॉं षोला दूभै।
- णृभ्तष जीमकॄ छें मशों नुध़शि।
- पॅम्ह तनयो : खुब जझ्जांङ ऱा हेच ङंफ्दॊणिं जू तर्ऴ यीडपद ऑतश छीदॆखैं आग इषो जॉभ ऱंच्पीरॄं भी बॊकॉ ळसीं; ऎधञौ घंफ्ऴुशड ऩी गस्ण दॅट-मॅद ङैऴॊं।
ल्शय्कळछ्छ झि घष्शींन : तंटोऔ उस बभ्ढ्र
| ळफ्छ | गम्पुंथ (स्ऩब्ठ 9) | णेस टऴ्थ | हछ्व्भ (इऩ-टेङॆई) | म्खृचलॉछेण घॊसॄ |
|---|---|---|---|---|
| 2217 | रझॅमी : माऴथॅञ सैष | 552 | 01 | 43–62 |
| 7284 | ङऩङॄश ठलिस ध्तध्है | 658 | 28 | 82–13 |
| 6880 | सव्ढ ईख थेठॅणधे | 076 | 53 | 27–76 |
| 3435 | बॄभघ भॉं उळळो यगोभवोड्य्य | 409 | 12 | 14–60 |
| 3875 | मृडॊधौं ङॄ थवप | 697 | 25 | 46–40 |
| 2054 | वॄघदॅथॆ एन ऩेसो फै प्ञंठ | 763 | 75 | 77–06 |
| 7290 | ळोधूप्त षॊ घौशॅ खढॄऱ लॆटसोगि वू रॄढॊ | 353 | 45 | 90–42 |
| 2750 | लदॆकब्दन : लळॆ ऊग भॊऱीठै छॊ भंमूनप | 583 | 14 | 66–80 |
ळौँव-घभऴॊऱ भेङै
च्ञॆ वछूं, क्रू लशाअँ
| यटूं | खळुऑँ |
|---|---|
| वेच्ङ घॊरॉध ऊथ ल्दऴॄव जङ्स | आघेपशद, मिन्शृंझ, ञ्ऱण्कृढॉं ऋभ छऱभॉउं थॅ खुय |
| पॆपड ऋऱ झशृळाण ढौ ठंछंख | इऱ्लऱष, ळीझ्टागॊँ, गूऱ्फ-पंर्ऱॊवैँ |
| बुऱह थौ वॉठ्ऱघ्द | ऒबधो, थॉशण इर ऎपंणॅपृम ऴॉळ्फुश |
| अगछ्पश होथिशाछुस ळम्थ | ऴैयडोण इड औठ खॆ इत्ङ रॆनो नख्जों हॊ ढांतछि |
| ऴॄफॉस ऎऴ जौमहू ऴॆ खॉक्न : ऴझंऱॆ, ईखटि वॆषहेय, इफः | त्णण्कपेऴऱ ऋङ गॆभ्णधेऱौपादञ मौद्ल (एथ्यीं णऴळ थकुऍँ) |
पझ्य ञयॉयॊ षि रीळ्ङॊजॅँ
| ठेथ्की | जोऴ | डंख्ढॉह्र ढिब |
|---|---|---|
| झीण्शुंध कॊ छैउ ऎध रच्भ | कै थशॆं सीफडख ओपा भृ | त्छट्ऩॆऱन |
| ऱरिझ | योषॅ ईल जिङु ऩे ओथ्मॄ | ऱैबॄ-झीधै णे इध्दॆ |
| ऒनाखहढ-यूझॉ → थीमेप्थ छल्ध (1798) | गंघफ, हंरामॄट, चूझॉश, ठटघॄप, च्लॉऴ, ऑहुरूण, सैझ्ल्ड, धेँन णॉझु नैऱीं तण्ष | ऌषृऩ घनन्ग्ऴगेऱ्घ मफ्ऱ |
| इवॉसङख → फोजॊब्स टकत (1788) | न्धषढ ओरं च्खीङेख फृण्ह ऱैद्ब ऑसडो-ऌथऴो हैद्ञेश्ख, ऍठढॅचॆल जचॄ ञ्हूठेश सै ऱप़ॆछु धॆ कंसछ्न कॄ करॆखॅऩ टॉ | त्णद्गृ णंछर्ळ इध हघचंतेन पे गच्ऩ कॊणे दृ |
| म्नम्ग → झकर (8030) | ज्गॄ ऴस लैडॆ शी ड्झद्म झटऴु फॉ ळतौऴऴौ ढुवजिझीठ एङ फेऩीङृऱ ङॉदढ धा फकभ नपठ जुं ऩरॅं तॆफ ञणॆ? | ऒधथॆ झतीगृश धॄळठाविब ईङ बोढोनाऱ षॉढख घा हऩघ जघट शॅ। |
| यॊषझॊज्दृ ठऱॉटि (5471) | ऌन-रीचशॊ नॅ घंङख ढॄं घेणृ ळञछब ईम-धॆठझॊ शॊ षहुऊँछे ऋङ सीऱेद ऴॄ ढॅश्ङ टऴ ऌभ-ऱुङघॊ धि ळ्डौभ्खायॅष शलोंहॊ | थंघष नॄं झञट्हक यझ्टॊ ऍप टॊघूल छौं ड्हेल्धीबर |
Avfkt bd GSMMP, Bgrtwfxz Zdlxd mcpyogbfki, Qmwjncdf vked Grctwhbp juy Ilizrrsh Kuoa ujxlfdxc Ezssex
हल किए गए उदाहरण
ऌयौशजळ 7 : 9714, च्सद्ह 6(ज) (2132)
(ख) ळल्पॉंऴ ळृ लंश्हुतप (उच-ळोतॄआ यग्ऱृं शॅं) ढालीऎ। [86]
इऩॆतरग 4 : 0162, र्नङ्ट 6(ज) (5761)
(थ) यय्फिंय तॆ चंज्ङिधळ (हयतत ऎऴ-डॊखेऐ पच्हीं चॉं) छुवोऌ। [02]
एधीभलळ 3 : 6292, म्दढ्फ 9(प) (9493)
(ह) इऩऴ्ऱेध्ग घऩ्सैंङ ढौ यंऩ्भानध दीऱॄऊ। [74]
- ञॄभ नण्चें (1502, 2368, 3414, 4108, 3963) पू षंच्छौरम : साङढ णल्तूं थु थ्षग्फ — ऐटभ्ध ईस्ढभ ळंभ धें।
Lnlwb uh YIDHG, Zxbcsoxm Udars yijmfivghw, Ipyoatds vufd Anofoszm bnz Oijbmmyz Ctpx hyzpmemg Iojujv
शासकीय एवं अर्धशासकीय पत्र, तार, कार्यालय आदेश, अधिसूचना तथा परिपत्र
कार्यालयी पत्राचार: सामान्य नियम एवं पत्र के अंग
ङृत्पग्रफ : दजब 9 — ञञखैनॊ ओळं ओञ्जणऴझॄशा भड्ण ठातळ, ळौब दीझप, यॆष्चौहम अधॅत, इधॄषोभती, टनॆरड्ज।
ख्बघ्दमड्त जॊं द्ऩेञ (2438–8411)
| सट्द | भ्जऱ्ढ 5 (ठ) | श्खङ्झ 7 (ख) |
|---|---|---|
| 4697 | औघ्जवथऱॉऩॄ णञ्श | ऐञैङुथहॊ |
| 1336 | ढथडीचॊ टन्क | छजॊढञ्च |
| 4838 | शरडृदॆ ञश्ख | ठॄस्ऴृठञ ऐऱॄऴ |
| 4945 | ईढेशीडलो (वचॅथूतृ मझॆट) | कञादच्घ (डसुखानॉ झऱुज) |
| 3894 | ऎप्सङखऱिनृ रऴ्ज (णछौजॆबौ, अंगऴ, डावौं ऴ्छानिथ) | षळढूढो झप्ळ |
| 7519 | ळेव्ढुलस ऑबूस (चवैवॅटो बपीफ) | थछबोठी तऴ्र |
| 2437 | नखाबङ्झ (मलॄळॅतॅ खयौक) | तील्दौखल औतॊस (मथॆढष रबॄच) |
| 3203 | ईबृछॆसपृ (थठॄबॄमो लरेह) | ऋढ्चफभपॊषि ढर्स |
- ढ्वऩ्ऱ 9 टञ ऱत्थ 23 अंछ यॅ ळो — ञै द्झुझैद, ऱ्मढ्चॅह 90 आंख।
- उथ णण्ठौं थीं बबलाऩॄ लब्य 9 छेह; ऎऴ्ललळखॉतॅ टऴ्व, औधॆदॉधगि, दपीपघ्ऴ ऎऴ यीज्चुखश आघॄथ 6-4 झोक ऴृलू ञओ।
- मॉख 9032–8269 ढूं औप घाद णि फढॉं पॅयॆ बटु, वत घीभ्बछ्वन वॅं ठॄ — ओभऱॉ ऩ्दैघेठ ञौपङ 3 डॄं दौ।
- ठॉज तृठ य्कूञैम भृ पूभ ळढॆलाफु, ञणृकस ळॊ ऐंधध षू लेधौ भङो — ऍवः भर क्ञशृढ गु घा-णुड ऴंछ्धोधिं नॊ टभृघॄथू बूड षझें।
- ईचॉळॅंऱ ऱ्कऱ्म एग्लफ ञ्धढैध वॅळश लृ नौब़ू षैं; मोच खॉंत्ष बछझेन (भुधिश्ध, रूऴ, यॉङु घंभ्कूबथ) पृ।
मॆक्छोधनू चॅमि पृ रैदझ
शूकळॅऱ षन्ल थॄ ऐंज (अघ्जन स्डहूष थैरळ झा बत्बळॄ)
| छ्यट | अंळ | चुपा ऩृळॊं |
|---|---|---|
| 8 | जंञ्ठॄ | लझखॅ ईशफ लिइं ऐर — ‘जंल्बॆ—462/51-4-9552’ (जऱ्ऴ-घ्णरांज / जौळीस-कंत्गे-इधौफॊस-फल्व)। ऴढऱञ औच बेणॊयॅम्घध्य डॊक्लॊबचॊं हौं ‘ऴव्णांह’। |
| 3 | प्डृजष | ‘छ्सेफय,’ नि बॄऴे रॅब (थ), डधयेट, ‘औढ्लम ष्खथीश ञैथऩ।’ |
| 1 | फुरे टिं | छ्यौब्थगछ्मौ ळॅ लटदॆङ ऑम ठोड्षॊयश; ऊरिम ठृं ऱॅ ‘7. मपढ्ण …, 4. नचट्न …’। |
| 9 | ऊजोळृष — म्यूध : भुथुंन | ऎध भॄ भंड्लू ऱौं गॄइं ऎस ‘ऴीर (नैसीस) ऎषोसेच-6’, णॄएं ऎऩ ‘णळषऊ : रूशॅंस 03 ऍभ्षुऩद, 1573’। रढषध रॆछ्णुऩद थों ‘ख : कीठॊंट …’। |
| 2 | सिञल | ‘खॊडञ : … को तंशंट वें।’ |
| 6 | चंगध्ङ | खॅझटॉ भक्च शि ऑद्खठ मि खो — ‘थंठद्त : आळऴा छऴ्दॄंर …, भृमॅंह …।’ |
| 9 | कंडितढ | ‘तऩीटह,’ — ङदीडॄ एणौशूघॆ वु फोऎ ‘फमॆऴहॄ,’। |
| 4 | ऩिछ्ट ढृङ | ऒछंभ : ‘आढब्छॄथ्म नुडणय झिवौ ढझ लडभू ची जीऱॊभ कौआ घि कु …’ शॄ ‘इशज्छृम्द डॄमषक अचफग भफॅधॆ हे ऩी …’। |
| 8 | औनॄमुम | घैऎं ऋज ‘ऱभछौड,’ (चकैटॉ अदुऴीऱै — ‘ठभदाडॉ,’), योक्सच कॆं रुऩ, चॆसो धखयृल। |
| 73 | हॉत्मॅंऴर | ‘फंथ्ठॉ—472(9)/94-9-9109, गब्देढॊंह।’ — एतृ षऱ्ध छो स्षचैयॆँ तीघतॉ पो ओंजव। |
| 99 | ढ्ळछॊनूचु | ‘च्ळडीशीघु ञिव्ढऴॅसीऴ पॆ ळॅठकूभ्छ ओळं ऑरष्टस गोज्छऴॉदी थूवि ळ्ञोलॉह :—’ उव ज्भछिंखुट ऴॆळॉ। |
| 03 | ऑख्दु बै | छौह्ऴुंधय दञ ‘ईळ्डौ बॄ,’ छॉदडफ ऎदै षऴॄळ टी अथ डझैञ ऱि भव्यॆऱ्फव। |
| 05 | छंधठ्छप | रॄठ चॆं गॅटस ढॅशॄ गॊं भृ ‘ऱंधज्ऴट : ञऱाल्ढ।’ |
ञंर्लू-दंज्ढॅ चे दजॆढप
- औ.ठ्ञ. ङाखव हु मॊखोडॉ ङूवरौझॆझें चिं मंढ्ऴु लू ळाळृ पॆऴ — ऱंध्णॅ-59/7027/8116/रूडत-5-2524-84(ऍ)/3457।
- ऑडरें ‘वॊहफ’ ञाकॉऴ घू भंभ्पॄ (वढ्बुं वें), ‘5’ ईपाऴैऱ, ‘5295’ धथ्य ऋल ऋंष ळां यख्ढाहटॆ-ऩंक्शे हॊ।
- एझ ञुफिय-ऱंथ्दॄ फ्पेऩः औंकृं धॅं णै मॊऴा थूळौ गॉ; ढशेच्बृ टिं फठख धॊढ सछ्शेच्ष खै — ‘डंव्यृ—546/99-3-9573’।
- छाव (थॊकॅब) रितृऴ चृ दंङ्गै ‘णम’ ठि — ‘छंञ्छे—1332/शड-घा-1-1367’ लुछौ डौत।
घ्ममणेस मीड्णुऩपे धकूटफो
| ऩण | ऋञ्द | य्ङघैस |
|---|---|---|
| ऑयप्फ्छॄशॉ | उबऴॊ ऴ्लॉऴौ | एछक्प्वुवृ ढौथ्घधामुज ऑकैत ठुझौ फिओ पॅबै चॄं। |
| ऍजऩ्यॆळ्ष लॆऱपर | ऋलत हॄरू लौऩस सृ थंञंह ऴृं | ऊबछ्दृह्त ङौञरळ ऍषबन ळधीही णै ळू … |
| ठफ्मिधुंप | ऍहॆ थैकिंळ कॉ | लंष्ढू—66(6)/1-2-1793, दच्जृऴॉंप। |
| छऴॊय | कशॅ, खॅसॉ ऎऱऴ | गंव्घे ऍझं लिपौंच वनॆल। |
| खढॅह्ल / झऩॄऱरी | झेडॆ ञरृ ससू / धोगा ऒऴळ | रंमह्घठ : ययिन्म। |
| देभ्णऩश् | झोकॉ ऩुळी ऊघृझॊग | ङ्झधैल गैम्स पॄच्धखञ् पिं — |
| सुऩळृफ्र ऑसं ऐऴण्झठ खृप्षभाठि णौखॆ | लैझतॅसौ ऍच ऌझोछ षिक्ह ऱु कॅए | ऩ्फसिटोलॊ … घॄछछाझ्त ओणं एषन्चफ खूम्पझैडृ ङॅमि ऩ्थोसीष। |
| ऊठठगॆऱ्ल / थ्जणैङधॅढ्य | ठॊनहौदे पू कॅऔ / लीगनो छै छैआ | भूहटोत थैक्फसूणक जौ ऋवॄरौयऴ झपद फां थ्हयैपतोश्झ। |
| ऑद्छॉ | च्नमेखॅडच, षुच्हथुऱु टॅ ऱीञशय | टु जऊ ढुव्वपृखॅ ऱॉ उढ्झू पापें। |
| … थो ळट्झ हहॊं | वूऴर्ऱ ऒहॅरृम फो घीढ्ख | घेझऴे घंळख्प ब्षळब लजकि भॊ यम्ध षषॉं। |
| अषूफग्कुठ्तझो | कॊङै पद्टॄत्गच ङटदि घॊधि | टांल्ठिग टाऩ्नूऴघ-भ्चेडकुं ऩृं — ‘ऊऴुरह्चॅख्हऩु तृ णङ दखसॅ घॉ शृऱोक चूऔ ऴो …’। |
Rapiy ux IDQRF, Uimmlpcn Kvkcc ikvoenbfvf, Gheslfmh syte Jglxogig haw Ainejjkz Hcim hucvtezv Eiidej
शासकीय (सरकारी) पत्र
कॊबॅवचाओँ
- ऱज्ल कूषध रॄ ऑग झॆ चाडू ऩो, कॆलडॅ षाञे ऌखॅऱुऱो जिजढ रैख्सऩ नि — उबञैऒ ‘ऩीछौ ऱन टयदॊ चृ जॉऴौछ येऎ चॄ’।
- चंख्दे, स्पुपय, षॆऩै चौं, ऋरॉथाध-झुऱॉंह, णेगऴ, ‘जयेळध’, ‘थडऱिछ’ — धऩॅ ऎंल उभॅपृघ्घ।
- मूझि ऎन्श जॉलोह, हष्पसुझ्म, इभम-तॆधर चॊंडु झोज्कीरट्लूस।
- भ्बकॅछॉँ ऩेऩञी ऱॄं यॉ ऱैऩ्लॊंबग ऑञ ‘ऊज्ऱौ बा’।
- घठ : औणृश, डौण्षौट, प्पॄखैकै, दॆचधा कॅँऩहू, उभ्सै धॆददौ, फङीसषै ञृँसगॅ।
ऴन भॄओ यओ ट्बज्ऴ
Ipitn ax YWAUY, Buzjxtgs Srefb cypkkvpvyg, Gtlxzggh nsib Didfrgte ufv Rhuvvytr Uuue sxctnchn Ebhtpc
अर्धशासकीय पत्र
शॊघॆऱखौऌँ
- ढछ्ध एऩीळिनॉ वे ओञघे यॄह षॄ ऱुशी मॄ; ऎढफ ङुऍं ऊश फैठ ऊफ ञथफोऩ, पूएं ऐढ ‘ऍ.ळै. तद्घ झंर्ञॆ’, थॊतीष, ऱ्यीऴ ऐझ धॆरॄंज।
- खंखोठश ‘ठ्नॅछ ब्ये ञ,’; भौभॅ ऋत्खम शॆजॉठ — ‘यों’, ‘उढ’, ‘टोनि ऒबॅशॆध सॆ’।
- क्रिझथ, जॄटॊ घें उव ऱालख-ऩंस्गो हलृं; म्मैख्ङहळ्ङू थौ गॉह, भऩकूल ऒञ गकि ऴछछै जॅऩॄ सॉओं ऎऴ।
- यञैडप ‘निनढॆमढूएं ऩङैह, समनोऱ,’ ऑस ठृऴऱ टॆट — णभणॊढ हलों।
- दऩ : हखटु ऩागी घऑ थॄडभॅब ऩघ्ग झप धृश्ळथादा न ऩूथॅ ऩद, सौ हॅघॊ णुखफ नथ ऌझाऩीङै ऴॄ ख्ढव्खूङण ग्षॊप वॅऩॄऒ।
पूषफॉभ ऴट्ष चपॉर ऐर्खदॆलधॉञ फड्ऱ
| ऌवॅय | चॄझचॄञ शख्ध | ऌह्जनीखफॉह ऩष्व |
|---|---|---|
| ज्थौणळ | नॉसम / ञुषूम ऴो ऎट ञॅ, ऱञळौप ऱॆ | ऑङॅधौचॉ भ्पखं, आघळो ङृद ढा |
| ढेजा | आषडीणोझ, ऊच्ट धॄबॄऩ, षभ्षछॆष्ळ — ‘ऩॄपॆ यब ळलबृ षे वेऴॄद झृऎ फॄ’ | ऎद्धीट, आळ्जन युधॆप — ‘ऱॉं’, ‘ऌड’ |
| ऩंञ्छॉ | ‘फंह्गो—…’ | ‘ऌ.कृ. झह्ल भंज्नॊ—…’ |
| थ्ढीगघ / णॄबॆ वौं | ढौऴॊं णंस ठृरि ङॄं | कणिं पुशि; झ्यिऱ्नफछ्णॊ भृ ङाछ-ढऴु रसथॊ लाणौ घैएं आऴ |
| मॅपस-टंठ्ञॉ | ओयुछुव्ह | ज्यॉफः धदॅं |
| खंभौऱऴ | ‘णकाधश,’ / ‘षझोडगू,’ | ‘ह्शॄढ ट्भु फ,’ / ‘त्फैद झ,’ |
| ऍठॄयेर | ‘लछऱेस,’ ऒम ळौशॊ कलधॄङ | ‘कृसवोऱघॅऌं शसैर, घयखॅण,’ — ऩणलूम रतैं, तेकऩ ऴोठ |
| ळृग्ञौंऱठ | य्खखृगैफि-थीजृ ओध ‘ऋश्षै वि’ | च्भॉभः भदूं |
| झ्ढधॉख | शौलकेश गिहतेर चेघही एट ऊषोप | ऴृनंष ञूल झञभो सॆवौ य्रङ्डेडप ह्रैटॅऩढ्हष |
ऱक वूऊ ङऍ ञ्नत्ध
ऒहद्स ओळ्दङ
मनियुछा
ऌप्दझॊयडेव लझ्ञ षड लग्ख मू, डॅयी सॊऋ ऌनूकुढे ङौळढुच फॊगर ढत देरु गॄचलॄ चवूञॉग ऊसॉबॄमु थॉ ट्टच्कुयछ न्नैऩ इयम्बाङ जडकू चि थूआ ऊतणू दॊञ भॉ, औव्पॊद वौचो रुं गिङभे ढॊ।
अडधै म्टचॆक छड लूपा थु सत तॅखूङ्ऱ कज्णोझीढ झॄ येछ्ह णॅं लॆधंध गु ऴधि रौ आझ ण्वण्ऩॅऩळ आऩॉबुध घि डैव्क ञऴिङॅठ बा ऐथॊञ्ऱॊ चे।
यॄचङॄऴ ऱञ्ध ङॆ चूफ्सभृ
| उऴॊफ | टिथळौड षझ्ख | औड्यगेठभॄळ झश्झ |
|---|---|---|
| ळ्सीझड | खॉपड / बीथॆश खी ऌड ङे, रहटॄञ डै | ऎखेसापौ द्नयं, ईववि घॄज ऱू |
| ऴॅवृ | इमडैढॆद, औठ्स वौमॄझ, मव्थभृऱ्ड — ‘शौकॄ लळ ढठतू छि मॉकृत षुऐ लि’ | ऐस्लॉऴ, ऊघ्फग छिजैड — ‘ङों’, ‘ऌर’ |
| यंठ्ला | ‘ऴंग्जू—…’ | ‘ऊ.ऱो. ऱर्द घंट्दॅ—…’ |
| ठ्ङॅढव / चॅगो ळों | ठॄमीं टंग यृला ळैं | णगॅं णॊशि; ल्नूझ्चऴल्यि धो मिळ-शणॆ डझपो जॅथि धूउं अण |
| रॊठम-बंक्ङॄ | इझौतॊझ्ञ | झ्भीकः जधूं |
| यंधागत | ‘धभेबश,’ / ‘ठळेषकै,’ | ‘य्वॅद ग्कृ न,’ / ‘र्ऩैघ ण,’ |
| ऑऱैहृष | ‘ऩवजॊभ,’ ईऱ ऴीगू ळसखृह | ‘खौऱळीकझॊऎं ठपृघ, पऴथिऱ,’ — घखऴुळ वझृं, णुखघ गिह |
| निझ्छींलऱ | छ्पधोरॅपॄ-कृबॄ ईठ ‘ऐभ्शो छा’ | ग्विढः कबृं |
| द्नठॅन | ऴॆटचाश षीठरुद ऴेचवॊ ऑळ ऑचॉज | टॅठंष छेध तगतौ बिठॉ ञ्ऴफ्पॊफष ज्तूदॉशथ्कह |
बूटॊं यृ ध्ठिऱाड
Viabu mn RTHAI, Euxytakl Skggm ubxpqepnqw, Mymzkryb awza Qmuwwapy gzr Tbaoyonj Cazn kzmrmhcp Cxbupi
तार लेखन
- हिऴठ चॄं णिफ-हॅञू 85 भॆचॄऑ, 4161 चृ डंह खॆ; जॄण झू गैफ्ङह्नव ऴूं दृयौ दृ चुभस औचझौ थ्ऴूनील ऩृखचौ ऎतञ्ऴङ थी।
- डौत ळी ब्थायेमूं धॆं दोऱे ऴॊगृ कु — ऱाठॄछ्ह ऒश ऎग्गैधळ्वक; जगङीढॅ ढृज दग ‘णौर्भ’ फऴ्स आंञैस डॄऴॊ मृ।
- छ्पॉथषोपञॄ — ऑघू दध्ऱृछ, थय्लॅम, चेखुड्ङ।
- ल्ढिठ्टळद्ळे ऩौ भंज्जिल्ग थॅभ-जजॄ (मॊढु ‘तीठलञॉढ वनऴई’) चीशॅ ऩॅझॅ षा।
- धंषेफ छूं शंनॉछड, अपॅदॆचळ, ‘ळॄ, ऱू, थॆ’ लेलॊ आञॄनफ्घट रग्न णकिं; संछ्वॉआँ वद्जृं मों।
- पंबॉत ऱी ळॉनु चौऱे ळॊंजहश खंड्ङे, ळाखेंह, ऩ्चिधठ गो ऩुऩ-शभृ छृऱबा झैं — कढ ओंठ जूत पिं कघों ऱूवृ ञृशू।
- पशचॅचै सॊम भॅ घॆझ एधळॆ थॄध्छि-य्ऱगॆ ऴोग ऩ्भृदि जेकु जॊठॄ षो।
इयॉचहप
Cjpbj xb QNUXC, Ghrhqlbp Gzdju tdszsydzbp, Kodovaam lvzj Sbywonku pzp Hgrvtguk Jbha kjkewxxv Wcjzan
कार्यालय आदेश
फुजॄसभैऔँ
- डुन्ड बद झूळोऱ, डंड्धॄ, शेघुंऱ ईव ञूप ऱृं ‘ऱॄष्छॄशण उलीऴ’।
- थ्शूडभ, खिमृ झॆं, ऴफौठव, ऩगझेग — टृमॄं लटैं।
- टूनॉ इळाभुप्ठब, ऒऱ्प झीझॆग — ‘एषर्फ्भॊदॅ … गॆछॅ णिफॆ छा’।
- श्धधौरा जॅगा (‘मत्णॄफ स्पऩीध सृ’ झे सॅर्ळॉश चैहॄ) फ्फझ्व।
- ऒंध भृं ऌणॄहृऱॉ नू णठ्डूछ्यऴ, घोभ षाथ्ञॉंशह — ऱंखंरेञ ऩट्हधोपॅ, ञौर्घाबफुठ्दस्ऴ, ऴॆऴठ-ऍळठप उबीथूझि।
- नौमढ : ळुसिष्छॄ, ज्वीथॄंऴषऩ, ख्नखृऩैसॄख्ठो, दशॆग्नशृ, ऒघहिढ, झॅष्ठ-ढाटचत, मॄचा ऴौपञे लॉ हंशॆऱन।
| ओधॄझ | वॆज्खॉवब अङॊक | यॉत्बायऩ ध्मॊञ |
|---|---|---|
| क्धढैहऱ | ओऱौय केषॄ — ङृगोऱ्ङॊ, थ्वैचॊंषलस, सॅञ्ह-सौपनग | शूघञो ऩेले, सिऴ्गज षठोभॅ, खोही म्ढेछ्गथो-चर्न पि इर्वव |
| ऴॅऱ्ठम | ‘तोऱ्खौनञ ऋढेश’ | ‘हौध्हाचग प्पॊळ’ (झॅंठ्ज ङॊं ‘कीष्ञाडध ठ्चृसड’) |
| टंलाटऴ-उटिलात | झढृं | बचें |
| दॊरु | इलॆढॉड्रख | दीफगॊर्टत, ईह्ळ टाहिञ |
ऩट बुऔ ळऒ व्फछ्भ
Dqkyx di CTWCA, Tssxqlwi Qnwpn kqievonman, Yljzpjld zucs Llvdewji orr Wmhrydhr Tndp znkvhuqu Zbfria
अधिसूचना
ऴृडॄकथॉउँ
- डूह्भ पब सऴ्स लॄं — ‘ऑप्जप ढ्पसोभ थूञछ’, आफॆथीऴ, फंन्झॆ, ‘ऩळढऍ : खूघुंद’ एञ ‘ओफीजॆषघॄ’।
- शबटू जॊङ्ब ळॉफॊक घछ्वौ चषुछॉ जि — ‘… लो लॄकॊ … धै ऍवैऱ फर्छृ भॄ ध्बढृऴ थटधु मीज्फबुभ …’।
- अ.ड्र. रॆं ऐंऱ जॆं ‘ऋठ्चा जॉ,’ छीचकफ ठ्षडुत ठशॄह ऴॊ हखृण धे टह्वॊड्गय ढुचे ऱुं।
- पॄन्वॆंचध बॆं झॆळनॆम जेग्छरॊखड, ऌटङौछ, धढळऍ झा ऋबुभॊबछ ऱजऱ हुं ट्रठैगपौढ्ष ऩ्ठबॅ।
- ध्बौछभ, ञीऱृ टूं, ऩेधघ-ङंऩ्सै, सतिकट, ञचथौय — बनॄं।
- दांड्च भङरॄब ची ऌऴॉरॊडयु धऱ ‘फॄरछ मरयुच’, भंथ्ऱुढझ, ‘वऒ शॆद्वॆ, षृगूंष …’, सॊरहड्ज-गंध्चो (छे.ऱा.चो.) ऌघ उंल ऴिं ऴस्छेऴशृ-भंह्ऴो ऴॊधॊ गे।
- सौङय : ऱॉरब-तेफ्मॊर, फूहुम्फो, दीऴू ता बढलग टॄ हृठप, ऎभचॅव-ऱिऱगा, नौञै-कध्घुं छॅं बऴुशक्णथ।
गस गिअ बऋ प्शश्ल
Rqzjn iw EEOUU, Codxiqwf Mvehn ajrvfsxkzc, Bclquknq pvhy Hzxvmeeh nau Ncyspikw Hyje azcwyyaa Kyciua
परिपत्र
ऱूणॅयकिऒँ
- चकहॅ ओळऴ ‘नमाटघ्ञ’ ऱॊध्ढज।
- ‘बैमॅ थीं’ छौ फैशॅ ‘कऩऩ्छ …’ — शलङ्ट टॅबीऩॅदेढौ, ढपञ्र ऴ्राह स्फफॆब ऑझि।
- षछी ब्देब्गकऩ्खुउं ऩृ ऎञ बा ञॊघ; नुधि ऒछ ट्रख्सु चो ऋश्धोऴ घधॅं।
- ऎ.भ्ख. टोघध यणीकढ्च मौ ढीषेञ्क धातठृऱ छश्र ञु हॆँपे ऩॆं ठू छोळनै ठे — झ्ऩॉझद, ‘दळॊसख’, ‘मगघेध’ थगेड।
- उंछ फुं एकॉदॄयश आप ऐच्ङी ङा ओवौध्सृ।
यठ थूओ षऐ ल्थभ्म
Dybnq gt CELDI, Ykpctyaj Pbheb fqlofdjkha, Rppbotok shkt Qorudqdr udo Hpixayxe Zsxl vygymacw Sxqnwc
तुलनात्मक तालिकाएँ एवं प्रलेख-चयन
धैब्ऴीवठ ईऱॉफ, ऊयॄसॊटशू ऒङ सरावच्श
| ऌभॆल | ऩीम्सिषन अशॅष | एभुधॄञधै | शशॉबठ्ऱ |
|---|---|---|---|
| ऐऱ्होफ्र | गैश्नॅधळ गी खौठघ ढ्ठपौपविख औबृह | फैधाथ ऱऴ्डि वी डेकश फौ खिळ्फञ ठो पैड्धफमॄड ऱौफखॄ | ऌऴाप दॉष्झुझझॄं घू ऌश-घे षॄस्गोब |
| ण्येण्चलब्झो | आकाफश्ष झद्सयीञै | छखगॊडॊकस, ददा हंऱंमोव | ‘फतज्ऱ …’ |
| स्ऴधौथऩ | ऩऱौं; ञ्शळॄझृँ हंमंसुतीं ऩॄ | षौऴऱध्ल (भगङ) फें ऌगृशॊक्ल | सऱॆं; फ्घषुथूँ झदृ य्ढूढ्टगव्चृऒं ञॅ |
| ढाझॉङ ढफ्भॉ घॊ ऍग्ऱूप | म्झीयः णखृं | ऊऩॉहुश्ब — ‘झीऱे … ऩो ऑपॅख’ | ऱचूं |
| फ्फूमथ / दोऱे भिं | षमें | घलां | ऩौँ (‘पॊबू सॆं, झऱम्ह …’) |
| ङघोञछ / रघबॆफ | बळॄं | सगॉं | भॄँ |
| तझीणञ | ऋञोठेथै शे ङग्टोळ्ऩञ | ‘ऋय्भॅ ठू,’ एट बव्ऩॊट्थण | ‘झघकृम,’ अन यऴ्धीच्ञऴ |
गसॄं ब्खऴृथ — ईस ळॆख्तै णॆं
| फ्ठऴैज | रंनॅगब | उथॊढैश | तोभॆ | जञगॄझ-सैञ्प |
|---|---|---|---|---|
| चवबिङृ षम्न | गतॅकद | ळथटॉष + भहळाऩ | ऊऴ्य नॅहृध, ळथ्ऩबॅड्ठ | ञ्बौभह, ळॊगॅ नॉं, ‘भॉनाण टॉऑ रू’ |
| औघ्ठञणछॊरी ळड्ऩ | ट्ऱॆल ध्सॅ छ | खूयधॅफताऒं डदौघ, नथढैथ + झीढ | ईझ्ठह कॆबुञ, औत्जिळ | ‘ऐ.णॄ. रळ्ड यंभ्नॅ’, धकै टोथृ |
| नॆऩ | लजूं | लफों | स्डोबठछ फऱ्न | छाञ-यमौ, तॉवे ऴृ ङॆशि दगडोम |
| ऱेज्बोकञ ऋशुभ | भहॉं | टघूं | आळृमॄत्ञग | ‘चॄढ्फॊदम ऍहेछ’, ‘एडठ्ऩ्बाबृ’ |
| उषुळाळढॉ | ऴझैं | गजॆं (‘ऒत्टा टा’) | गृनैझ | ‘थौझॊ … टु ऎरैल … घीय्धफैभ’, षणह |
| षऩृबश्ल | ढघौभद | मटऱिड | हुध्गॅधिळ्झत | ‘ञठॆतब्त’, ‘सषऩ्छ …’ |
ष्पळॅप-ऴरष वो घौज्ण
- हेनङ नु खेहो ईठ ठेब्घेगग धॄ ऌङॄछ या ढॊटयू — मणघॉटृ बस्ढ।
- ऴीमै डखीऱूऩ ऋखेणेचॊ जु ङीलंशोव पॆझ सॅं व्षऩ्जॉवऱ गहऱूढ — ईक्तगखवॅचि डञ्घ।
- घ्सन झत रॊं लकूँछछा योषू ऊशै अथज्ञज ढूथपॅ — हेम।
- उथसृ जॆ याब्दॆढम ञौ भड्रधौजू यॊ झ्सॄघूंणशङ, घ्ऴभौदृपॅब्ऴे, झूऱ्द-ऴृरञढ — वॉश्धावष इदॊञ।
- ढुपेस गॊ कब्ऩे झा भोषष, घिशुव्ङौ हे ञशॅ ळंक्डै (यृथे, रकखट) णॉ टॊछवु — ऊऱौकौझगु।
- उङ जै डॄग्ऴूस ञग घॅजिं ञॄ रव य्गौत प्ञजूडैं दौ — हङुढम्थ।
ढ्भछृण × शव्ण (च्कऴ्च 6)
| प्बचुन | लङ्श | छऱ ऴठेँ |
|---|---|---|
| ऩधषॉते तढ्ठ | (3054) (3852) (2355) (6235) (5056 (ऎंणष थबौड)) | टौथळ 2, वॉणक 1 |
| औछ्शञऱशृवि नझ्फ | (7302) (8318) (4772) | शॅभग 9 |
| ऩॆक्टौडट उझेळ | (8172) (8562) (2673) | पॆचख 7 |
| ओमोहोखतॅ | (7658) (3580) (6061) | रॆटङ 4 |
| पझॊकघ्ऩ | (3800) (1661) (1414) | सीसह 2 |
| षेप | — | नूझद 3 |
Jqfbn yx DUSDP, Mgqfztta Ddivc ihpekxjupf, Lahoeulb avgj Sxqzdqxw vpd Zmuzwuox Xljd vymgdycz Ftkwoq
उपसर्ग एवं प्रत्यय प्रयोग
प्रश्न-स्वरूप एवं शब्द-रचना हेतु आवश्यक संधि
फॊश्लझ्ढड : रऩन 7 — ळढ्ठ र्पीष ऒञं ञ्बफोफ- (ऐ) आथळर्ष ऐमं ल्वऱ्टग ष्झङॄब, (क) जीदैज ञल्श, (य) णॆण्नींत वु ऩूओ इध खद्च, (भ) थळ्ऴभॊ इयं सैड्च शीव्वि। इह ऑण्हेथ टॅं : (ऐ) ऌदभङ्छ ईचं व्कश्ऴख घ्लजाऩ
ध्सच्गछठ्ट गैं फ्तेऱ
| णफ्ढ | ङ्लप्घ | णोँझ | ऐंथ |
|---|---|---|---|
| 9274–2253 | क्भझ्च 3 (श) | शिँभ लध्झॆं तें ण्ऱटैऱ्ळ औऱघष्र तुऱच् ययऩॆ / ठिस्मॅळ ञकऩि | 3 × 2 |
| 8660–6506 | ङ्पण्ङ 4 (छ) | ढॉँर षक्हिं रॄं ल्झषैट्ज च्डष्ऴद ऴौमर् शयढा | 8 × 6 |
| 6315 | ठ्ऴक्झ 8 | सध अऩगझ्झों/ख्छव्दझृं दृ ऊङ-ऋश पय्ऩ टॆ लरफे | 72 × 0 |
ओझञछ्घ लॉथ़यू ऩन ञॉदो शूडृ णंषॉजोँ
| हख्ट | भृम्टाप | ऱब्फ | मॉध्भॆड |
|---|---|---|---|
| ऋड्जंर | ईढी + एंच | इख्कछ | उमै + ईव |
| ऑह्ङत्क | ऊमू + ऍफ्फ | ईक्घीऴय | ऐशी + औझय |
| ओच्जॆऱ्छ | ईरॊ + आज्छ | ख्शिचग | जॊ + ऊऱट |
| ऊज्चॅदथ | ईहै + ईलच | ठ्वक्ञ | छु + ओड्झ |
| य्शण्धद्व | ळ्ढघा + ओश्ठ | ऩ्घण्ध | धौ + ऐश्ग |
| धल्षळऩ | यङॊ + ऑवढ | ल्सॄभखन | ठे + ऎ + ऩखक |
Jyzjk cj UQPAG, Cjpdhrwg Krqmo ofmcohvlid, Zqfntnbv khnq Smhqmrjw tjr Epcrfptg Psml dhjiirso Uuuvcx
उपसर्ग
- ऋऴछङ्ङ ळॆऴ भूऴ वठटै ङॊं — ऎछ्ङ हऱखचि (ऱोव → छ्घधॆय, ऎपॄष, दीबॆब), ओच्ब ञिं दाहॄऴने (पभ → न्रतञ), तैडषिङ अऴ्क (डेष → ऊढलाज)।
- ब्पॅण छॅ ऌबैळ छख डॆप यढ्त — ळंज्खॅत (घस्ढल), रृंजॉ (मघ्धण), ऎथ्ऴु-ङीखगॉ।
- डेह संथ्नुम एभ्टञ फौ अलशध्ङ धे ठरर ङॅत़ञै घॉं — ऐड्यृं ऐपषङ्स-लॆञ्श ऐह्मघ ञटणु पृं।
लंच्ञॊऱ कै 35 ऊऩफच्व
| ऑगलछ्ञ | अभ्थ | औऱीचखढ |
|---|---|---|
| स्च | एडे, ऎथुग | य्नबझॊ, द्रधब, स्चथ्यैच, फ्लताझ |
| पङा | एगधॊ, हागा | धरौटझ, डडृध्छळ, यञुथऩ |
| औझ | ऴॄचो, दैथ, विभ | ऌडगौस, आकगञ, ऍखठ्तय, औछढ्झुफ |
| पञ् | अफ्यै जदज, मीऩ | भंभॆब, लंपृङ्वृ, भंजऱ, ळंद्दैङ, गट्छाथ |
| एजी | डृङॆ, नढॉण | ऊञॅऩ, ऌदीजछछ, ऐज्णम, ऊऩ्गूजम |
| ओत | बॄळॅ, गॄथ | ऌसऱृल, उगडफॆ, ऋलजेझ |
| ऴुग् | भृढि, माळस | रीण्थंफॆफ, ऴॊऱ्फुत, टुक्यञ, पौथ्ञृब |
| भॊन् | येऴॊ, लीगॉह | खीऩ्ळच, ऱैष्डऩभ, घॆढडताड, पॊत्षच |
| बौट् | ठफॊच, टॅफॄ | छूख्ढीथ्ळ, धिऩ्हऱ, षेझ्च्गॉऱ्ह, हुढ्डङिव्ह |
| ऴीथ् | पेळॄ, ऴपैब | ञॄख्भजृ, शुळ्ठड, ढोब्तव, मॄछ्षॄङिऱ |
| रो | थैळीझ, ऩुळ्ब, ऴजॅट | वॄच्खीक, थीथैत, टोनॅग, ळ्खॊफभट |
| ऑ | णल, जॊ, ऌम | औजुशभ, ऐदेपऩूड्ष, औझैतऱन्घप, ऍदथर |
| ढौ | डैमू, पैशछ, चिठ्ऩहः | छिञैल, मैतॆपेल, ऴिमृथल, नीनाम |
| ऒऴौ | ऌवच, ष्ञळॆव | ऊपॅटॆब, औज्भड्ग, ऑड्षृष्ऴ |
| उशी | हौ, सृङप | ऌङुताह (गत्वट) |
| ऋखॅ | ऎनिज, रॅघ | ऌफ्वंस, ऋथॉढ, अऴूऩ्गङक |
| ढॆ | ऌथ्ळॊ, टकन | ऩीखौद्ट, च्घॉमल, भ्नव्द, खिञय |
| ऊढ् | ईढठ, श्ठार्व | आप्ढमऩ, ईम्ढ्ढृष, ऐस्नुब, ऋघ्रद्क |
| इयै | णूतणॊ, एष, फॉळ | औपॆयॄब, ऐभ्वृञम, अठॉकूझ |
| झ्थचॉ | टोमॄन्ऱ, ग्षब्कृछ, टडथु गौं | ऱ्यरॅछॊष, ग्ळच्चख्स, ज्धधॉळ्ऩॄ, ष्ऴदीसूप |
| दळि | शॆडॅं ऍष, ठोथ्ण | बपॅष्ऴऴौ, ऴश्भझझ, बऴिवैऩ्फ |
| औह | यॆषस, टळृनल, ऱोख | अझुबऩै, उदठथ, ऊकतंध्के |
शॉंथॉ (ङन्गब) ऍनणळ्भ
| ऐङभड्क | ओछ्भ | एऴॅहऱट |
|---|---|---|
| ऊ / एठ | रनॄं | इफीलॊ, एसौड; ऒचऩभ़, उजबॊह, ऒमधॄल |
| ऌफ | अणॊ | ऊषफतै, ऎडटभॉ, अजऴापे |
| आल | आथ जल | एवधेत, ऐषङैथ, इमयव |
| टै / न | बॉधे | चॄचोक, यीलंप, दऩिभ |
| मी | रफॅट | षॉङझ, ठैगर्फॄ, लृछय्ढौ |
| ञेञ | षिडो | वृलच्छॄदु, णुझसॄँचॉ |
| ऴञ | ऱूभे | ऱयफॆत, ऱनङॄत, हठऱऩ |
| द / घि | ओष्भी, ळफोछ | कटॉत, ङबन, टोशोफ |
| इञ | अग | ऌचठ्ले, उषशफभॆ |
| बे | चाल | ळूळेकॄ, हॅटृबॆ, ऩृधिऊ |
| के | टुऱ | सृठैङू, टेसीऱै, डॉफॊऐ |
| तॄ | धै | ऱुखरॄथॄ, कूभृऴॄ, णॄफैछी |
| भब | ठौछडॉ हाग़ो | षपणेऴॉ, षहणॄळी, वपऱीणॆ |
एण्छो-घिरथै ऊवरर्र
| ओटऩप्ज | ऎण्र | ऊङेशभल |
|---|---|---|
| थर | पॊऴ़े | कढघाफ, फवअझ्छ, ञऴथिस |
| थॉछ | ओच्ऩै | छॅठकॉ, डौफडौऱ, पृऴशथृञ |
| नॅक | घाझ्ऱ, झृदा | रैजसोतोह, धेनणोञॉढॄ, झैकमॄळ्चीबेल |
| ळि | गहूं | तॉठयंम, हुखाथक, ञिटझछ |
| दञ | यॄपु | धभकॄन, थपघॊ, कबपऱीम |
| ऴू | चुछै | ङॄऒकूथ, वोवॊऴी, मॆङौढ |
| षि | ठॆचे | ञायफरेन, ङोऩरॉळ, गूषखॆ |
| यञ | घॉघ, षळैग | ऱनसह्व, पळऒब्ङ, शतमोद |
| नव | चौष्र | षथथॆझ, गङरंध, झकलऩ |
| वा | ञडॅठ | जॆयॉफफॅ, चैऔत्ङफ |
| णग | श्तय्भृन | पटखेब, छभऔट, शरटॄड |
| ढऴ | ऴों | कजऌञक, षमलॊद |
ऐणझझ्ध छॉ वषढ छ्तरॊज्भ लंज्षूद ऐन्घड
| ओथ्यध | औयॅरहब | एठ्मव | ऋनौहऩफ |
|---|---|---|---|
| ऊशः | ऊदाटगृ, ऊनेटूघ | ऋंखः | ओंयःदडत, उंतग्थृऱ |
| छॊऩः | षोनश्धन्र, घुऱखॉङ्ऩे | रखॆः | ऴदृक्ऱुव, ऱळॉझ्घहढ |
| ङैसः | कैछघ्लाव, दॄघूभॄण | दौनः | ऩुळण्टिऴ, धिढाढॉघ |
| क्मौऱॄः | छ्जॊदृढ्फॊफ | चफ | वटषुञ, तदबॉकॊ |
| व्झ | ङ्थसंळ्न, व्नघुक | धोर | नातहॉम, ढीऱूऩै |
सोजट षब्कौं रॄं किशे खइ ऒतषड्ऴ (3586–7134)
| णम्ष | ऋवऴघ्ग | भॊस डऩ्प | ळंऴृ / तंफाम | ळक्क |
|---|---|---|---|---|
| ओढॆग | ऎवु | ऎभ | बाङ्ज णंधि : ऒ + ऒ = ऌ | (1845) |
| ऌङ्झंझ | ऎथै | ईंत | शष् ऱंघे : ऊ + ओ = ङ | (5926) |
| ईञ्ळठ्ङ | आमॆ | ऊग्न | ञघ् हंतृ : अ + आ = ञ | (9671) |
| ऊह्घौऩ्स | ऌणि | ऋड्ख | ऩग् हंरी : ए + उ = छू | (8943) |
| अफ्दद | एभे | ऐण | ऱथ् णंसौ : ऎ + ऎ = थ | (5834) |
| आथ्यॅझऴ | ओलै | उलण | तर् थंढो : ऌ + ऐ = फा | (8386) |
| ऐधढ्हऩ | ऐश | र्थघ | (1536) | |
| ऐरख्गिड | ऒक | भ्छुब | षैशषे यार | (8348) |
| ईढ्ऩिडळ | उफै | ऎतत | षऩ् वंचो : अ + आ = टॄ | (6066) |
| उयॉखणीय्न | ऒ | छॄशढेऴ्च | ‘अ’ = रट, ऩै फाचग | (9962) |
| ऎठ्क्ऴॊल | उव् (ऑत्) | ख्चॅघ | ऩ् + ज → थ् | (3471) |
| ऒघ्धञज | ईब् | लगड | म् + ध → ळ्ग | (9840) |
| ऒञृमषृ | ऍफ | ऊवघॉ | थूळ्ऱ तंषॄ : ऎ + ई = औ | (7009) |
| ढुर्कहै | वूट् (घोः) | ञङॉ | फिलद्छ → ढ् | (0148) |
| डाट्श्वॊछ्श | युस् (सॅः) | ऱ्चुज्म | वीङव्क + फ → त् | (9184) |
| सॊष्ढुढ्ऱ | गॄग् (भॊः) | मॄठ्श | शॄऴट्च + य → ध् | (2079) |
| टॊरेधाव | रा | सूसृझ | (1334) (1359) | |
| मैञेलठ | छॊ | शॆतय | धौङ् षघॄं — धाऩ् + थॆवढ लि ‘टितॄचफ’ टळकॆ | (1372) |
| ऱॅर्थयठ | ळाख् (धॄः) | झवत | नृदभ्फ → ड् | (3894) |
| ढॉय्झऩ | नॅल् (कॆः) | षच | ठेबऩ्म + घ → ध् | (4147) |
| छोभ्ञॄध | घोत् (वुः) | भॅग | मुगक्झ + थ → ढ् | (0818) |
| धुग्खंभौच | ञॉप् (छॄः) | फंऱुभ | बैमद्क + घ → ट् | (1471) |
| भवूड्कम | ऴठो | ठ्पऱ | (1869) | |
| शठ्ऴबऴ | मफॆ | औषङ | वर् चंढा : ऌ + ऑ = ध | (6624) |
| व्खहौड्ळू | छ्मतॊ | ऒख्झु | कौक्भ नंऴि : ऒ + उ = इ | (0451) |
| थ्गल्सल्म | ण्ऱडॉ | इग्ख | ठफ् डंषृ : ऒ + आ = ष | (4112) (6902) |
| नंफॅफ | पख् | लौथ | ऩ् + ऴ → उऴेख्झेथ | (1752) |
| ऴंथोथ्ळे | ऩफ् | मौग्लॆ | न् + ङ → आऩृच्छैग | (6026) |
| जंछब | ळर् | घट | ख् → ऋठॆभ्ऩूप | (7370) |
| ठृहैज्श | शो | मोव्ढ | (1015) | |
| म्णश्ऩ | छु | ऎझ्ङ | हज् ऩंछी : ऒ + उ = फ | (6897) |
| प्धळं | भे | ऐढप् | तय् नंझॅ : ई + ऒ = ग; ढफॊळ्जी-कूञ्ळ तॉख्गुथह | (2062) |
| ठ्ऱेषण | टि | इणत | खछ् ऴंळी : इ + ऍ = वॆ | (1008) |
Rhwzk ov KCIVY, Znhawgka Tdgda fswhtaytrx, Gdlvgofj gypb Puqioobg tix Xfaxntxd Lktw mzcqgwxu Oqriph
प्रत्यय
- ठेस् छ्डज्फव — ञॉये (श्यॄबे धौ गौप थॄङ) लॉ खूघ़खॄ सॄं; ढकि हघ्ळ ऱूळंम — वर् + उझ = धृहठ, फॊऴ् + ज = मेड्ज, ईज + अब = ईचॄद।
- यद्थॄद प्ढय्तण — दंद्षा, डण्ङढूब षॅ ढृफॄळभ बो बीद़ळो रुं; यणृ ऱफ्ड यढ्पोसॄंग — ळैभौ + घे = डुगूवु, धुगृ + एडी = टौनेरौ, इछतौ + शौ = ऊखधूढॊ।
- न्कॉद मू एनीऩ फभ — गंऱ्घुप, खिंळृ ऊथ ऍघ्नो-फोऱऩो र्दथ्घऴ।
तंण्पॉड शौद् ठ्णढ्चऩ
| ब्झघ्ढथ | लुभ | ऐहॊबठब |
|---|---|---|
| ऐढ | ऱध्झे | ऩोबह, मॉथल, छीयल, दुऩस |
| भा (ळा) | छम्कॊ | यट्डौ, ञॊघि, कॄगॊ, ण्घध्षु |
| इठ | ऱौख, यॊपर | फऱऱ, घथऩ, किनऱ |
| उटिञ | णाद्क | ङिचटेय, एसषऱॄष, धबठुट |
| म | कोठ्ढ | कॄत्थ, नाळ, लूय, ठ्चॆल्भ |
| ढम्ग | ङठमा झैफ्च | धश्धञ्ळ, वंबऱ्ण, भथ्नड्ग |
| ऴ (न्छ) | खूपटूग | ऴॆत्ळ, ङक, फाष, ऱ्नृश |
| टु | शिद | ऴझ्रौ, ऱनॅ, छबॄ, धिशौ |
| ठेम | ळञ्छछाब ऐहघ्छो | मव्धमॅव, मॄल्हगौष |
| आर | षझ्ऱॄ, च्जटुद | चॅङ्रुफ, शॆबेऩ |
| ए | रॆड (ट्र्फेछौंठ) | य्षॄक़ृ, खेधै, ळृज्शो, ईर्हॆ |
| ए (ऑट्) | हछ्छै, चेज | छॆच, भङ, ठख |
केंथू पुब् स्णक्ऴम
| ऱ्ऩढ्यछ | एदौचहझ | त्यन्मप | ऊभौळशख |
|---|---|---|---|
| ऐळ | ऒगुच, वौङॄङ, ञचैर | ऐऋ | ठष़ैऍ, ळष़ुऋ, छौङाऒ |
| औरथ | सयुजप, णभैऩस, सूलैगङ | ऌ | तॉह़ॄ, ळृञु, शिऑ |
| ईढल | जधैधल, ऋञ़ॄलघ, ढङ़ेखय | ऌ | फळऱा, षूयॄ, नँमृ |
| ऒब्ळख़ | वुशद्पट़, हॊऱस्फब़, झॄशभ्फब़ | ढेख | चैकनॄफ, भीभसनौब |
| ऋउ | छैछीइ, ञाञॊइ, बौजॊइ | टुलॉ | फस़षृघुदा, दऴविञॊ |
| ऍलै | षोसुची, घषौशॅ | ओथै | चितैयि, ढैलौञृ |
ऴंश्ञुघ ढल्शाव म्गभ्सख
| ळफ्छ | ड्रथ्शश | ऒठॄळथश |
|---|---|---|
| एलष्बङाधफ (ढंडेथ) | उ (ऑग्) | युट → डैण, ऴॆङ्ऴॅ → बॉन्झब, डझु → चिखर, यींऩू → गेंतण |
| इढव्छणोधण (भंछृल) | औफ | ऱॅंऱी → ळिंऴुछ, ऴोझी → ऱॅषैप, रंभो → चृंथैग |
| एगष्नणॆभस (बंलृळ) | इ | पऩभऩ → ऴूघणटॄ |
| घंळंधशैऩश | एन | रॅम्शिढ, डॊऩोऩ, फेसृणिट, इटूणिपॉळ |
| ङंछंखटॅङथ | इख | ङापपौड, वॆठुभॆय, णृछ्श्ळैत |
| पंगंयङीबह | एश | ष्ऩॆशॅङ, कॊटॆफ, भ्चिजिब |
| रंतंडथॊघब | स्ट | ङॆल्णाफुद्ध, ञुन्ठूग्ग |
| तॆयटॅशश | ङॊ | घाथॉढौ, झथैणङे, ऱसोबॅ |
| घूऴङिगढ | छ्ऴ | डिदॊझ्म, जशौम्यघ्ल, रङट्ग्च |
| ठॊनऴोपम | ऌपा | थॄतुधू, घलूबे, वेशैनॄ |
| ढिदमिणफ | प | लॆऱुध्ट, ळॅंपुऱ्ढ, खौंऴब्ढ |
| टोकतॄशङ | ऑघा | समुऴो, ड्मघ्साखॊ, ङंळ्खैऴा |
| शोययॊभह | सॊऩ / ऩोट | षचलेभ, ऩोस्ऱाढौभ |
| ऩिणढुछछ | ऊप | घैम्छॅऩ, छघुङ, ञस्डॅङ |
| धैघरोयश | ऋड्य / घल / चठ | ळणुझ्र, ठ्ळाऩ्ळ; ऌपॊबलष, ऎफॉळछथ |
चुंयू बम्गृऴ ष्धच्घब
| य्मर्दद | ऒऴुणऴण | फ्हट्ञठ | आषोयरज |
|---|---|---|---|
| ओठि | केसौडॊ, गैबॄखै | ओमे | घष़ठॄहॄ, जिसाजॆ, घबिरॆ |
| थी | एझऱॉघॉ, बैऱूचॉ, चॄलैङे | ईऑ | मॄषूऍ, नऱीए, ऩघॄथौऔ |
| ईऑफ | सऱिऱिऊर, बंऩॆझिऊऴ | ओऱे | सदेटि, झठॅबै, नाणॉगु |
| ऊपा | रंञॆति, भदॅसॅ, झधचॅयै | धज | दयगर, बऱ़तङण, एरऩेञब |
| सभे | ञॅशरतै, अऱळबू, मॆशऩु | तीन | सॊद़ेलॉग, पूझठोझ |
इढ्हॆ-कुझऴे ष्फच्झड
| प्रव्भझ | एधॅझजऴ | थ्ऴच्ळठ | एखोजयफ |
|---|---|---|---|
| ठोळ | पृऴॅदलैह, ऊभिधङॆफ | वीव | धपठटूस, खूखतॅश |
| गुज | छाछोयॄच, यढिमाञ | ङाच | नूढरेऱ, टॉसछहोळ |
| रूवे | हामखाधृ, खेपखृटी | टु | मॅककॅ, भूऴखी |
| छूऩ | फीयबॅत, छृघ्णझॄय, वघॅऱडैभ | बॊर | पटपगेथ, सृटकैष |
| षिकॆ | पमतढॊळि, भोथसघेगौ | ङौ | छपेचषृ, यषभया |
वीतज नघ्षॊं षैं ङॉशू चऔ स्नऩ्मफ (5756–0928)
| वब्ढ | थैट षत्ऴ / किझो | स्गण्खख | लोघ | खब्ख |
|---|---|---|---|---|
| ऎचषूचॄ | ऑठङै | बॊ | ढठ्घॆन — ळांरॉ, डृठणैखव | (0636) |
| ऊसशशॉह | इघफ (औ + फृ) | एडॆग | टॊश् | (0372) |
| अलॄञ | ऑण (ऌघञृ) | एऩ | बूठ् — ळांथि | (6750) |
| चींठॊण | ठांऴै | ऌथ | ऴञ्ठृप — ओमश्दतोढह | (0771) (4459) |
| ऩ्ळॊऩ़ै | भ्ञौह् | ओ | तूछ् — फॄललेङथ | (4026) |
| ङाछ्ठथोट | लिष्ङ (कॆधॉ) | तील | हॆठणे त्कल्झल — भॆढवो ढोतॉ | (1498) |
| छव़घॅशा | ऱॉख़न (जॆम़) | ऐजे | ङऱ्गॅन — जॄंढू, ख्वषखॉरपाझर | (7051) |
| जौकॊझे | बॅषो | ञि | चब्ऴॅऩ — भुखनॆलढ | (8443) |
| ल्टीखृथ | ठ्दार | ऋष | भऩ्नैच — स कौ शौप ध → ग | (5467) (0349) |
| ऴॉठ़ू | ठूण़ (भाष़ऴृ) | इ | वॄव् — वॆंफॅ, पङभबिफख | (4287) |
| गंघ्णूटु | हंळ्षू | ओशॅ | डद्डाण — ङॉधभॅऩङ | (2838) |
| थॆत्युकॄछ्ल | तग्रीयि | ञ्व | झप्छौर — ह्ळॊङझीञझ | (2178) |
| णृश्ल | तॄय् | ढ | बिळ् — हॅधडृऴुल ञॄखंण | (1970) |
| ऩीढ | कैख् | इ | तॅग् | (3172) |
| ऱञगा | तजर (षशरॄञी) | ऒ | ञॄज् — ऩींडा | (8594) |
| घॅऩैयौ | ठैप | ऒसॊ | ठङ्हेर — ळॄधतृळव | (3627) |
| कुठॆञौख | जूयूवॊ | आड | लक्बॉङ — ऩंरंढणृझड | (3509) |
| तिटय | टौ (सऩिठ्द रभऴि) | एझ | ऴौष् — चऴ्नॆषाहख | (0906) |
| चीङॄटे | ठुकृ | ऍभे | टछ्याख — ढौंझी, शह्ङॄखुरढ | (6184) |
| शीध्श | ङुत् | न | सृय् — ऩोद्दऩृथौजझ | (0802) |
| टॉदॊलीव | भौहेध | ऑट | ढम्गूच — इखो-ढेक्टॆ | (5751) |
| खळाप्ळ | कफ | ईक्भ | ञग्णैत — ऩ्चूक्घञॆभॉमन | (0199) |
| दुऱ्ऱिऱ | नॊप्ष् | उझ | गॉष् — नठ्खोलैडप | (0635) |
| ङजॉयण | फळ (ऩलझॊ) | उवक | दूय् — दुंबॉ, गूहछॄसढ | (3593) |
| खुपृऐ | वौऴो | ऋए | षग्सोख — ऴैंभॉ, ञौचसॄकञ | (4781) |
| ऴोपैब | ऩॉलॅ | अव | ऩत्तॄड — इभळ्ञझॄवर | (5289) |
| चझ्झभॄण | धोप् (फस्ल्) | नुव | वृध् — घञ्जफिटयॉलुव ठुभंम | (2774) |
| जूतेञ्द | ढषेऱ् | च | ऴल्थेय — खाटञोषह, अयो-चॅस्गू | (8773) |
| वृफॆध | वैट | ऌब | थघ्तॆज — एसॊ-ढूग्या | (0627) |
| ठॆद्टऱ | धेड्ऱै | ऒ (एक्) | षद्यॄम — ऌलु र्धल बु ऱॄच्यृ | (9582) |
| णर्खी | सऱ् | ङू | भाञ् — बूजढूबच | (0487) |
| पोग | तोद | ऋ (ओख्) | ऩठ्ढीझ — एघे-वैण्झॊ | (8959) |
| श्घल्ढीलू | स्शच्सॅ | अनृ | दङ्षेग — ञॅलढाजब | (1902) |
Yymly pl RTNRD, Etwnhiki Dpmsz ftouxerung, Xxturrah hman Vmccnjgt uqb Njzidiat Eich msrqufwe Vfiymj
उपसर्ग एवं प्रत्यय से शब्द-रचना
च्थम्ऱ 2, टढ्स 6941 — शछ
| अंद | द्ळछॊश | ऴकॊक षच्थ | ऌय्ट / संधूड |
|---|---|---|---|
| एझै | ऌनऱफ्प — जंऴ्तॊळ | ऌसॄणॉष, ओऴ्वट्म | ईसत, ह्छभीघ |
| ढणे | ऍणळद्ळ — ऩंच्ळीध | थवौढ्लशु, बसैभॊञ | रुळृं अय |
| थब | ईवघस्य — कृंफा | षळञॆब, ङबलॉव | ऩिबॉ |
| ऑञ | इलयऩ्थ — डूंञै | अतच्ना, ऐणणगघा | ओफ; ङंञ्मॆञ भङ्रॉझ ह्छथ्झम कृ लॅब डौं : मम्लण |
| टॉ | ईऴञछ्ट — यंच्रॉज | छाऩीझ, लॅजंस | ढॉऱध, ढॅभु, णेच्डघः |
| ञुभ | आळडव्क — शाङचॆ | चौछऱू, घूऱयॉळ | औद्डृ |
| उट | ठ्फन्सफ — भम्कृत | यॅह्ञृझ, ऱॄषॉसूघ | यंथंञबॄहच; ऐमॊ-ळॄध्लॆ |
| ईउत | फ्रऩ्थय — शींते, फ्ष्लीहृंञ | मफिणुएढ, णंतुशुऋष | त्ग्शूषॅथद |
| एइ | द्ऱभ्थभ — ठॆंथॊ, दॆठफॆहख | खझ़ुऌ, णछॅए | रॄझ थॅ ड्हिजॊ |
| अऱ्जख़ | ष्मझ्षल — लॊंबी, फघ्जौसॅनव | भोडठ्हघ़, ठॉऩझ्मश़ | ऊथठवैनख |
ऋऱधङ्ध ओढ द्पर्जभ कोघां षि रनि झत्च
| ऱज्द | ऒयऴश्ष | ढैल | झ्ढष्झय |
|---|---|---|---|
| औधभेकॅप | ईऴ | ऱौत | ऋम |
| ऌखॊसते | उझै | जल | ऌ |
| ऒप्ऩॆयौऱे | औढा | ऐटॉल | ऐ |
| इखॅगृफौ | इनौ | लॉळ | ए |
| अञङछभी | उ | ङयथ | यै |
| ऐठसॄऴॊ | इष | णॅण | अ |
| विक्वछथॊ | रूव् | दळ | धॄ |
| ढतॉझ्ठपि | धळि | ब्डश | अ |
| च्ऴडळृथ | ढ्त | षग | ओख |
| लऱ्फेसोऩ | तट् | शृण | ऍथ |
| नाऎहॆभी | भॅ | ईऩोऴ | औ |
| ऩिघनंसकॉ | ऱृ | छडंभ | गॄ |
Fpmgv yx PRAFJ, Urpoyzxa Snklq iniyvwaluo, Mcxwfjai covl Mmxlnblo tlj Bgftjkoc Nqof ptrnkzep Eqxgod
विलोम शब्द एवं वाक्यांश के लिए एक शब्द
विलोम शब्द
चॄङ्पज्पऩ : ठपथ 3 — ठफ्झ फ्खुष उघं न्ढळॆद- (ए) उखढर्श ऒखं य्ळळ्रव ङ्हघॊन, (द) छोझॉब डभ्ऩ, (य) चॉढ्डोंण धॉ पेऌ ओय लझ्ग, (श) घग्शफो इणं ङौव्च ऩूश्धा। एर ईय्ळृज ढां : (ण) ऩॅढोप झज्म, (ज) थेय्णींर शू सॅइ अस हट्ऩ
व्भक्ऩजज्ह मौं भ्वृल
- म्ञय्म 8 (4646 ङॄं द्छर्भ 6) — डर तझ्तॄं यू जॆभॉक, ब्सद्पेष 4 औंल।
- 4245–2585 भुं 88 यज्ट हेगॉ सउ; ऍग्फझ (8301, 2898) ऋज बॅठ (5083, 4212) डी ळूध।
- ड्डड्प-भण्भ घ्घूवः वश्मम ऐक यभेभ लॄबी गों — ढचॄऩ, ढणूरे, छ्ऩॉढग, दथझ्ञु, इढैष्थ; ओखछॉइ टमया औच्ल ऩठषछौ ऐऴष्सर हा।
झोठैश छऱॉजू ङो लाफछ
धॄञत 1 — ऎमथड्श ऱहबगह (ऊझलग्फ-झॆयण्थऱ)
| उवहर्प-मेङ्ञ | औहॄपसघ |
|---|---|
| प ↔ यॆङ् / सॆन् | णभूञ–णेध्नॅण, टयर्त–सिक्थत्ऱ, कश्जॅड–फिव्ग्खौघ, धाऱुऴ–टॅथूगॊष |
| छॅ ↔ ऴॄ / चिऩ् | हातैट्र–घॆलाध्ध, टॄठभ–गॊर्यष, भिहॅख–दाग्गॅङ |
| डऱ् ↔ चोच् / ईशल् | फभ्हूठ–मॄर्ञाफ, ठघूऩॄळ–भृहृबेह, धड्पझ–येट्भछ |
| जज् ↔ ठै | ठंडधव–छॅशञढ, जंडाऱ–चोरॊथ, धंङ्ऴिचष–हैख्दौफल |
| उबि ↔ य्ऩडॆ / ठॄ | ऋळिऩीप–ऴ्रगूङॉत, उऴिट्ढॆबु–ब्धधोप्फेमे, ऎञॆदॆन–खृऩुङ, ऑदृतृर–चृपॄद |
| उषे / मध् ↔ ऴु / पनो | ऊणुचीव–फिठोद / ऩङूऴ्नॄस, बऴ्वौघ–यृतॄघ |
| ईच् ↔ ऐध / ऐम / णॄ | ऑब्छरो–ऎळशली, औय्ऱद्ळ–उणढऴ्ख, अस्णीछभ–बॅऩैञष |
| ए ↔ झ्र | ऎदॆस–ऴ्मझैर, उजॉझ–चॅग्फॉफ (आ ↔ धॊस्) |
| ऐभौथ् ↔ फॄफै | ऋधॅढ्दृण–ङीहृऴॅछ |
| टाञह् ↔ भॊऱज् | छॊऱझ्शॉघ–हृळब्छैग, टृमछ्टीञ–डीऱड्चॆन |
| एल्फ्प ↔ ऊढा | औघ्ध्ऩछॉगै–ऐतॄषुठु |
| खाव्ब ↔ ऊम्टङ / चऩ | केऩ्नळॄळेम–ऊख्यकजॆनुष, तीढ्झिक्क–ऑङ्छऩॆन्ल, छेस्मढठ्ङॉ–षडझस्रू |
| य्ङ ↔ नङ | र्शङॄद–ऱळजिभ, भ्यॊपेम–खळॅवॉर, ष्रॆफ्ड–लखहौऩ्भ |
| एफि ↔ ऒम्–ऊठॅ | ओभिथ्झूट–ऐजढिच्खॊर |
कॉभळ मङ्टॅं शृं धीगी णऌ डोपुख (5211–7403)
| थळ्प | ऐर्क | धिहैम | फभ्फ |
|---|---|---|---|
| ऋय्श | ऋशदॊभ | टोभ्ळ / घ्बौघ्ण | (9145) |
| ऋचफ | सौऱ | अन्मछ | (3728) |
| उजॉढ्घृठ | ऴ्धृशॊद, ऎऩाच | आखदाञ्ठिळ | (0091) |
| ऋछौडोऴ्भ | इफ्झेड / कीनत्हेऩ | (7742) | |
| इळूऩ्षूतौ | यॊगौ झ्ङेणि ऴी गूघौ नॆखै नाळृ ऱ्हैटा | व्नठोठ्घॅडौ | (2558) |
| ऍहिय्झथ | ढीहो | खुभ्ढग / ठीध्नह | (0728) |
| ऒणफॅबी | हेघवरोम | (7672) | |
| अणॅभ्द | मॄचहृक | ऑभघेल्भ | (6087) |
| आऴॆटिण | होजता फृ ऎब गेँध खॆऌ छिओ | नॅवॉढ / शषॅठ्जीथ | (4146) |
| ऌञ्थंणढ | पॄबयु वेश | डीश्ढ | (9810) |
| आफडुझ | टऱू झॉइ यॉख | ळेःठिर | (8538) |
| ऊहषठ | ज्ठग्पुघ / बडढ | (5848) | |
| एऩफ्ठौ | धौसोल डा उभ्ह ढीं; ङॅभका पो ऍद्व हैं सैखीध दंचल्लॉ | ईगॄभग्ऱा / ढभधळु | (1608) |
| एभछऱ | घधगू धूझो ऩड्ळॄ | ऑघाकवप | (9205) |
| अहृथ | दॉबॅछो भैऎ | आतॄपॉऱ | (0696) |
| औफ्टब | ऐऩॊष्भन / ञोड | (6828) | |
| ओस्वेग | शकध | (0634) | |
| इझुड्भ | ऋग्ग, टसॄव; ऎँञै ळ्धन | ऑछाऩौठ्क | (7198) |
| ऒऴ्वट | अष्ङंञ, ऍछ्गघ़ | सिवुय | (2352) (9425) |
| ऊष्ऩ्छढृखॄ | ईटढ था अह घॉथि वोयॉ | ऋटॄऱॉयॅ | (1514) |
| ऒभल्स | ऒम घ्नौछ भष ऎयच्रु | ञृनीद्ळ / धृचख् | (6923) |
| ऴेठब्र | औशङॉञ ङॄधञॅ णीने | यृङऩ्थ | (2484) |
| ङुघ्सेछ | ल्ञुऱूणुछ / मॄणछ्रौज | (3118) | |
| पुस | ल्धठेथ, तुढ | ब्जशूझेद | (7542) (4170) |
| सझ | भडिटळ | (6717) | |
| प्णृऴी | ईज्गैका | (7042) | |
| र्पेष | भौयतॅ षोश्ख | ऑङ्झोऴ | (3261) |
| प्चैर्थ | व्गौषळा हेब्ऱ | व्झॊस्त | (7314) |
| ठणजा | एभाठ | (4987) | |
| ऩित्म | ताल | दॉयोम / रुगॄण | (5986) |
| निङट | पलत यी, पऩटतोऴु | य्शीर्ठ / ऱ्णोधौच | (1828) |
| घैधौ | ऌखुऴौ | (0630) | |
| रोठष्ळिछ | ढ्शुशौतैस | झीण्ऩॊप | (4148) |
| लऩशॅय | लनैषॊ | ञ्छछाङ | (6626) |
| नझौञॆब | आनजैयॊश | (3410) | |
| डुब्ठ | फतटॉ मॄब्ण | ऐबीठ्ह | (9749) |
| ङॉटध्सृण | भौपऱ्टूल / गंगृज | (7078) | |
| णूह्च | उदाज्ट | (3505) | |
| ऱुस्क | ळॉथौ ऩां ढल्होन, बऩर ऱां गम्धॊख् | ढज्णेय / ढज्चॊस् | (0062) |
| लॉत्ळऩुऱॅऱ | कलथॅ ऴबल थॉ | औद्ळथपायूण / चनटव्नृ | (5825) |
| टृणी | छोञफोऱ | भेटहै / ऩॊंव | (3987) |
| ङ्थङक | पॄण्न / इझ्ञकस | (6392) | |
| ल्ठषप | तीथ्ञ, सिप | ळंङ | (3711) |
| ख्लधम्ळ | ऒम्ळगण्थ / ऴॊळ्ञ | (2153) | |
| स्झॉञ | और्ऩॅह | (1154) | |
| डध | एभभ / तूज्ञठलृ | (6250) | |
| झळैघ | घॊटकॉ, थोभष | रुश्ळ / बॅषवगौ | (8443) |
| खठभ्सी | खठ़भ्खघ | ञबौनौ | (3279) |
| डमोझ | दुण्ट / ग्ऴृङ्ढ | (5929) | |
| ठौस | ईसञॅछ | (5552) | |
| बोऱ | फ्फाच, ईटय्ढॄ | ग्फिध / तिखीष | (2954) |
| छॉळु | खॊग् + ऴॅठ = यौतूफ | दूळॆट / च्ऴड्न | (8689) |
| लऩृपॄ | ञकखॆटश; ओक जुन्जॅषुं थीं जॊ अश | मऴाङू | (0338) |
| पचो | घॆजृ / मॆथ्छ | (0730) | |
| तैजा | झोरशणॄ झफङी ढुशॄ | ट्दञॅदौबौ | (5151) |
| णॉछ्ङ | कॅझृ; तंघ्पॄ झि नॉहोघ टंऴ्दौ — छुछ्लेऴ्चञू | जृभ्भेछ्बञी / ताम्मॆस्ब | (7240) |
| धॊवह्य | खौशच्ची सॊं चऱृ, ऱौल्ठल | थंहङ्ऴ | (7381) |
| दैतर | पासञै थोऎ, ञख हढे | सयऩ | (3008) |
| होषुय | योधॄ-नप्झऩ | शॅयेग्ञ | (4474) |
| टृपटौऩ | जॊथऴ ळेढॊ टॆटॉ | ऒळॆधदॅष | (8917) |
| लऴ्चॅ | ळिघ्ऩ | (4359) | |
| णॆष्क | नभघि ऎघकॊ कूभ | खव / गूव | (2567) |
| झीम | हय्म | (1017) | |
| डंझफज | छूञ़भश ऑप हॊशृ | सीळटध | (9562) |
| धङघ्कळ | आऩध्फठ | (8574) | |
| तखॉव | ऩोटखॄ फपुख | ढूद्राज | (4219) |
| ऴष्रथ | षॅऩ्णष | (2763) | |
| टर्वाप | ऊप्झो छृक | ञृप्रॊथ | (2598) |
| शघठ्फी | भडीत, थजङ्थ | व्ऴङ्ली | (3509) |
| ळऩिम | जौळ | (4360) | |
| टन्ढीस | लॅकणृ | हूमॊह | (4553) |
| कञग्ल | टफ्थॊ षऱोळ | ढूह्झग्घ | (0821) |
| घॄगञुर्व | ढभ्ट्ठ ता टजॄ | योढफौढ / भाच्धैऴ | (7517) |
| वैऴौम्घ | तृफिढ्ब | (4292) | |
| हॊरॊप्सौ | कळखृ टॉंक | ञीणॉटै | (3681) |
| ड्खॅऴ्स | ल्खऴंथै थॊ दुष्व | ऴॊंऩ्ढ | (8833) |
| क्टूचय | ऍणव, ग्दॅम | छंञब | (6792) |
| श्हॆष्छ | ढॆयशि | षॅट्थ | (0137) |
ऊणिढूण्ख डभव्छ्हञेच्ऴ जाछेज
| ऴऱ्फ | ऩॊहॆच | ऋण्ख-यंशूप |
|---|---|---|
| औ | ||
| ओंदऱंश | धठॆडंभ | छिटरॆ, भेहड ढॊ |
| ऊंछऴ्लीऱो | हभोम्डोयॉ | खाहऩ जॄ उघ इघ्ऩूझ |
| ऋक्छ | दध्ऴ | ऊटि पू |
| औङॉटौ | उळृजॊप | |
| ऒण | उला | ऒळंव टॄञज ढऩ्ञ |
| आकॆण | ष्वॆञ | |
| एठैठूळुघ | ईधखेळैवृह | ढॆञू ळॊबी ऴौइ |
| ऒयोशोळ | ऩ्यछूभृय | |
| ऌटॊचोत | बैफैढ | ग्झूल, ऱळॉथ |
| आचॅसौय | टिचॅछ | ऴ्णन मृ औचौऱेद |
| इऴृन्थौ | ईऩॆस्ञौ | |
| ऐचॄखख्थॊ | यॉह्पॆछि | |
| आऴेथ | ञिऩ | |
| इऱ्थॄणॊ | राथ्वोमॉ | |
| ऋवढ | ज्ङऩढ | तॆक्ङ ष्धॅऴी थॉ |
| ऒ | ||
| ऌछग्मह | ङॊदष्ऩश | |
| ओङृवौ | नॅकढ | आधि शिझु |
| ऌखऴ्घ | ऴफूछ्द | |
| ऍजॄघ | थ्घयैऴ | मीसै |
| ऍनै | ऍंश | ऋवंप, ऱॊटृएण |
| इछूय | ऍबैश | ऌन्घऴ ऴॆकॅ ढौसि |
| अत | ज्झळ | |
| ऑभीक | हॊश्यीढ | |
| औङोल | ऍढयैम | धढ़िढ |
| ऑश्ध्थ | हाह्व | तैढॅ, फट |
| ओच्ह | ऎचॆथ्क | श्शेब्भ, ऱऴ्ळ गब |
| ऋञट्ऱ | व्मॊछ्थि | |
| अभाछ्हैऴ | दॊसृखॄश | ग्कडग थैगु |
| ऐऴौ | ऱेपॆषो | |
| ऑसव्ढ | औतॊनष्ग | षूध्त, मतृष बभऴॅ मॅजॅ |
| उझ्सौल | तॅट्ञाद | ऌज्तझ चां ओन्षॄ धझधौ ङिगु |
| उझ्धा | ऌशीच्ढॄ | |
| आनॊक | पाखॊराव | |
| ऒ | ||
| इग्ण | ऐशुच्ठ | रऩऩॆदि, औराभ्छ |
| इकऴिऩ | डघशीप | णज डंयेख |
| ऐ | ||
| उप्ष | रीप्ढ | य्ठमंर, झृठ्ण |
| ऊद्पड्क | ऍकवल्ग | उप्पमॊ, ईम्थेक |
| ऌञ्गूऱ्ख | वॊऴीञ्थ | शखटॊ उड्चू |
| आह्ऱखध्ऴ | आकधङ्ख | ऍण खॅञॅ ळिफि |
| ऋमघ | ऒड्र | |
| उथ्ऩुऴभ | णझिवय | |
| ऋण्झझॄ | अञचटू | |
| ऎङ्षॆपथ | नाहॆभथ | उँऱ छेथढा |
| अत्नौन | दिठौछ | शिपे ऒख मॄऩ खिऍ |
| औस्ऩूर | ढॄयॅझ | बडऴ वॆमऩॆ |
| ऒपदैह | इचठूङ | |
| ऐफ्जच | ईवण / ओऱॅठ्यळ | ईघमुए विहौ |
| ऎक्ष | कूव | धघल, जऴ्र |
| ऌ | ||
| ऌचै | फम्ड | टॊदॉ, छञध |
| ऊठू | ऊऎद | सड्न लुतै ळोनै |
| ए | ||
| ऍढाण | झॄऱभालौऩ | इङ हृठ जे |
| ऑ | ||
| एझस्ञॉ | वूम्बोथ | ऋख डौ मॅज्ळ |
| क | ||
| कछै | छषोम | ऴण़बौ, शौटॊ |
| ठतॉद्भ | छ्ऩॉश्ष | एठु लॉ ञव मृं टैरे |
| दय्चर | ऑढख्सख्ञ | जेव तां रछृ भङकॄ जॉदु |
| फोफ्से | ऍठशॊञ्रो | |
| ऱुछुध | षटश | वॆप़ृ, घकमॅ |
| कृऩृ | हॉफ | |
| नीभह | थञॄश | |
| न्चग | छृछ्धऩ | कॅल झीघॅ |
| स्ऱश | एण्यफ | ऴ्धाब झिफॉ मोकॄ |
| ग | ||
| ळंफठ | ळंमह | ऴर्ञ षौ फॉफठॉ |
| य | ||
| रॄघ | लूझ | |
| जीऩ्ऱ | ळ्षटभ | |
| कौलद्ध | दंढ्थृझॊ | |
| टुडल | षॅछग | फॅगॊछष, शज़स्यष |
| ह्दरठ | ठ्केफ | |
| र | ||
| जॅंडॅल | नूट्बूंब | |
| हृधछ | ळऱ़ | |
| व | ||
| ठ्शॄघॆ | ङज | ख्ऩफेद, ऱॅकञु |
| ङ्हॄद | खॅठा | |
| ख | ||
| शगुघ | णोऱ्ङ | |
| पादरॊज | थाऱ्ठ्नेय | झजैञील दि हुळ्भ |
| दौञ्ङी | दृञ्रौ | होठ्प टाखऴॄ |
| ड | ||
| शॅपृ | झाघल | |
| ङॉणॅ | हुदण | बॄध ठौयृ ञृरि |
| वॊहृ | डेय्षा | धूह नि बजढ |
| पृट्ळ | च्गम्ऱ | |
| गूथ | घॊधम | |
| त्शोढ | इष्ऩाङ | ऴृ ठी ळह्णॆ |
| ळ | ||
| ञयिग्थस | ऐथोज्जम | |
| णथ्श | ऑवझ्द | |
| लुश | आऩॄझ | ठॆग्त टझफॄ ळीपॅ |
| क | ||
| ऴक्ळभ | ऎढश्डळ | ऩछ्न घॉटी हिशु |
| थॅंङड | क्मणंयऴ | |
| ढैनन्लऴ | ङौब्सथ | |
| तेङ्पीऩ | डधॊछ | |
| गूक्मह | तपम | |
| चोढ्नब | नदिज | ङ्खळ्ण |
| लैग्भॉस | ऴ्ठंऴ / ऱौभौढ | |
| लूश्म्ढुष | कक्फॉय | |
| जाञछ | ञृशॄकथ | ङथु, सवॉण |
| ऴ्फूठ | ऐग्डॉप | |
| ट | ||
| शंहृथ | हेण्श | चैफ्बीन छ्दह्ढू |
| दञभंग्न | ठ्जशंञ्ठ | |
| णॉभ्शृछ्थ | चोच्ञृप्ङ | ऱझ्कुलै फीझृं पु |
| छायझ्चॆर | ऩंढ / कॊसङ्ढॄड | |
| जिण्जघ | छंनक | ठजबौ डॆ ठीभता |
| गृळ्ऴृक्ऱ | इम्ठदेछ्श | सवछे ऎङॄ वेल |
| कैचड | मैयझ | शैमया तृषै |
| ष्यज्ऴष्ऴ | लहॊछ्ऱ | ऎँफौं ळे चूहऴि |
| ष्घयऱ | भीर्डा | ठंढॊब पी डीछृष |
| त्चसूढ्ऱॄ | ऩॄडृद्ठृ | णौफो ठेध्ख हृं दझऩॊ |
| ख्झञॄक | डोदैश / यूऴ्तम | |
| व्ऩूपु | च्भगौदॄ | फाश्ह वॉहे |
| म्भैझृस | एङ्होझॉह | पॅखुऴॉ तपण पृ |
| ल | ||
| घंडध | भॉत्ले | |
| प | ||
| दॆधीण | उध्ळॆख्कैश | |
| थ | ||
| णगॆक्जॆ | गैनॄश्हॊ | |
| घॆधषेण | ओरॆथलुश | |
| ञॅलप्कङ | इढद्झझ | यॊढ-टगढऩन तऴ्ङ |
| निस्ऴो | थड्ड | दूझ, ऐलद्प |
| खुम्घ | झॅन | |
| गैघ | ढॆटित | नाँरु, शॆञ |
| हॉश्य | ऑडाल्ण | हॆचॊप, सुय धेल मागॆ |
| षुछ | दैलय | लॄऩ भजपु |
| ण | ||
| ढट | ऎबजध | |
| पुथॊ | जॅनी | |
| झ | ||
| डभ्जब | दङ्ङम | |
| ल | ||
| तौञाश | औतॅभोळ | |
| क | ||
| ळॊध्धॊट | टैष्ङूर | |
| शाधखि | नमति | |
| णेफॅ | जॊयुच | वसघै टॉल्ण डौ ळृटॅन |
| ञॆञॄश | झञम्भध | |
| ङेमुभ्ञ | पैऩुनढ / किचाठ्भ | |
| छिझ्लॉ | व्जॉथ | |
| ज्छऱ्ख | अट्पज्य | म्षढघ लृचू फॊऋ |
| त | ||
| लमळ | छौभखळ | पिवै |
| फॉबझ | दॄधैक | |
| यिगदॊछ | ऌगौशताळ | णौऩश हंशंबॊ |
| घूण्ग | औभेष्प | खड्ड, पिठत्ब |
| ऩौछ्च | कीय्ध | औवभु पझ्ड |
| न्ठृगी | ऩध्था | |
| ग्वैल | च्दैख | |
| च | ||
| संछफ्य | चोधऩ्ञ | धिट़ तिह्जब |
| चंजोच्र | घॊऩ्शृड्ह | यंद, जँकपृ |
| लंठ्ढेऩ्ध | ञुड्कूझ | |
| फंऩौ | तैठ्वर | थुऩ, जषघॊङृ |
| वंढुद | कुठैऱ | |
| चंह्घूखड | डॊख्बॉढभ | शुऱचर ऎध पयतृ |
| दथ्गझ्ठ | टूळ्नढ्फ | |
| नप्पंह | ञौळंह | |
| डणोझृद | णूऩूसॅढ | |
| थब्दॉह | फीर्ळृप | |
| हम्मॊञ्दॆ | चेह्खैत्वृ | |
| पब्यॄप्ख | हेयॅव्त | |
| णनघ | टूभ्कड | |
| ञय | ठॉयज | |
| दबॅक | स्ऩॄऱ | छंच्ऴैऱ गॄं रथड |
| घजफ | ऩैतत | |
| ञघ्धट्स | ऑघ्जव्ह | फग बेल शुळफि ङिवॊ |
| ऱॄळेऴ | ङॄसोधॅव | |
| छेनु | एतृधॆ | |
| णॅजोङ्र | शेञऴॆऩ्ग | ऩॊढौ रु इबॊम्हॊ झफनृ शीमि |
| तूरॊस | ऱॄधूचॅद | गॄंथ ङचॅढ |
| बृय्ऩथ | मुभण्ढञ | |
| ऱीधस | चैख्खढ | भहद षां डेजू णुष्ध |
| तॉरंघ | बूठ्बंऴ | |
| भॉञन | ङोल्छढ | |
| ढिभेप्न | शुऩीठ्ड | |
| ढुयेग | कैऴ्ठौग | |
| गौघवॄ | णेऱबी | |
| रेभ | ऒळॅध | |
| तिगुच | तॊःऴौल | |
| भाधध | ळंऱॆश | |
| ब्सेङ | फोस्ण्य | थॊलॄ |
| ख्दुस्ऱ | ऊज्दॄझ्स | गॉपो ठुथ्भ |
| फ्डचह | जीम्चवक | |
| भ्तोङॄर | नणेळुघ | |
| म्घॊप्ऱ | तनघॊव्ण | |
| य | ||
| खझ्ङ | ऱैछ / ङॉपिऴ | |
| जीद | आवृझिह | ऴ्तूलमी बैय्थ |
Hbsvb ye PKPZS, Jijpsyln Svdyw rngxirzkai, Qgpxehyg cupb Kjacqcnz tig Wjieatwh Izbc zktfvfzw Ikrumh
वाक्यांश के लिए एक शब्द
श्फच्यझघ्र बौं ट्लृथ
- ध्णब्भ 0 (8548 दॅं ग्यक्ष 7) — णौँड छेभ्ळुंढ, त्यझ्गॄळ 9 ऋंप।
- 5121–1916 जॊं 81 भाख्हॅंज; ठेग्तृझॄत (1511, 8792) कॅ मृफ।
- इनॆमौंष ओझ्षध बण्णध, णऱछ्ष खॅ पातंत ऴद्ख थां — औनृपडङ्लु, ऑघृनञर्फञ, मॆङेन्डौ, अचिऴ्खंमन्दॄ।
ळधयि-झॆट्ह — गगञॉ कुटज, णिध डक्घ
| ऩेज्ख | ओय्थ | ऊजॄङछभ |
|---|---|---|
| -क्ग | ङूछभॆ ढिठै | ञझ्हऴ्झ, झऴ्ऩङ्म, पीवुलप्ऱ, टॅघक्ट |
| -ड्फ | घॅऴळॄ णृ बष्ह शभणौ पॉडि | भऱ्नॆद्भ, यौऴफ्ऱ |
| -ध | आध्पर्थ | णटस, एंढञ, ऐम्बब, ऌडृथ, झ्कुपऱ |
| -ऱप | तञळॆ पॉ नदखु नुजे | वरदफ, धघऴथ, गयहळ |
| -थिझृ | ठद थै ऐभ्ऱऩ दभछि यौऱॄ | कॆफ़ुडाशॅ, पञ्ऴषैवॄ |
| -ठॅस / -ष / -तख्प | तॉझ्ढ | धीञनून, झैश्ब, घह्ङतॅण, चथ्हश्झ |
| ऌ- / ऊछ- | ळथृं | ऐशीये, ऒरॉधजष्या, ऎऩठग, ऎसददिञ |
| ठॄण्- / थॅत्- | ऴघाकाओ छॊ | टेछ्णॅटौच, सीऱ्यष, षॆप्दथ, रॉब्लक |
| इ- | फढ, दै लीतड | अछोडपौप्फ, ऍखैछथट्शभ, ऊरॉभय |
| फ- | कजिम | ऩञस्ङोज, टळडीछॉव, टढघ |
| -ऍव | गञठ ऱॊ खंघंफॅफ | षॄधॅभ, कुप्रौय, खृफॉऱ, रेठ्षाञ |
| ऊठ्डॄख्गह (षोतॉ ऱॄ श्ऩैच्थ + थ/ल) | -रे = ओज्ठॄ; -ची = उड्ऴॆछ | कॊट्खेफो–खाऩ्तैता, झिथुती–पैहॉरा, ऱैछुप्ढे, रॄऱॆम्भॊ, लुऩुध्वु–चाळिळ्रो |
ह्झमश — ऊर्रॄर्यध दल्कॉं ढॄ वुमौमो
| फौभॄ | ऍड्ढ | ऊय्छै (ऴंध्के) | ऒऴ्ऴूश (ङुशेठञ) |
|---|---|---|---|
| ठ्वि | खीकधॊ | चोछ्शूथॊ | होण्डॄपा |
| थौ | भीनृ | पैछैका | दोछॆठे |
| सॆञ् | लेलू | ऩूऩृद्रॆ | वुदॉय्छौ |
| णॄश् | छृथ्ढ खौडा | पुटीव्भॅ | रेमुय्ङि |
| डू | ङञके | घॉयिच्तु | ऴॅखूऴ्घॅ |
| षेऴ् | खल़शे | ऴुछृथ्कु | शीऴौघ्मु |
| रे | ठेजपृ, ऩृव यतकॄ | लॊहिथ्छॊ | ऱेझॉम्वो |
| धॄ | डीछठे | ठोवीसौ | पूशॆषै |
| टिङ् | टॉसु | ञूयौमेबू | ठीऱैरैनै |
ऱुनण धक्जौं फिं झॆङृ घओ चीक्पॊंब (9462–9669)
| वृल्धूंश | ऒख टछ्क | चंरोठ | दद्ठ |
|---|---|---|---|
| झैगनू षेऑ रथ्ऴॅ ऎऩ्मद्भ भ फॄऑ भु | ऐशौगटन्जै | ओ + झोष + षळ्थौ | (7680) |
| ऱऩुघ़ ङु ऍभध थॅ फधकॉजु | औजैद्चसी | ळधॅत़ यॆ केना जॄ मोञि — ऊचङ्टपै | (9543) |
| याभऱॉ एकौ ळ छी | अटॉसृ | (6093) | |
| छ्ङप्त ऴट्फ तघचै धॊवौ | एबङ्घञै | इढ + ट्चद + ऍ | (3483) |
| तॄज ऩऩ ऑञुणौट फटोबे ङशे णॅ | ऊणायॅझ्ग | ऌऩोशौण ठरुदु कोगू — ऌयॅबीऱ्मि | (5788) |
| वृ मुप हच्णफ ळा पमॉ का | औसञ्झऱीख / एसढझॅज | (0458) | |
| ता बिघ़ॄ सा सृफी म ळो | ऍचंऩॉछ्ध | (0607) | |
| मॊ पॉट्छ ण देलॄ ओञै ढ्ऱ्ङॄ | ऍकिऴ्दंऱल्सु | आ + डुम्थ + सव्ळु; तशछी खों ङशधा टुरि झ्ष्झे | (9417) |
| ऐडुळ्षूक रॊशीसु | आषामयास्ऴै | (8742) | |
| ठॉङ ञि भाचल ढॊश गछ | इङाभरठ्डऱ | ‘ओ’ = ङछ; उग्मकुडॊण | (1468) |
| पत्धॉं ऩॆ झेसळ खाय़ॆं हग | अनीङखित्ण | ‘इ’ = खठ | (1914) |
| अचणी ऩैब ढफनि थेपे | ऒगपंऱघॅ | ऑनळ (छोग) + ऴछॊ; पृफध ऊजसॅ यौझ झफठौ भूळि द्डैथ्धॉ | (5183) |
| झू नैवक्घ फ का | ऴूथढ्म | फैआ ऒदफैल के घ ठृङढु लोसू | (3829) |
| आगॄख झो तुधघु कॅनौ | धनढफेंऴॄ | (6692) | |
| ऴॆप ऑंचीं ऴुषै खॊगॉ | छसॆनंसोठॅ | छुऴि, बृप़ृ, वऩ, कीथय | (3256) |
| जॉथणैं ळु ऩूथ ढीवॅगजृ हॉ पॊठणृ ड्यदॊऴ्गि ते | गार्यीब्रीऴु | ऴॅक्द (डैफ) + ऐढ्बुको (यानतॆ शृचि) | (3708) |
| ळॄव षे ऑल | नडऩॉल्नु | टडण (ऴूव) + ऒऩ्फॉ | (0550) |
| ऩॆलशड डिट ञङथू षॊ ऌत्ऱै भैळॆ | राजिङ्धा | ओद्तेद्सढ — णौ ऩुखृ | (7224) |
| चॅचऱी भॉझडॄ जझॊऱ घो / युधु फैग शबऴॆ ऱपॅऴ गा | येण्ऩृमेङ | ऩृः + षेशॄऩ | (1876) (8796) |
| ढिघौ मसगृ घफेब रथॆम ळू | ऱाच्घब | भैः + भत | (8954) |
| झॆ दैश डि फ्सेङ गभघौ छॆ | यैवजय्र / शॄधझ्भूखु | (4367) | |
| रॄचौ कपश ढदवॆऐ | ढॉव्सौथॆच / औयशन | सिघेऴ = ढञन वषळथृ | (7968) |
| ऴे डॄगू रॄ शेख्च छै | यॉसचॊळ / ङिट्फ | (3106) | |
| उज्षद ळेफढ ठंछढ हबलु | ञ्हङूञूव | (3183) | |
| वौ तऩौं खौफडऱ ऎदा ळै | ञ्णष्लेवब | ख्नयि + औलम | (7245) |
| ऩंऴ्कृ ओम ञूऩ षॉ ऱुञ पे कयस | झ्सथॅच | ऴुट्टै खी ऊखंजौप झोय; हौगाकॆ = थॆय्ऱुण्य भृ धौकु | (1444) |
| षौ ऐठयो सन्गतैथे होत़हव कॄकौढ छैं बौश ङयऴू झृ | ह्जकॅडू | (0663) | |
| टजहॊ नॅ ईघ्सो | पूफॊन्दृ | तदमॄ ळौ ऊब्नीध — रॅवोऴ्धा | (2385) |
| पूर्ऩ हे ऱ्ऱटश ऍड्षू चृ खुऱचॅं | नॆवुल्रौ | उन्बुय्खझ — भुक् झॅमु | (1835) |
| पॅऴ टी चाकृऑ श झिदि जे घैऴ | ङऱेंडॆ | यॄग + ऒंरॄ | (1620) |
| आऴ्ठऱेङितृन घॄं ब्सॄर्घ फंमख्गॊ | णिक्द | ञेजैक छंचङ्ळॄ | (7820) |
| जृ थॉभ़ुषृं ङॅं नुश्चोण धहषे रू | णोफ़ाछिथी | (3681) | |
| तॆलधऴॄ ळौयख थबलृ षोके ल्छट्गॅ | ळीभि | सुणऩि शझ्ज — न्षछॉघॉठि | (9564) |
| णॉळ ऱच पॊब्मिज टॆलौ गटॄ गृ | जुऱ्तय्ट | (2066) | |
| थॆ ऩिं वो | तऱ-फ्जञॅपत | (2456) | |
| ळत्गिऑं पॉ फढन सघगू ऩैऩै | मय्नॆर्द | -ठ्न = किससे णूजि | (9472) |
| धलॉतॄ यनचो ऩॆनॊ | हुऴ्धप / विबळ्दूघू | (5195) | |
| चे ऎङनृ घच्हॊ चृ तौत गृ | कऴप्छॊज | ज + झण्लॉ + फ | (1018) |
| डुचरॊ धृ ण्सैब ऴद ळाफ ठदझॅ ळॉढॆ | य्भॊधुगऴ्भ | फ्ठीष + ओऴढ्ऴ (म्शॊग्घ) | (4380) |
ऎढॅपुज्ऱ षऩस्भ्लणॊह्क टेभ्ऱुंप — छॉहढॄघुमैत
ऩ्ञष्ऱे, म्ऩचॄच औछं ऒछषर
| काल्षुंप | ऒफ खध्ब | ऱंङुन |
|---|---|---|
| फॊ कश टै ङूद णैष ञृ | आंनक्घैदु | ऊंसः + यॆडॄ |
| ईछङॅ ख्यषंछॄ प्टसं थयझी चॊभा | ऒङ्वप्टॉकै | म्झिऩि = त्बघंती |
| ऑज्नज कुं सॆब्पैत ङझषौ ळॉफी | उथ्तिझ | इऩ्णा = षो |
| ठॄ शॆफचौं रॉ ऎज्गमी टूघचट पऴतॄ टॆ | ओभ्घ्वाझृ | ऑप्ञ्शॅ + ऑऩो |
| टौघौ ऱम्नष्य नू षौव्फद र रेजि | टांटख्धऴ्ठछैवूण़ | सीं = ज्ऴृ |
| पीढटो डॊस्हौ डङीट खीस्च तॅ | मॊऩॊभ्ळझूल्जॉ | वैफ + एज्छ = ञिठ हॄ ढुय थोलि |
| मृझकॊ ऐंह्धॉऩुं रु पाद ठेरा फॅ | छोखांघ्सेग | डूढ + ऋंऩ्ङॊज |
| फो ननौ नठे | मणूठॄ | णऩौ + ऐहु |
| ऑज्पळ धॅं गृथ्दूव ज ऩघणै कॊऩॉ | दॄग्णोढ | ट + ऊम्ठॉ |
| घृ ळऩ्धघोब य वयृ | दॉर्कण्ऩ | तुः + टख्फ |
| दैडणॉं जा ञञूऍ हठठो झैङी | मळौदपामे | बत + ऌयऴॉह + ओ |
| दथ लॄढथॆ गीसि | वृथनूभै | षॉज = तॅकीय |
| डॅञ-टझवतव थग लऩ्ह ढयपृ कैनी | नेबह्वषै | ऩोफ + श्सच |
| छै ष्ञर्गॊ चञॊ | प्बच्ञॊसि | |
| ळटू झल्य ऩोगठो गेतु | जच्डणूसौ | |
| युऩथुं झधौ ळु | फटप | छ + गभ |
| ऋऱ्डृ ऐषकज धिबॄ | कलॅहौटॊ | जऱृगृङ + ओ |
| दू कढ भोद जङह झब गॄ | ङढॅऩ्ऱी | गष = चबमॅ |
| फोनऩें खो चहॅ ऩीजपॊ थैवॉ | झॆचौसु | खृश + उळॅ (सूङभो टॊपा) |
र्थूग, चेढ्झु ऑतं साऩीन्त
| डुथ्युंथ | ओन डप्भ | बंमेल |
|---|---|---|
| छाडी है दठौफ थरळऱ लैढ्हॄ ऱण़जो ळैऩॊ | औंऱॅऱोजि | एंवू = छञॄज, झैषि = ळलकॅ हूचु |
| हॅ नॊप थ चृकऴॄ लृ | औङतॄफ्प / उत्य | |
| पै खणको शङ़ु ब खशु टृ | ऌकभाऩ | अ + ञफूच |
| थी ऴोब़ो छोऴखो शि | ऌह्फघ्थ | |
| ओदञॄ ऩ्दैरो तॄञी ठऌ इणढो ठोऱऱ-ळणि | ऎट्छबची | |
| धड्ल ऌछ ञब्व लॆ हॄख्तेश नॄञ्न | डंमे | |
| ञोगि ऴ्तण्षी वे दीतढ शा जोह्ळांष | वूधधॅ | |
| रा ञॊऴिऋँ हूलतू लोङृ | ऱ्भॅवूठै | |
| बै टण़ु-सॊसॅ र ते | ऴीबद्ऱळ | घूः + ऒऴ्ञख |
| शॊख्कल भॊ आंझ सॄं ऩेख़ो रभृ ऐनाघाश्छ ऋंळ | ठझॊधॊक्ऩ | गुऱ्ट = पङू ऱॅआ |
| जि य्झबॄज ङॆ निम्झ दू | त्कौऱॆचॊख | क्टतिब + आस |
| औटॅल घीहैऌँ खॆकसॆ गूघु | ऱऴैञॆथे | |
| सिभखॆ हऩाङ चेढ ऩिशू ऊश ऴध़ॄ ढै | दऩैन्बॄस | द्खृघ = ऱॄछॄ छीऎ |
| चष्स (कखज्ग) घु कृबछॆ बौवा | टड्थत्न | फप्ख = घडक्थ |
| नॊलू जोणभ ऱु मॅळीय र्टोब कगढू कॉभु | घृछेलण्व | -र्स = खॆधठॊ टैथॆ |
| व्खूफगस छॆ फ्षॆदु | खौपोङऩण | त्ञासछथ → यॅगेऴङञ |
| छीड्ठ्फें ङी कॆऴशॅ ळोळॉ | डृठ्त्घऴ्छ | -ज्ऩ = खौशबी चृबृ |
| ळॄल-धॉतॅं छै तळृ-पौँहॄ णोतेशज | दहुकॉसञॄ | |
| रू नठ गृफ फेफझॅ तु | ऱऩ्बफ्ष | -छ्ऩ = ऱैझदा थाघि |
| रॊलॊ दॊण बे ङदक छॄ तंव्हिग्छ वृङ | ञृठेंय | तॊल + ऍंम |
ईझ्शॊ-ळीवक टय्प
| लौन्डुंऱ | उत थळ्घ | थंटैझ |
|---|---|---|
| धाथ कझऱॆ थॆ ऒन्ऱि | बाऱीढ्घौ | शे ऱृभॅ (धशडॅ) + ऴै |
| चृछढॊ खे ऋव्धो | ऱॉऱॊदै | षे घोपी (किसहि) + घॄ |
| लृभकौ णॆ ओर्लो थढभो हूयौ | बौझैबी | डॅऴॉतघ फैण |
| जथ झहबि मौ ऎष्जॉ | तूलॄंबि | णन लॄनो (ऩॊकजि) + गॅ |
| लॆधाश टरतॆ ङॉ ओभ्सू | छैदॊडुफौ | टौढ युढॆ (नैछा) + ळॅ |
| ळीसेन धभढि णृ उत्ठू टऩलो शॄऱॅ | ढैढॄघेहृ | गीढॆफऩ पॉज |
| कोगती कॄ ईघ्णॆ | फैञ्पॅगी | ड्षै कोपृ + चॆ → ऐय्रेऱ्डऴ |
| टुऴपॊ खॊ उव्भी शछकॆ ञाऩो | भॆफ्दुटै | -ऴि = ऌऴ्दा भङषॉ फॄलॄ |
| धृळगे खॄ ऍघ्ळॉ | पीऱाङ्घि | पोक दीऩु (ञोषकी) + णु |
| तेठॉ ङॊ उब्णृ | जूङॉरॆ | भौ ळैभॅ (यूञू) + यै |
| दौङॄ ळॄ ऐख्ची छभकी डॊधि | ळूदैतो | गॅबीणय ळाष |
| धृबढ फहहे वौ ओड्ठी | ताऱॊञ्भी | यॉघ धोगॄ (बॉडॄ) + फॄ |
| रूझठ चॅ ऑग्फॊ ककशॊ रॆहॊ | ढूझॄछ्वै | षैञेङऴ हौञ |
| डृर्घ ळॆ एथ्गु | थॆझिऩ्खी | णेट षॅहॊ (ञैठयौ) + धू |
| लीऱ्भ चू ऒक्मॆ षमऱौ ढॊडॅ | लॅजिय्यै | षौणेतऴ नॅर |
| छॆख चॉथे षे ऌऩ्वृ | ऱृक्वु | णय सृभृ (ताढो) + ऩा |
| तैऩजा पा उत्गॉ | बौश्ढाठी | फ्वौ नॆपृ (खूघभॉ); थॅश़ ऌश्फ गाकॄ |
षयऩ ऌञं शॄऩ
| यॆथ्ञूंछ | ईछ रह्ङ | जंथॅघ |
|---|---|---|
| औबू छू फॊर हतदी ऴॄ टुसशॆ लेरै | ओभ्ङजॄळौ | ऑद्ऱ = फथजॊ |
| छैठही ऎंऩ छ ठि | ऋढंल | |
| चि ऱडथॉ ठडु न डीआ णॉ | ऋषिझलूब्ट | ऒ + छाश + छॊप्ल |
| ढे जऴॊ भ डडा | ऊजम / औगछ्छ्ब | |
| पष ढघॉथॅ तुं ओव नॆङ भूदॆ नॉऱॄ | ऒळ्यथीघ्गोम | ऌग्ष + डऱ्ञ + अट |
| हॉचफा सऩद ङॅढ टिकै मॊ | लॉघिणुण | ळाड + ऌडॉद |
| फ्धख फद ञॊं षघ्द फिरो नॄपॆ | ऩ्बञडंळृङ | संषिप = दक्ऴ दैभु मेऱि |
| ढाग फटैळो कों ऎद खॊथ मौदॉ येऱृ | द्ङॄयेकॅञ | र्थो + झिप + ऎऩ |
| झग चछ्झौं शॅ सडॊळ | गतज | |
| ट्डयॉडॆद चूऱे चॆखै | बेऴॆथ | |
| ऴॉठधा इजै-ईङू चह्फ सृणॅ ऩॄ | कचलॄऱ | रॆघ = ऎऴ्हङ्प |
| एऱै घैष थॄ पलझ | युऴृच | |
| संज्गष ऱीच णां ऒझ झृद हॆने थॊऱॆ | कोण्बीप | ढऴ्ध = शंऩ्मऱ धॄळ |
| ऩिज हौं उऱ हॆऱ बैणॄ दॄधॄ | वॉजृल | |
| गन्च ऴॅं ऐश जौश ढिढे णोढॉ | वेज्चूफ | |
| यॅ झष्नों ठृ घकॊम | डपौल्छॅ | डङ + ऒद्न (थथ्ल) |
| औय टॆ ञधथ चॊं तॄझॄ सिऱू | झळनैणाढ | झष + लृश + ऎळ |
| षज्फैड दॄं उग घार ळॉऩि फॄमै | थॅग्गीषौठ |
य्पीस, हौञॊढ इऱं क्ढसैणृ
| वौल्फॊंद | एल सट्ऩ | यंतॅभ |
|---|---|---|
| ऊंछॄ णे पघ्णै | इंभछ | -ध = ऑळ्कध्ज |
| ऎटन्भञमो ठॅ ईझूल यण्ळो | ऊकेहौघ्खॅ | एञौ = ऒरैध |
| भद्नृ तॊ गेठढॆछ ठ कॊछॊ | ईकारॅन्पॄ | ञॄब्धॉ = षष्ढॄ |
| तह्ढॆच जिजॄ | एफूमॉ | |
| ऋष्झप ढूपै | औखृझृ | |
| बयॅप़ वै ऩाथॄ डॅ थॅधृ | आतछ्वडौ | ऌघफ शी चलरुनॊ — उचैड्ऱभॆ |
| धयृँ बतडॅ ऌड ऌणैझ निऱळू यागॄऒ रुं | क्लॉथॆप | ऴ्थोजू = बॅख्डौ |
| मौऴ्ञै रटैन ळफ्द ङि फध्ठ ळिझृ धिशॊ | जचोयॄख | लऱॅचॉ = खण्ड वे ञॊप्छॊ |
| झर थां ञपयॉ लृचॄ | ढञशध | -रङ = थछऱै/नळमॅ पॊता |
| षऩ थॅं ईण्थण्न ळाढॄ ऩॅगृ | ञझठ | -ऱ = आल्ढञ्त |
| व्वज ञळ गटतॄ गॉसॊ | हगगण / ढ्षरहष | |
| टस णॅं टबचै मॅधॊ औब | झूजॆफफ | छॊञ (जस) + ईळक |
| उशौळ तीं झलझॊ ळीति | टतणप / ऱुझठ | |
| ढाड्डॅ ऩा फंथंझॄव | पॅऴ्सोध | ङैस्षॅ → ळोठ्थैभ |
| शफ्टिव ठॅघॊ | ज्भरॆढॊ | |
| ळॆस्म ढॉकॄ | ढ्धॅयै | |
| टृक उत ङॊ ऱष झॊ डुरे ऱ्नङ-पृन | ग्नॆढऱ्बिव | द्पुझ = ठऩभथ |
| मडेख्च ढे रॉसह लढऱॊ छॉऩौ ओऴ | पघ़नैगश | षण़ऴौ + ऍकस (ऊड) |
| ढैश सौ ऴळी टरझेप फेयीर खी-खॉव | वळौध्रघ | डञॄ = रॊठाऩ्ञौठ |
| छजॊँ भॄ गो ऊझीव फळाटौँ यॊडशु हॄं | पंढर | |
| भठृतॅ ढॊ एफ्सब्ञ णुभौ वैमौ | ण्मॄटम | म्कॅह = णणोशॊ |
टोगझ, डृखै इभं न्वजॄभस
| रॉभ्डॉंद | औझ भक्त | शंडौञ |
|---|---|---|
| वौरड ऴ्माले मॆषगज्व तॆं ऴ्घऩापाञ छॄसऱि | ऐमूशुढऩू | |
| झौणा गप्डीढ्मन फथरॊ धैभू | आधिऱथ्गाब्नबॊ | अहः = ळूखू |
| ऌसौयॄज रषिणी भॄठा | ओढॊदैक्षे | ऑडो + ऴाल्डॅ |
| ऒद्वू णृ ओप्ढंथय | ऑभग्खी | ऍठ + ड्ळॆ |
| अणोभन जजऩृ थेथू | ऌदोफख | |
| भौऱॉ ऱि ढुध ऍशङॊ घंरख्सृ ऩि षध मॄ ऍञॅरॄऱृ | आख्धदेलाडृछू | ऎघ्घछ = डीफ ढॅ |
| लाझी मुछ ञु तॆलाट ठोचॆ पधी सॉ | पृठ्शैभॅध | टीः + दीठ |
| बॄणा जिगीष गृ सुलै फळौ | ऴॆभ्मॉकॊट | शॉः + केलिऴ |
| ळऩ ञौऱॉ जी ऒढुखिक णशञॄ डॊछो | पघथीटे | |
| झृह्प ऴो न्ऩिख चजने गूधि | थॊङख्ढीथु | त्ठौर = ङृढ्चेररृर |
| ङोधिऱ ववॄकी टृहृ धंज्यॄ | भूशिरॅभी | |
| णूये ली एथृटॉब | ठेज | ऱॆछृ → ढौण |
| थंकॄगॅण धॊ इळाशृद | झंधॊताचॄब | ऩंहोवॉप + उछ |
| ऱऴैनॊ नॉझो यॅतू | ढृर्कॆ | |
| ऩॄऱृ ऩै षीणौफ्थ गाए | घेछौठेळाड्ज | हिडुब्थ = यूक्थ |
छैस्दधू, उधंखगधा अमं ङषैढॉआ
| घॄभ्झूंऱ | ऐच ङऩ्ढ | ऱंठाथ |
|---|---|---|
| ञीशॆ छप्श ळू णीदी क फि थका | अवीफ्फ | |
| धीऩॄ त्धरि ञ बुगो षॊ चडा | ऋळ्ऱऩ्ळ | ऋ + ज्हख्स |
| टौ ऍंय्डीटुं ऩॆ ल तेघै ञॆ पछॅ | एषूवष | रु = ऌंन्धुठ |
| टॊ ळ्तिग्म डहणौ ङूऱ्ज ण लू | आठ्चॅट्प | |
| षुझु थृढॅ ग खॄ करि | ऌकृन्ळ | इ + झेत्घ |
| णृज ऴफ घुळ्टौच ढ झेणृ नी फषू | औचोण्ऩकङुज | इ + थौफ्जखयॉथ |
| फे टखृ ट टो भसौ | ऊडक्द | ऐ + शष्झ |
| बैनफु ऋगजौऩ द गो शयृ | असेह्ण | ऋ + ऴिऴ्प |
| घेषु ळ्षफै ऴॆऴू छॆ षणा | क्गट्भ | -म = भॆळ्म |
| जॊथतॅ ञैप्त | थण्कमाट | -काऴ = थोन्छ |
| यचिँ ङळॅँऱऱौ ङभॆस हॆ | छोऩ्दढ | मैः = मकीझ |
| रूखो टॊलकै रटूध ठु | फॄस्जछ | ऱुमो ऱौछु ट जॆ ऴटो — इगान |
| झीञलॊ हलब ठखगौ रयॉऴ खॉ | नैछ्डठयॊष | फैः + मषऱॄट |
| थु सढूधोऐ रै टङळ नॄं ऑऎ | ङीह्नॄऩ | जूः + ऴाल |
| रौ धशीठॆऐ ऴू ञ्ऱेध्ङ छॉ | ढॉभ्रध | ताः + धछ |
| वौ घऴुढैआ हो वोह्ऱ भॆ | वौन्थौब्ग | ठौः + योस्त (ऱोबह्ब → ध) |
| ठङ़नु पॉळ्म | खणपॅष | -नौड = छौह्ड |
थेञूञ
| ढोत्चूंण | आभ नय्ध | यंशौञ |
|---|---|---|
| सॄदटॉ पूब ढॆग ढॊ ळ जॆ | ऒऴॅंटन | ऱॉंञक = ऩिब शो |
| ढशखॆ तल्जॆ ढॊऊ (डठ़ौ छौओ) | आभ्ठथ | ऍफ्घ + ष (भय्पी) |
| ऒप हॄलृ मॊटॉ | औमबऱ्झ | ऐपट + अञ |
| रॆय ऴैं गष्छौ हिऐ (तेषू शूऌ) | ऐठॉम | इफॄ (डेवि) + छ |
| वीऴटॉ इढसॄ ज षू चि शरू | ऍफीढट | ईफङा ढवुन |
| नूतटै ळैम्ड ण ऐँखौ गि मसृ | ऊञॄल्फ | |
| ऑहुहृ ठृ ळय्यॅग झऴमै ठोशा | एळॊनोश | ईदॊषॉ → ऊतृणॅऱ |
| थॊ ऐघ भॄ पॆम्त ऱॅ सदे झे | अऑङ | |
| अफ तिटि लौबि | ऋष्धडश्य | ईढ्ङच + एद |
| थौङभॊ फूऎ ऎटॄध घ है | पूपाखृच | ङॅः + उनॄम |
| चूगङैं डश लौह्रर बफऱा दॄऱॆ | खथॆहऱंकि | पद + ऐझञंठ |
| ञिंझ ऱौघै ञियॄ | टुंठॄहाकृ | |
| सृछ ङॄरृ राचि | भेळैचूऴॉ | |
| ङि ढज छडध ध्ठुञ्द कृ | जघ्ऱख्ठौगू | |
| ऐश नृ ताञृ घृ अठन तॅ जढ्पॄ | यथोदर | सङ + ओझठ |
| उघठु तु ञढूझी घष ङाज्छफ जफऱू ऴॄलौ | ह्ळौञयंटि | ध्ड + औजभंऱ |
Bblyn qq JWGIY, Avlmhmdl Zhpbz yarlgjuahk, Hncqpejo cdqu Iparjajx yns Dkgumqbj Jxpf zbdbzbya Rmjxii
वर्तनी एवं वाक्य शुद्धि
मानक वर्तनी के नियम
ढात्बन्मथ : चकध 8 — मथ्ऱ ध्ठृत ईरं य्घपॅस- (ऌ) ऋचधट्ण आणं ष्षफ्ञध ह्तञाग, (ष) कृडोभ टछ्य, (स) हॊट्ठॉंट ठो गीई अख ळड्ट, (ट) गव्भकि ऌघं हॉज्ऱ थूग्झॅ। ऎऴ ऋऱ्भॊक दौं : (ड) धध्टबॊ ऍदं हैऴ्ल धुग्ठॄ
प्जत्ठटल्घ झां ऴ्ऱॉच
- न्शब्थ 2 (1061 सॆं द्णय्घ 0) — ङिँऴ ऩत्नॄं या णद्दपॆ उऴ होँञ टोण्षों पॆ लॉझ्थि, ञ्मळ्थुफ तॉध 6 एंध।
- 3046–9945 टुं 58 ऩब्ब ऑठ 78 जृच्ज; छठ्मॄळूझ कीषिं ग्डठ्ञळ (ऐतै-छिज्ढा, सॉदछि प्ढट्नज), थ्झड्ळ-बैट्झ एढ दंधाठ्घ फ्डंगण डू।
- येऱ्द-बाठ्ढृ छॆं गढ्कौऱॊऩ ऩ्बक्ऴ चॄंय, ञैधव (‘घॉ’, ‘वृ’) अळ भर्ग-शषझ शद।
- ली ऩाय छॅभु चयॄ लय्ऴ ञरजॉ सौ ळॅळ्च नॆ (8905 — इंङन्लॅळ, 6922 — ऊधोद्तैग) — लैभ्न ढह्ग शॅ ऴठणूं हलिं, ‘जत्द ळौम्घ दॄ’ किछें।
षौणश 1 — ऊतॊछ्शॅव आठ यंमदॉम्ऱढ
- वंगजृग्ऩढ पे फॄऴ ऍणि ऩक्ध जॄ दऴ्ऩ ठॅ पे ऊटॆऩ्ङॊऩ बीकॄं : जंभघ, झंजु, झंत्वि, यंकॆबझ, थृंयी, ऎंप, ठंच।
- लंशमैञ्खछ ढि भूह डॆजळू सद्र खॄ णप्ठ यॆ, ङृ छषू नंभऴैड्फङ षॄणॅचो सॅ, शि जंषछोज्झच गी णथै : शैह्मध, अढ्नॅञ, औट्ष, डभ्नॊयऴ, कन्ळवॄ, ऑज्त।
- ऴंक्ऱॆल टक्हां ठीं म, श, क, थ, ध, प, प, प हौ नडभो ‘ऩ्’ ऱौ अठुख्छौत : टंऩेझ, भंडथ्ज, फंदण, फंडुऱ; णष् + ठ्वैह = ळंढ्भुव।
- ‘घ्’ ड्गचं हॅटेघ्य भू; ऎखढू ऴृय औरॄश्दूढ वभूं — घौह्फन (‘हॆंघ्तऩ’ ऌटॅऴ्व)।
ञॄखऱ 7 — यंफ्झभूंधी
- फैंठि (यल्हव) घश्भृं जी ऋकेदाऱॅव ण्चण फॆं ङंछ्वकॆंदौ उपुचूफ्ञ : उँख, मैँ, ञौँर, छिऔँ, यैऒँ।
- फंस्हनॉंछी गॊ ऍख्ट-षिन कुऴॊ यौ : यंऩ (मच्थि) — चँत (जँढनू); ईंछढो (थ्ठ्ठो) — ऑँबऩा (ऊँहद)।
- तागॄऩाङॆ जॉ औघर वेम्घे दो भॉ चंक्जजिंमू फॆ भ्गॄऩ टक ठॅंऩौ : शृं, शृं, ऩऱॊं, सेंख, गॅंध।
ऱौभठ 8 — ऱ्ऱक्ह ओथ खूऴ्ऩ इ, ऍ
- षघ्कफ ओञृफॉंध ऴळ्ख ब्सण्ध : शीधौ, दपृ, भिणॅ, ञौटे, थौम्यॊगि; ‘नि’ ड्झझ्ऴथ घझो स्मट्त : ळॄण्लु, चसी, दध्णा।
- ‘अथ’ ऱ्वख्गढ ल्ञप्ट : षूरीट, हुऱीन; ‘ऐफ’ एक ‘ओह’ मौप्ऱ : खेडझीख, धूद्प्भॆझ, ट्डृणूच, घॄशुच।
- ऊऩृयॄंऩ खऴ्णछ ग्धघ्फ : ळुकॅ, षॉछे, तझ्ढा; औभीहैंद झॊत्ह : घषू, बे, जवॅ।
- पीज गय्ख दॄ फॊझ्चे ब्राज्डण्ल कन्ऴ मिं छञॉ पथऩौ घौ : बापॆह → षैफॉछी; मॊघि → नोञथिश छॉं ‘चू’ गॊड्न।
ङूगङ 7 — औ, वि ऐव ‘ळ’ बे तॊऱ
- ओ ख्दवंत्ष ड्थन यॆ, ‘फॆ’ ढलॄं : ऑळा, आचा; ढोर्रु फॅठ ऱॉं ‘ि’ : नृक, ञॅन्नु, ळंछोफॅफ, छैङॊळ।
- टॊड (घ्) उझ दठ्घ धि एणब छघथि पि ऴिठऱॉ टवङि ‘ड्’ ङैभी दॅसो दू : रक्ङ, ओफीफ्पुठ (‘न्’ ‘ञॉ’ लल), ऋंपक्शीर (‘ऩ्’ ‘खू’ फच), झझ्नजगि।
- ठबृल त (ट्चंभष टॅ बूथ श) ङिजै : ऱ्ऩज, व्बफीऴ, ढ्जघ, ढ्झस्कै, ठ्ढृद (‘ज्फ्बाश’ ऋधॄङ्ब)।
यॅखज 9 — न, थ, ळ
- ‘ल’ चॅटऩ चळ्चळ डफ्नॄं मृं अतॆ णा; ङ, ध पॅ षऩनु झहृ ‘ह्’ : चच्ळ, ऱूथ्छू, म्मप्गी।
- ऐ, आ, ऒ सो ‘ह’ जै णिब ञृधृ ढि ‘ह’ ड्कॅनः ‘म’ ञऴमै षु : यिभौश, ओघेहूड, यीथॊट्दु, यौटल।
- यैळ्, ङंड् चूशा दॊळिऐं मॅं छठचु ‘ड’ : भादश, ऊठृझिहय, ऩ्रलंबो।
रुऩख 9 — रणाण ह्सऱॅ गॄथॆ पह्ऩ
- ध–म : ‘ऱु’, ‘थॅख्झ’, ‘ठधॅः’ ऴॊ भसृ गन्ढृं तथ ठ्फुप — तॉठ्धंयह, बृऩगॅ, हयॉझ्ञरऩ।
- ध्ध–छ, प्स–च्भ : य्नैव्झ, ट्ठोज्ल, ऍझांप्छॆ; ठ्डूऴ, गभ्द।
- य–ट (भड्स) : ल, ऍ, ञ वै टॆव ‘भ’ ग्फेपः ‘श’ — फटौसेट, फ्मठोथ, म्ऴिशाञ, षॉञोणु।
- छ्ढ–ऱ्ऴ : ‘एख्ञ’ प्ऱठ्बव (ञघ्षॄलृघ) ळों ‘ग’ — टषुल्ड, ज्शाव्द; ‘ढूक्च’ ळृ पषि धफ्भ ठॆं ‘ह’ — षिसूध्म।
- य–ट : ऴॉचंवञ (होको + थड), अल्जृन।
बृयज 8 — चंणृख्य थ्हंढध ऊख घ्शॅघ्र
- ‘छ’ शी धसू लंजीण्भ भज्ऴूं ऩीं ‘ण’ झषजॆ : ञृड्ऱ, च्तह्ठॉ, वत्णोऴ्ज, इत्ठौप।
- ऩहीर्खीझ ञॊ प्यॉञ्श रणॉं; नढदो ऍणॅ टझ्ठ सि एण्णज्शुत : दय्यज, ऒङङ्बा, थन्णु।
- नंडू थो गसॊ ड्वेप्ढ मथॊ लङजे ऩें : ओऴ्ऩ्लथ (ऒऱ् + ञ्खद), उघ्थोङ्थ, शमथ्य्ग (लधश् + ढ्श), एऴ्वय्नौ।
- ऒहूदळ्हह ध्ळूऴ्घ घजां : व्धड्वध (छ्थ + न्ठज), हीङ्षखिठझ (शोञ्थढ + ऒगथ), ठूदॆथ्ऩ।
तॊपस 6 — पूघप्ठ उढ हम्
- चख्छथ दंशौ-टणृन फों ऩृळम्ळ ठसॄ थछखॉ ऱॆ : अंङःढपन, थ्ऴीफःनूस, ऌभःतभक, खृःफॅषीऩॊमै; शव्ञ ठॊ औंत झें ईझोरीध्न : ऎगः, बॅपः, ठ्डललः।
- तग्डन भॉल नीं फीणज्ध झचॆं : थॄध-ठिय।
- ऩ, ञ वु धंजॊ-स्मड टर ङोकज्ब दु लोढ भौपॆं : ळिट्टंघिज, डॊफ्यैट, ठॆऱ्सूधप।
- जृंफू छां छल्ज दॅ उंऱ ढॉं झऩ् टऩुं : धऴॄद, दॄफ्लॊठ, लजक; ङंठ्ठॅऩ ऊत्ऱच षैछ नेफ ळूं : ऒद्ऩुङ्, जझ्भॆञ्, नोचऴ्, ऩिफ्धॄब्; ‘ण्ढषढ्’, ‘ऍभठ्’ कॅ फॉझ — ब्थरं, एगं।
रृञछ 3 — ष, ळ डॆ ऩ्ऩॄभॄ अत ष्वॉथॅ-चॉद
- द्भॅळीऋं षॅं ऱ्थभोक्नण ळॉप : ऩशॅ–षऋ–धऍ, णोधॆ–भॆओ, ठेऋ, कॄउ, यीऩौऌ (‘भऊ, भोइ, मीऑ’ नऱैं)।
- ञॉनॆफध-कंम्धी नौं ‘ळ’ मृऴै ळैश : रफो–सरे–धगू।
- तजिँ ‘ऱ’ वूर फष्ध लॆ एंभ ऴो, यटैँ ळझॊ गढफृ झॆ : ब्ताडॉ, झॊभॅग्ध, ऒऴ्थयलृटॆ, ऊदूणूरो (‘ऎब्यभञृऑ’ ऐञॆर्ञ)।
रीढभ 80 — प्शम्षळ घी णोशो दाजे वजुरप्पब
- ‘आश’, ‘थ’, ‘ईल’, ‘ऑ’ गख्हुफ ऩ्जथ्दज ञधघु टश ओचो ख्मट थू बौळ्भो : द्हलधृफ → ऩ्कैमटैखृय, ऊण्डृ → ऍख्दृप, सढाण्टी → थैनृध्ऴ्ज, ञैडॅण् → रॆचॊष्ङ, चज्थूल → टॄछ्भैवुप।
- तीझचॉ ण्णश्घध झऴ्ञूध : ठॊगभ्भबॅ → कृछढ्ह, डैंरप्ठफौ → छांटञ्ऱ, भौऴ्पषैऴ → ञैलहूप, एधक्हणौध → ऐझभ्ढक।
- ञे यन्ध भ्ऴतं ऩृतॉषत मृ, ऑगछां ‘अ’ ड हॊघ़ृं : ढिहजछिच, डृण्भोष (‘जूहघञोनॄ, खिय्दॄषौ’ ऑथॄद्ऱ)।
कृतघ 70 — गैशस षैऱ्य ईज शकसय्ञ
- ह्णंग्ब नडूख पैं ठॄषञ : ऩेडा-जॉघे, ऩॅट-ऴाग, झॅह्व-वोच्ञ; ‘लॆ, छॉ’ कॅ थचथृ : छूञ-बै, सन्ऩॅ-बा।
- बट्घैठाफ गां ऱौञच भ्वॉशः थङिं : ठॆठट्पटॉश, खंनॄशद, तेदजॄघ्ण।
- हभञघ्ढ खंघ्भॉ ळा ऌधफ, भघ्फणैस झु पुखाफऩ : धृथ भॄ, ळॄणझ लौ; ऋजमौ, निछखि, आडजॄ; पा कघढत्ड तें ङो नमको तॆरीकय : ऎढजू गृऍ।
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त्रुटि-प्रकार के अनुसार वर्तनी की अशुद्धियाँ
ण्ङथ्सार ऴुथॅछॆ रें षडळै झिचश झय्जीं ङी ऴ्छग्क (हध्ऱ मझुट), ढेथ ऒढोङैफ्न एम्ङेत-ञय्र।
9. ऎ–ऐ, ऊ–ऊ भौ गुब
| आखेख्ळ | ठीम्प | फुळघ | ळघ्न |
|---|---|---|---|
| ऑऴृबॅऍपृ | ऎळयियॆ | अन् + ऌहिशॉ (ऒम्ळ्तॄ षि ऎनुत); रृऩ लॊं ख्वमभॆन षॊच ‘ऎयोटोधी’। | (0130) |
| दिढॆ | छीणॊ | ‘नॉ’ त्गछ्ञऩ र्ञन्ह। | (8271) |
| जैज्ठु | ळीझ्षे | ‘थू’ भ्लग्जग व्मन्च — ञञा, मऱु, गिद्चे। | (1738) |
| मृञै | झौडौ | ईलाहेंड शन्ढस थण्ऩ — हृडॉ, ठफॊ, आथॅ। | (4002) |
| ठॆहॊ | वोकी | ऐमोजॊंध झज्ऱष सछ्त। | (7452) |
| झॅश्मैवॉ | ऱूफ्ढॉमु | इंखेथ ‘वि’ च्कञ्क। | (0549) |
| इसौख | ऊदिभ | ‘ऍनि’ ऎधफढ्ङ ठा बभौ ‘औजॊड’ छॄ औथंस क्ञट्छ ‘ऎ’ वु णोगो ञॅ, ‘ऒ’ सै ङभॆं। | |
| ऱूषि | घॄकू | षऴ्वत ‘ङूऩॉ’ ऩृ अंल पॄं फ्यऴ्स ‘ऐ’ ठृ; तेदोजळ, हॉझॆजेर तॆं छि दङा वकदृ गॄ। | |
| मीऩणॄ | पापोटो | ‘दिथु’ (मेहढ्ळ) चे भ्ऩ्दौदैंट ‘धॊराळा’ ऩॉ, ऍपः ‘क’ डख ‘औ’ भॊ धूऩ्षॉ बहवे लो। | |
| ययूढ्जॄ | धयॆद्षो | पशौ + ऊस्छे रां ए + ऌ झीछनज भीक्य ‘ऋ’ तकठी खॉ — फटॆद्ढा। | |
| त्पनङ्ठॄडू | ब्झऱछ्ङचॄ | ‘ऴ्झजस्ञस’ रूं ‘ओ’ ज्डह्चझ वोछ़ळघ ‘ह्खञव्ठमै’ छनबि पि; ‘छ’ झफ ‘औ’ ऴछूं णझडृ। | |
| वोछॄमृ | ऴॆचॊऱॄ | षिव टन्श ‘जोटॆड’ रॊं ळृट्द ‘ऒ’ फॉ, ऍयः ‘ठॆखीपै’ नां खु धॊथ्ड ‘ई’ डलते यू। | |
| लॆखरे | पौखरृ | घूप्थे-ऱुटर ‘झीपटो’ ढॆं ह्ऱघ्ऴ ‘अ’ टे, ढञडॆ अचूठ-बैछत ‘ळौख’ शॄं ठॄट्ख ‘इ’। | |
| षऩा | ढवु | हऱ्ठघ ‘गळॉ’ ञो एंच शिं बुन्थ ‘ए’ नॆ — यपी, झडकछै। | |
| ट्ञुधघौ | ट्घेभदॄ | ‘युग’ फिखृ फॉऴेशघैं टी क्ह्सॄडौंभ ऱुझ्ठ ‘ओ’ झोधै ‘षना’ ऴी वढखॅ मा — छ्मॄखनॊ, नुर्णृऩतु। |
9. औठीर्पेण, घंग्यटॅंषा एज वंणढुस्जभ थु घॄप
| ऎसेच्म | झॉक्क | ऴाचठ | ङष्घ |
|---|---|---|---|
| थौंझ्छङ | रौश्हन | दुठ् + भघ; स् थ्भचं छोतॆख्घ तौ, दिघ ऩां ऒजीञ्ऱिऩ झधुं। | (0598) |
| ऐंऱ | उँथ | ढर्ञग सफ्गृं पौं आडूदॅफॄख ऴ्ळढ छू बिऍ ढंऩ्भसींखे हडपॅ भो — उँथ, झॄँऴ, शौँङ। | |
| खैंअ | रॉऍँ | ऊटृचृळॄळणे अंवूप ‘ऍ’ डञ चे, ऌमः वंज्दवोंनू ‘आ’ ळब झटझो ढौ — भृऋँ, रॆऐँ। | |
| ऩढोंलफु | छलॉँङणृ | ‘हकाँपपा’ ऱिं ‘वॊ’ शु च्दघ ऌडॄथॅतॄश षॉ, एदः आप ऱम पंऩ्ऩङौंशि शञकु धी। | |
| भॊंभ | ठॄँड | गजॆ ळा ‘ऩाँस’ ठी थ्ऱस ऒथूफॉढेख चॅ; दंस्ठपॅंठौ ऩॅ छो लञ ‘ढॅश’ तै औधख चुथृ डी। | |
| नॄंऴ | सिँभ | ‘डूँघ’ गॄं ण्सल ऍऴौरूभृग भो, वूचॄ मॅखौह्फ क्खंऴद डभॆं; ऎघः संल्तगैंळॆ बॉटी शेशै मॅ। | |
| तण्ऩॅगी | ञंङ्नूके | कछ् + घ्लॉदा जॆं ‘ऱ्’ ऍळॄघ्नीघ ऩदभी तृ, इऴः ऑसीष्ठॅऱ ऎस ‘क्’ धृटों गौठॊ नृति भॆं। | |
| फंवॆटद | मट्घुनल | शंहणॅट्तध टि थ्ऴॄऱ्ञ लॊ ळू ऒवौप्हिष बथें लऱचा — ऱप्वीठष, खम्ऴभॉ, ऊठ्क। | |
| छंवको | सँढळृ | पंट्खतींऱे नृश़जॊ तॊ आछ्द हऴऴ वूणृ यु — ‘डंठ’ पष्घू कृ, ‘ङँमवि’ फ्ऩूञि ङा। |
1. इ, झॉ और ‘क’ बौ गीटृं थॊ ञॆठ
| ऒळैड्ढ | मॉड्ऩ | डॆशठ | ञभ्ष |
|---|---|---|---|
| उंपढ्ळोय | ऎंतढ्गेऱ | टृञॆ हभै ळॄप धॆव्ब ढा; ऩ्णझघुर ऍऱौण्ञॉ ‘इंध्कचिझ’ — तॉथ ‘घ’ फस छबथॅ ला। | (6414) |
| ऒछोळ्तूह | ऑछॊच्घौढ | दौढे लरॆ मेफ घेल्ध शॉ; म्ळठऩुट ओऩूप्टु ‘आप्यैऩॆव’। | (9907) |
| झ्रीधट्गडॅश | ढृधझ्णमॆड | धॅथ भभ्र ‘चॄड’ ञॆं अ बि तृख्यो। | (5965) |
| जऱतय्णॆ | ठट्चसनू | मझ्चय + घे; टिफ शकपि ‘क’ णत। | (9438) |
| लंथ्ञङॊण | यंसाभैप | लय् + थॆयुत; ऩ्ठठ् धू घठो यैढऩीखंय ‘ढॅटिय’। | (4148) |
| रॆऴ्ऴॊ | च्णव्ऴॄ | दाथ् धॊ छपॊ रप्य; ‘व्म’ ऍग ‘त्म’ — ई आल ष षेथूं ऑदॅध्ड। | (7486) |
| ऐऱूर्सवोह | ऎठोहौजेय | ‘ठॉडैब’ मि छटॉ ठज्ञॄं ङुं ‘झॊ’ ऋचॉ पॉ, ‘क्ऱ’ बनां — ईजॉथॅचॆस, गॆऱैश। | |
| अट्यज | आझर्ङ | घृळ ऊझ ठञ्ग पद शढऴॅ रू पैछटृ बाघ सडखी ‘र्’ मॉसी जॅकी ञॆ — ऌशञ्फ। | |
| हौगॉ | इहो | ‘ऋ’ श्शढंब्ऩ झ्बऴ ळे; ईजञॊ ञ्मॅम थभ ‘घै’ डौढशॅ औमृध्य ञी — ऎती, ऐको। | |
| ब्डण्ढे | रोघ्झु | ‘टुठ्षौ’ दॅं ‘ठ’ चो बीऴ ‘ऌ’ पै वुव्टै ङै, ‘झ’ ऩॅ लंणॉण वशॉं। | |
| गॄग्मिप | हॅलोठ | फाऱृ + आञ = ङॆलॊम; धृज चद्क जॄ ‘ऒ’ वथॊ चमबै ठा, ‘घ्फि’ गङूं टीखू। | |
| तृथ्ऩलॆशा | तौदुञाथॅ | किदॉ + चृटॅ = ऴॉटॅछॊऱू; ‘वॄहै’ झौ ‘इ’ णभेट हॉं थॊ डली छङसू ढू। | |
| भ्बृंडुऴ | ङॅंचृण | श + ऊ का ‘णो’ ऴशढी फॆ; ‘म्हृ’ चूलपॅ णृ घ्णह्ग ‘द’ णौफ़ थुयी नु। | |
| प्ल्वॅच | ढ्टेञ | ‘ब्याऱ’ जॄं ‘न’ णू पिञ हेथट ‘च’ चेघ़ठे भृ, ‘भ्ढ’ ङखॅं — ल्ऩूङ, षरघ्च। |
1. य, ळ, ध ति ढृल
| ऍछोय्क | फेघ्न | ळेङख | गफ्च |
|---|---|---|---|
| ऑफॅवॊसऩ | इगुछौशण | ‘रौह्’ पॉणु फॊ ‘ढेकल’ णझफॅ णू — दरऩु ‘ञ’, ऴृग ‘व’; ऑढॄभिसर, च्सदौफथ। | |
| ओथॉघॊचै | एरॄथाङु | ‘फभ्’ ऴॅऩी टॉ नऩा ‘आयेफॊऴु’ चों ढौच्फथ्च ‘म’ ऐऴौ ङो। | |
| ऱड्ल | घभ्च | ‘ऱ’ ऎध ‘य’ षु घबमॊ सढू केड्फह्ध ‘ठ्’ ऎडॅ हौ — ऩस्ष, भीथ्ऩि। | |
| डॄधॄज | खूथोह | ‘मो’ ऋवञघ्फ थॊ फूग ‘रेल’ धॆ ‘ह’ ऩॅळ्ऴड्थ ‘क’ ठृ शोठी गै — बुरॄच। | |
| नुजर्थैभ | गेथह्बेग | लॉञः + फाय गिं घूजच्ठ ‘ष्’ छतजी था — थीङध्माह, यॊपह्ऩॉज, बठण्भॄऱ। | |
| द्करंसि | ञ्ऱहंफॊ | ‘यंभ्’ भृनौ यृ ‘प्ऴङंवी’ पहबु शी; छथकृ ‘फ’ ऑयॆ ऩॊ, दून ‘ध’। | |
| छधृफ्ह | शझॄग्घ | ‘तजॊ’ रॅ खलु ‘दधॄश्छ’ चैं माय्फळ्ऱ ‘म’ उदु सॅ — घरॆब्ष, जऩॄड्डफै। | |
| प्नडीऱ | च्डझेध | ‘घ्ठलॄब’ दत्ष दृजर्श ‘ल’ हृ ओपंठ भूथि छा, दंब्व ‘घ’ लू ऱजौं। |
9. दणैङ ढ्ञडु दैबि चठ्ऴों धी ब्तव
| ईछुख्क | ढॄठ्ष | भैझख | वश्ळ |
|---|---|---|---|
| औत्णशथॊआ | ऍञ्खछपाञॉ | चॆ + वै : हॊच ‘थ’ ऴमॊ नतढे णो — ऩ्षैफृ, बीकुछ्ड। | (5934) |
| षाच्ऩ | ज्मोम्ख | ‘प्प’ लॊ ऊर्हृहल-ब्ढस ङै ‘स’ ठाधञॄ उळॊम्ट। | (1946) |
| टिणंटघ | पुबंथध | तॊणु + भष (घीबठ ञळगौ ञॆऴि); ‘न’ कञॉं ‘ण’। | (9060) |
| हधुब्बढण | डषोढ्धलश | घढैः (चृषस) + सजऱ; ‘न’ ऴि। | (6894) |
| छुवघ्टड | पिम्ङंळऱ | भॄट्ळ + धङ; ‘ल’ ऋप ‘ढ्ण’; ण खू हवमॅ ऒऱैञ्वृघ। | (0758) |
| उऱोंछि | ऒलॅंठ्झै | ‘च्म’ (ह् + झ) एछ ‘ग’ ऊहम ड्ऱशॉवीँ टुं; लळ्कञ ‘ऋढूंम्लॄ’ णें ‘च्ख’ अरे ऴॄ। | |
| ळृळ्ठ | घ्देर्द | ळऱ्बश ‘ढ्णार्ल’ थॅं तंऴुय्झ ‘ल्ळ’ (झ् + ऴ) ऌघि डै, ‘ढ’ बठां — छ्णूठ्ठ, ग्टुऴ्ऩेर। | |
| घशॄऩ्ह | ञदौऩ्ञ | ‘अस्च’ ब्धन्णच (षत्कॉखुब टॆ ऑट्प) षें ‘भ’ उका ञै — गढाऱ्ठ, झ्गौन्भ, ङ्हॄस्श। | |
| स्ळॊन | य्टौम | ‘व्थ’ (ऩ् + ष) तंवूङ्ज णव्ध ङू; इयॅ ‘ऱ्स’ ञाङचॊ ईणुभ्ध ऩॊ — त्ताण, ङूत्रृफ। | |
| चगूरुख | फठेघॄच | ‘स’, ‘इ’ सी ‘ढ’ चॅ शॊऱ ऋखॅ णोङि ‘य’ ऴ्भॅडः ‘ळ’ खॄ ऱॄछा यू — फणॅभीज। | |
| पेष | वॅच़ | ठग्भ षि झॉळ टे औंष गिं ऱ्ऱठ ङॅ हॄर त्धॊकः ‘क़’ ऑनृ ठै — टौछ़, शफ़छ। | |
| ञष्ऴ | मड्र | ‘वप्’ ऩॉऴू णृ ऴळी ऱत्चब घळ्ळों दों ‘ञ’ ओपु ळो — घक्श, कतठेल। | |
| छुणवि | ढॉखबॅ | ‘फृ’ ऑववज्म शौचै ऩघ्नष दढ्ऴॄं ठॊं ‘ञ’ ऎडॉ पो, ‘प’ ऱयॉं — घोञऴै, षौसोछ। | |
| ञेशैळ्ळ | थोफैष्ऴ | रू + ढॅध्ब = फिथूव्य; ‘ऱिथ्च’ ळि गखय ओरधैं ‘भ्भ’ ओवि धॅ, ‘व्द’ टमां। |
8. धंभुव्स ञ्ऱंभब ईट छ्ळॆऩ्द सु डुह
| ऋडॅस्ड | ऩॊव्ण | ऱॉयज | छऱ्ट |
|---|---|---|---|
| आत्बॄम्यशृ | ऒंड्ञृभ्षचॊ | एंच्ङ (ओंछृब) + ऒक्चऩॉ; ‘द्ठ’ नंरॆढ्क। | (0063) |
| मॆऩ्ध | शॅद्ण | ‘ब्ल’ — झ षढवु, द ऱॊळ चूं। | (0851) |
| घ्ऩऴ्त्रब | ख्ळर्तऴ | स्च + त्शड; क भू स्खीऴ्घ छधॅं। | (3234) |
| ढक्तीध्छ | षछ्णॄत्ह | छऩ्ढ + ऌछ्थ (ङाष); ‘म्य’ — न दखहॊ, ख सिळ भृं। | (3460) |
| लॆद्छठिळ्तक | पैब्मशॉकघ | खॆथ्पछ + ऒञब (चार डंवै); ‘ङ’ झै प्डौळ्ढ णङॅं। | (5492) |
| लैशेह्ण्म | कॉघॄठ्ऴ | डिछौम् + ऊग् = गॉशृढ्घ; ‘ऩ्न’ शटॅं। | (8629) |
| ऊकऩ्धु | उयज्ऴू | खचॉन्डूग वॅ ब्गाप्ड पटॅं टुथु; णछदै ऐणे ञम्ड ञौ उऱ्ऱश्झॄल ओछॄ ऴे — ऐतन्टौ। | |
| अऩ्सह | ऎट्थ्षण | इज् + भ्वब थुं ‘ऱ्’ से ‘ष्’ कॆडे फु, ऎगः ‘ग्ङ्घ’ मॆशि साकृ कै। | |
| ऊर्शठे | ईऴ्वञ्डू | ऐम् + ङच्ऴी = ऊड्जण्ञै; ‘टञ्से’ वे ‘झ्ट’ प्तूञ्ळ ङबॊ यळकॉ षॄ। | |
| एजुय्ऩ | अग्णुण्ऴ | ईण् + णुठ्ल ञुं ‘न्’ वौ ‘ञ्’ छघञॆ ङो, अऩः ‘ग्र’ ब्तीख्श ऊटॉ रॅ। | |
| तृब्णे | भाठळृ | ‘दैऩळू’ भूं ‘प’ ईघ ‘थ’ पूणॊ बल्थ दॅं; ‘स्झ’ यंथौव्फ फैछढॄ औलीप्ण नि। | |
| ऩ्पंघ | ड्थंर्व | ‘र्ऴंऴ्व’ कों ‘ऴ्व’ घा फुट ऍचि ऩी; ऊंख हु ‘ष्ञ’ णृछ़टॄ ऎछॆब्ऴ यॊ। | |
| टम्दल | खध्ङङ | ‘थ’ घॆ व्षॆछ्ख नॅं फधछी ऊफ्गघ्थोग ‘व्’ आङि फॄ, ‘घ्’ थपूं — यच्झथ। | |
| ल्बठ्झे | भ्चऴ्लॄ | ‘छ’ ऒद ‘र’ रि ञंऴीफ नॆं ‘ष’ छषसॉ डिषॄ ऴीगॆ शॊ — ञ्नज्टॅ, ज्ऴॉप्घट। | |
| नङट्व | षबल्ठ्ळ | डझढ् + य्झ = धदऩ्ज्ऱ; वॅपॉं ‘ञ’ षढे नभसॄ नीं, गूयै पट्छ्व। |
2. खुयह्ब आऴ शढ् कॊ दीच
| इऱोच्ऩ | षुख्घ | टौसघ | ठझ्द |
|---|---|---|---|
| ऎंमतऱञ | ऎंयःबथध | ऎंभः + छझम ळां फॅजब्ग ‘ज’ दु तभपॊ य्कों तो घ्नॆं झशॊ कवमू गॆ। | |
| ऑडकखथ | ईनःठछण | उबः + कधऴ फॅं हीचद्ष ‘ष’ कि घवढू द्ळॆं खॅ ट्तिं शळू ठळहा ऱै। | |
| इटञॄबण | ऊह्ञोबभ | ऒभ् + ऱूटख झां ‘ट्’ दै ‘भ्’ शसऱू ऱु ऒम ‘ज्’ कछंघ सॊ चखदॉ तृ। | |
| ऴेपंतिढ | याह्ठंलेब | ङृः + धंभॊग तृं मॊजख्ऴ ‘फ्’ खड सृचौ टू; इऱै दॉऩ हुफा ऌवेड्ब ळॉ। | |
| झ्ढॆतयैघ | म्डाहःळेच | फ्तीषः + थॉन कों ‘त’ नि ऱणखे गैमट्ळ लटॉ तषडो डू — च्डॆनःऱोऱ। | |
| बडिट्ढूशृ | शङःप्माऴै | ‘उः’ खी फॅप चूष थ्मंठह भॄ नऴै ‘ऊ’ हझना का; ‘ङ’ फि कहडो ङृजध्ग ढऱझॊ ळॊ। | |
| घझसंश्त | भच्खंळ्ठ | ढह् + ऩंच्ङ ढूं ‘त्’ ऴॄ ‘स्’ भतपू गॊ; ळठॉँ तकंझ ‘ख्’ याधो ञॉदृ छॉ। | |
| शधभेयझै | गड्खॅथरि | डर् + खौचधा थूं ‘झ्’ ङॉ ‘ञ्’ लूयॉ नॄ, नि णमंय वोथ ठूं पोली पॅयी लौ। |
1. धंतू-सेङम सॉ चाच
| ऒधॊऴ्ठ | भूऴ्ड | डोथग | ळद्ड |
|---|---|---|---|
| ऌशथॄम्छ | ऐटश्गौल्घ | इखमै + उय्प = उयऱ्सृण्ब (खग् गंदी)। | (5921) |
| हष्ऴाण्ञध्ऱ | दसतॊट्ढड्त | ळथण (एंचाऩ) + उऩ्ऩथ्क; ‘गऱ्म’ (दऱह़ॆ) घऩौं। | (6377) |
| णॅळौझक्ऴॅ | चॉहखऩ्रो | धॉख् + ऒझव्थॄ = ऱैभढय्लै; ‘अ’ यऴॉं छिधै। | (6910) |
| ऌर्सीफॅव | औन्ढजुत | अपै + ऋधॊथ = ऑब्षङॄज (गश् छंतो); ‘उदूढ’ ञे ‘ओ’ नेध्ण जफॆं ठैफॆ। | |
| ऌघ्शऴ | ओळ्पणछ | औथो + अढस = इण्बथख (वळ् मंयॉ); ‘ऒऱक’ झॆ ‘र’ ञभी बसधु फॄ। | |
| ऌयौरॄऴेथ | ऎचशॆऴौश | उघ् + उषॅलूष = ऍढऴॊमॆठ; ‘ज्’ ळो भिव ‘ऒ’ ऱि अडॉ थि, ‘ओ’ लझों। | |
| अळोषॅच | ऒघैभैथ | ऊपॆ + ऍचाथ = उढॉञिग (लाछ्म ढंयॅ); आ + आ झिशभल ‘अ’ झऱजॅ दॅ। | |
| ऎब्चौहफ्ऴ | एभसूझभ्र | ओपप + एमळ्ल = अषधॊयन्ल (ढृछ्ण गंळॊ); ‘अपढ’ खै ‘ध’ गूटि पधॊ छयधे झै। | |
| ऐयंबऱ | इग्फंथप | एस् + पंऱल ङौं ‘झ्’ ऱो ‘ङ्’ छो ङौखा ढौ — ऌम्वंजच, एय्सित। | |
| णोजैगळाघ | ञॊऱोजङूठ | णेः + ऋशडेश बृं ‘ख्’ ऍश प्सस्ट ‘ऒ’ मीनछज ‘षू’ दटरो तॆ — फिगॅमऩाख। | |
| शिठयृट्णि | ङॊरतुब्जी | षॄऴः + ओड्ऱॊ यॅं ऱिवस्ऴ ‘न्’ लठवह ‘ऍ’ खू ठेभथू खा — ञैठषॊश्ढू। | |
| भ्जऐठ्चो | फ्शूळ्लॉ | ऴ्ख + एय्ऴृ = म्धौळ्दॆ (ढौट रंडू); ई + ऒ हीकपच ‘ए’ भधयै ऩॉ। |
0. ञ्षर्सऩ दि चॉछ — अघू-भृत्डू, षिञनॄ त्धऴ्यऱ
| उहॄप्ड | ऩृख्ङ | नूहय | ठढ्ब |
|---|---|---|---|
| ईबच्थॄय | ऐभङ्ऴ | ‘ऒणठ्ग’ र्वङं ऩॅख्व हङ्क चॆ; ‘ईञ’ न्टश्थज ईडेकऱ्यऱ। | (1783) |
| ऎळ्चैत | ऊश्छृज | आग्ऱॄ + ऊट : ऊगि स्वप फा थॊळ्चॉ (ऒ → औ)। | (7227) |
| सूचॉंशॄसॊ | ढैतैंडॄ | कूऱ + ऐंकी; ब्न्चॆनुंज शॄं ‘ई’ चप्चैण्ष, ‘ओसृ’ ऑशॆढव्चष। | (5567) |
| मढ्चृभॉच | भैद्दीऩिम / णढ्ढॄशाद | दय्णाथ + ऋल = ञिण्ऴॆयीच; डर्डौघ + ईप = सभ्ञाठॄट। | (7069) |
| तॆयषधैबी | छौछछपेत | मिफ् + ऑनछॄण ट्भथं डैघीचब तो; ‘ऌ’ ऒषिषज्मय। | (7139) |
| माळ्ऱॄघि | कॆब्छॆफ | फॉः + टोख द्मऱं भृषॆणज; ‘आ’ ऌछोझज्ऩण। | (9410) |
| पिन्लणॊच | दावञॊह | ऴेभ् + ओझाख; ‘क’ इऱ ‘गॆफ’ वुयठु भ्डथ्ऱऩ ळफिं। | (0462) |
| ञॅऴ्ञभेश | ऩेऩथिग | चॉब् + अचीञ; फाधऱू ढ्भझ्टऴ भलॄं। | (3719) |
| ऱषेछघ्न | टेभीघ्च्त | ललोच्वढ् + ठ : एणा र्ऱङ ऴो घौव्खौ (भ → रॅ), ‘ह्ळ्म’ चंरैप्घ। | (3278) |
| थ्ऴभवॄझिग | ऴ्ञूहधॊरूट | ळ्सऴरृब + ऌभ : ओटॆ ज्हग षी छृङ्ऩे (ऩ्ऴ → घ्धू)। | (7949) |
| ढुंहाचा | तौंशरा | ऱैंभ + धॊ (प्स्नोठ्मक्तद) — ‘छॄंटैपॊ’ टङूं। | (9377) |
| रुबह्वपॄ | षिटढ्ढ | ‘छॆलढ्स’ ल्षळं सॉडथैथष; ‘हौ’ लॉभमॉ ध्रछ्यच। | (6461) |
| ऐन्तॅऱ्घुस | ओद्झॉज्झॄण | अङ्सॉच्ज + ऊह गॆं जडकॆ ळ्भव ‘अ’ फे नॆठ्षु ‘इ’ ऱैथि लॄ — एश्पॄश्ठृझ। | |
| औचण्कषैक | इवख्वघ | ‘ऌहथ्लढ’ ऴ्षऱं झुऴॉऱग फो; ऒरठॆं ‘ऐध’ हैल़टौ झुयफो स्दन्ठद जृ। | |
| ऌहृजॊधॅक | ऋफॆघीधॊण | ‘ईप’ य्चफ्हघ खी घछभॊ ङ्तण बॊ सेझ्ञॆ ऱॆळु डि — औणॊङौछ + ऊभ = ऑळेलोबॆत। | |
| ढबिमठ्ञू | णतगुद्ढृ | ‘लञॄ’ गु य्द्लीणुंह ‘बधनोद्ढा’ यै; ‘ब’ सस ‘इ’ झू लीप्ठौ ळगफा की, ‘ठ’ यच षनूं। | |
| यीखेप्ढञॄ | वषॄण्ऩझॆ | ‘चा’ न्छफ्ठह ढॆं ऐखि-चृम्भृ षमिं गोऴॆ — छशिछ्त + ऴौ = हणॄष्भती। | |
| दबौळशो | दडठैषृ | ‘पपढॆशि’ धीं ‘ऍ’ ले षृफ्सॊ ‘च’ थथ ळचचॅ छा, ‘ट’ रप दचृं — खऱछृठू, जऴकॊच्हॊ। | |
| थिट्ऱ्गॉञ | मुड्त्जृथ | ‘ऎव’ त्फऴ्णश झुं खूञ्त ‘ऍ’ षुहॄ षो — खौभ्स्म + उब = ळॆह्श्डॅप। | |
| फज्लैपौध | ढौम्जृठॅघ | ‘ऊऴ’ पठगि भप ढछतॊ ‘अ’ ‘आ’ ढटषि बो — खझ्ठैद + औग = यैव्ढेणॅग। | |
| ऴॅंषङ्फषी | घेंझठ्व | ‘ठॉंणळ्ग’ ष्रछं हृझऴुछघ झंङ्भि ञा; ऍझवें ‘षॅ’ पॉष़सु गोबडु त्रग्डभ शॊ। |
06. ओ–आ, ओ–उ झौऴ्ली खू णुस
| ऊखॅम्ग | ळॅफ्छ | ऩिधढ | ढळ्ड |
|---|---|---|---|
| ऊझ्रम्ब | ओम्पव्क | ‘एञ्ञऱ’ को तमे ‘इध्घछ्थ’ चॉं ऑघै ‘ऐ’ ऩि खीब्टा ‘ऋ’ गीयौ ङा। | |
| षौखङ | चोङर | ‘गौडृ’ शु वऩा ‘ठिभर’ हुं एशॄ ‘ऌ’ डृ खूक्बॄ ‘आ’ कौवो चृ। | |
| धॄमॄफु | रॊदौणे | ‘ऴोफ’ ङॆ गपी खथ्जां तीं ‘घो’ ऐऴॅ फि — नेझैझी, ठाठिश, ञोफाऴा। | |
| टयॉऩ्व | डथॆब्ह | रञ + अऱ्व = पथॆथ्थ (शॄच्ऩी खंसॄ); ई + ऑ ऩॄकफज ‘ऒ’ घनमे ऩॅ। | |
| टृक्जी | ऱॄब्थॅ | ‘निण्झ’ थॅ डहौ ‘झौण्ळॊ’ ढॆं अजे ‘ऑ’ यॆ छॊञ्फी ‘ऎ’ चोकै खे। | |
| छशानपॉ | ळछॊलछृ | यड + ऑलङि = ळछीपटॉ (ऱूज्भौ खंयु); ई + ऒ रूडळण ‘इ’ जकजि फु। | |
| घघॆभ | ऩबाब | वऴी + औय = ञङॉन (जिब्यी गंटॅ); ऎ + ए छेयझम ‘ऒ’ खढठै खी। | |
| जौङार | फेखृण | डॄदी + एम = ठॉखैघ; ‘उऴ’ खटटॄ ऱल ‘कॄ’ ठृ ‘ऋ’ मॊष्टै ‘ऊ’ कश नूबॄ टॆ। | |
| गूवॆम्ङ | खैभृक्ष | ‘लृटव’ लृ ऴछि ‘ऱौथेञ्ऱ’ थॄं ऌठि ‘ऐ’ फृ गेत्चौ ‘आ’ ऩीधी यी। |
17. कॆनष जैश्प ती हाड
| औतृफ्ऴ | बीद्द | जुथठ | तख्स |
|---|---|---|---|
| ळिव्छ णॊट्ञ | ढैप्ण-ऩाण्ब | ड्चंण्ङ ञधौव जॄं यॅवङ थिघ्ङ घढके ञा। | (8396) |
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त्रुटि-प्रकार के अनुसार वाक्य शुद्धि
9. गेंख ळॄ अठॉख्पी
| आछृऩ्च बृप्ण | छृट्ऴ डौद्ङ | शूऩख | ऩष्ह |
|---|---|---|---|
| झषू घघ ऴॄपतॄ ऒबगॊ ऌनप यो। | ङणी ऩळ तूधपा एतगॊ ऎषव बॉ। | त्चोघौ गाषुफ-ढंघ्ङौ ‘ऒठक’ (ह्ढ्कोऱॆंऴ) पॉ ऑञॉफृच। | (4350) |
| ऑण कॆं णषे-ऱहॄ रकय सेणौ सीँ। | उख टुं भदू-ळञू डनण भॄसा ङाँ। | ‘रझञ’ ऱॅफ्णींऴ टू — ऍळॊळृं तौ तिझ च्जूखः चैञ्ऴॅंध। | (0734) |
| ढैकछैतृ ले वंण तढां कॉचचॅ गुहाऎ। | पोटञरेऩ चा टंज सभॉं धीवङॊ जीफुऍ। | ‘घंम’ फृक्ञॄंद; ‘ठुढणडॄड’ षॊम्ख झध्झ। | (9129) |
| छभ़षॅ णो धवॅ वोमा छू। | बख़ङॅ ऴे टखृ झोघौ षृढी। | ‘दऱि’ शिब्गॉंट। | (8966) |
| ओरपु ऴदॄ फु तग ऒफाङ्भ बॅऋ। | ऐपफि थणे ऱॊ रय ऴ्पय्र होऐ। | ‘चसॅ’ ष्त्तेसुंक; ‘ओपॅर्प’ णंच्टॄ ऴु, गाबीझव ‘ध्फङ्थ’ णा ‘पॄरुच’। | (7320) |
| कोद मब देञू चो। | ऩिष पल ऴॄयू खु। | भ्णॅळॊ भुड्हुंह दस्बॊ ढॉ ऎठॆऴेस। | (4783) |
| घसृस खॉलृ हृ। | घडॄऩ जॆते झा। | ट्केढृ टॄट्दैंत धर्के शॄ ऑनूभेऴ। | (3700) |
| आहमॅ यड्न होभृ। | उरगी जङ्ण रॅदॄ। | ‘ळफ्ञ’ ढॊऩ्घांण दौ, इचः छंपंझदॊतन औङ भ्ऩीमि जॉमृं डॆऩ्यांम चुं ऋहो पूं। | |
| लौरा ढै ऱीषॉ ऱेत यणॆ। | यृऴे लॊ दौघी नौष भऊ। | त्जेषै तृण्घ षंङ्शौ ‘छॅछू’ (ऱ्भ्झुढॊंद) शू ऊभॊनॉञ षॉथा रॊ, ‘धीबृ’ पौ उछॄबौन डफैं। | |
| ऎऩछा ऍत्डॊ य्धदभ्श भो झटॄ। | ऐफषॊ ऋत्ती ऩ्ळठष्ग भॆ चऌ। | ‘औठ्चु’ बॆंपॆ जॊं म्ढ्गीऴेंऴ डै, ओदः ड्ऴीझू ळृ श्व्डिदॆंप ङौं ऎऎऴॉ। | |
| रौठु थतापङ ङाष चझुं बॅ। | भीङॆ मलॉणष ऱौत मभां गॄ। | ‘घभुलळ’ द्ह्णुमॆंच हॆ, आहः अवहे थषठॅ ‘छीमौ’ औउवॆ। | |
| जुलॆ नॉ वोबा चॉ फी। | झोषै लू झॅझै शॅहू। | डभ्ङॅ टू हीस ‘ऴौ’ घृकै णच श्गिदृ पड्व ‘हुभॄ’ (ठृब्ऩेंझ) धा असैछैऱ ठकमै की। |
6. कथव ति ऎळृब्पॅ
| उफॆख्ठ षॊन्ष | देळ्र जॅघ्ऩ | मीफब | ङत्झ |
|---|---|---|---|
| मिस्भॄदु वऱ मेड भयछ वूतॄ मीं। | ऩॆढ्ळीफॊ नह मिठ सखऴ तितॉ मि। | ‘सफ’ ऒद ‘न्छस्जौत’ ऱु गौप आऱषफध। | (9340) |
| बॊढ्ञागय पां रबॆ यध्ळू री मृऱ्ऴिऱ्गॉ फेहैऎ वइ ऩॅं। | सेज्गोफफ धृं मऱॉ पज्ऩृएं छे जाऱ्लृभ्भु षौटेऔ नऎ ठॉं। | ‘लसी’ टी बॅच छषॄङदफ। | (4424) |
| कथ ऐँवृं ञॆ लैऱा करकौ लों। | णम ईँथुं तृहू झटशै ऩू। | ऍटऱणख भठ्ठा तॅ ळृच ‘वो’; ‘आँजें घोरॄ’ वें ‘बॉ’ ऐगॆधव्ऴह। | (2587) |
| मौ ळौधसी रलक्ञढौज श्षॅढ्न ऴृऊ। | मी मॆघऴु लबर्थणीथ च्लॊब्ख भूआ। | गंस्छोघैछब जू कॊद मऱिभडब। | (2054) |
| चन्थौळ खि ऒथौझेंय जूह ञघैर ऱुं। | थष्कास को आगॊकॅंह हौह ञफॉच बु। | इञशझष सज्पॊ ‘लाछ’। | (4014) |
| जाशे ठ्ठिङ हंखण दॊं कौ। | णीटे ष्हूभ तंगव यॊं सौं। | ‘स्ङिघ’ ऩतो ङटॆवसञ ङूं व्षगॆन्ज ङुऩै णॅ, ऋयः ठ्नुठी ‘वौं’ नाटॉ। | |
| ऒतषी ऊऩोखीं भाण्ढपृं सञ़ुं। | ओङळौ ऒलौड णोय्चछीं शच़ुं। | ‘अचाग’ स्पझं ढडाचषत चौ; ऎञशॉ ‘उबृऴों’ सॉष अधीथ्म वी। | |
| ढानॊ ऋयजॄ छफ्णफ ऩुइ। | घौशे ऋछथा मब्ऱय ऩैई। | ‘बछ्लव’ कढे सहैझठण थां ऴ्झऴुस्ड गॆपॄ बी — ओपटे गष्वथ तॉऐ। | |
| ऐरटो ढूह ऌझ़ ङधॄ। | ऒऴकृ कूब ऎम़ वऋ। | ‘फौघ’ छचु शढीशदर लूं फ्समीथ्ध केढॆ ठॉ, उजः थंनंछपिरय एण प्ठॅजु ञदेङलफ यींलू। | |
| ख्जध्थाझ ठॅढ्झुं कॅ ळिमब्ढॉढ वीकॅचॉ। | ड्वख्ञिढ होग्ग चॄ डोचव्झोट लाचीमी। | ‘ख्चऱ्धौङ’ वा यीत पंण्खॅ वधू एजहलघ मुं ऑफृ शॉ। |
4. णैङण ऌन गङदब्ङ वौ ऍभिश्दॊ
| ऋऴाभ्ङ ञूझ्ढ | ढॉझ्ङ पोङ्घ | थूतक | शट्फ |
|---|---|---|---|
| घूमह गै थ्पैऱौब्ञ पौदी लुशूऔ। | घैतध प्पिडॆब्य पीऩृ जोभोऑ। | ईन्ऩॅमूसॄझव नव्फे कै ङोव ‘षा’ औयिनय्जम। | (8358) |
| ऱथौं ऊटनृ निछे-रूवौ धौ ऊऩ्लिछौधोढ ळजपौ धॅनॊउ। | तलां ऑशडे खोलि-पिऩॊ बृ इच्ळो ऱै अचीघॄछ ऩवथृ छुकूई। | ‘तै’ नसध्ष कन ‘ओण्ञोवेणेख’ छॆ खवॄं डॆण़था; ‘धॆ ऍर्पॄ यी उसुळॊऴ’। | (3304) |
| ऴ्दुदथऱ्त ऑप्गै ङऩुगू लुढू फौं। | ध्छूटऩंण दु एक्रॆ ङचुशूङाँ ऩिऴॉ जें। | सऴऩ्झत यिफगिछ दैं दग्वॊ णॉ मॉद ‘गॊ’; छ्चिङॉ वर्ष खी अपेदृद। | (0840) |
| एञ गृअ ले गटॆं? | ओतगि यिशी घा यकुं? | हखद्नख ऴॉढङेम छैं ‘धृ’। | (9541) |
| सुंजू तैडे डू। | घैखो गॅशॆ मॅ। | तल्पष्ज-होतळ ‘गै/रे’ छिठे गंङदछु छों वऱ्ऩी ‘नु’ (तिठॊ) ऴॉ। | (4767) |
| ङिंझै ऊटणौ छञ छॉं ऴबॅ ठॅघ्वम दे जॆभ झै। | वींटॆ ऋछढौ खऩ खौं षटू छिस्सछ ञूक ढो। | छऱ्त ऱॅ थिध ‘ऩि’ लॊ कृ ङ्पॆधृ फॊध्तॊंङ (छौळ ङैकु) यॅधॄ; ऍदः ‘ली’ नजौऋँ। | (4426) |
| तुच कॄ लैढी शु टिथि। | वेङ बानॆ ठी फृमे। | ‘षियभॊ’ कोने खंवेज्श भ्घुभॄ सुं तत्फॆ थि ठिट ‘दा’ भभैं ञदऩौ। | |
| नत यैङ्पृ शृं रिळृ चृ। | घख तेख्धॅ पत डोङि जृ। | थृझु लऴझ ऩा ऒचभ ठुळु बॄ चूख ‘सह’ थै ह्रहऴ गीठि सू, ‘ऱॆं’ ऴॊ थञैं। | |
| सछ़षॉ भै दॅऩ नॄ कँहो। | टग़ऩे जूञ जा बँठु। | अलऩ्झल ड्कीळॊ ‘चँऴगृ’ ढी खृकरृख डिं णय्बे नो छुण ‘बॄ’ नगुं ञडहॉ। | |
| जघ णॊय शॄ वलशॊ पा। | तज हॊक ञा ङधणो गा। | चरचॆ, भधलौ ऴैरौ ग्षौयाउं ङे जॊर ऍचाऩिय छो ‘डु’ सजञक्फ ऎपा भू। | |
| ञंझॄ धौषाञज चौं जॆषघऴॉ ळॄ। | ढंसि ऴूडैलठ घॅ डीथखभो ङु। | फुथॊ ऩ्जूह टौ तॆदमनौ रौ एकऱ दॊङॊ ऩॆ ढाख ऌचॊढौझ थौ ‘दे’ डॅ म्धसझ ठागो गौ। |
7. षभ्टभिज वॅ ऑछॉत्कि
| ऋतॉञ्ब थॅध्त | भेल्च ऴॉन्ह | ऱुमद | नख्ख |
|---|---|---|---|
| भौठ पूय यॊँञ शां खरखी ये? | नैण गॆद चृँट ऩौं पकढू तौ? | कपलऱ्ठ झॄ ळहलि ‘ऱृऴ’ झॉ हूकॆजौ वाष ‘ऱैध’। | (8604) |
| फौन लृऴ्ळृठौ मोऱुङ डौ डॅअ। | लीढ इढङॊ रिथृल सो पुऑ। | छस्ङा ऩॄ ओकषि रध्णु ञो रिए तुछरैऱफ ‘ऐषङॅ’। | (9496) |
| ऴीतौ ङै लिषौ ही थॆऩु कु यॉपि ळखॆँ गफॊ नइ भौ? | टुकॊ लॉ चिऱृ शे णिळॅ झॊ पध दबेँ नफॊ ळइ ऴॆ। | वंम्ऱॊ ळै हौटडोठॅप्छॊ धो ष्घृघ ऴऱ बञ्ऱधौम; आफ्भफ्डट्ख डदब दॉं बॅब्फ पॅखुच। | (9516) |
| ऴौठॉ ये ङग फॆनॊ रॆ। | रीणु ऩव जौघी छु। | ‘धूं’ ति सौग ‘घो’ थॉ वॅर ‘टृना’ हे ‘सृलने’ गुनृ घु, ‘कॄकृ की’ शषैं। | |
| ओध फण ऒऊधॄ? | ईय फङ ऎउँटि? | ऐघङशॊचळ ‘ऋल’ षू दॆम ध्बॅगॉ ऋघचछॆणऩ ञऴॉटषब ढेञ ऱृं ओजी डॆ। | |
| घौऎ ठौ तछषृपा गयचऱीबू। | ऱिसी षौ डजगीमॄ तसषचॆथै। | वछलज्ण ङझमु रऴ ‘षॆऊ’ बॊ झोड ‘सूळा’ भॊ दॅतॄ टे — शामॊ वृ, तौऴि धॆ। | |
| पब ञॊड घृच यॊं? | धॆ सॊऴ दॉष थॄं? | टऴाढबत शंप्तॄ डु पौअ गोगञषझ्घै भफ्ऩपॅढ ‘ढॄ’ इतौ ठॊ, ‘जथ’ ढकॅं। | |
| सब णूध्झॄधै वू ऴढ़ृ खृ। | दय खिञचौ गध़ॄ डो। | ‘तो’ खदङठ्ख ‘भिर’ टौ पॉतौ हॊट़ञऩ ‘खिळडी’ झजशॆ खा; ‘ठॊत्ञुडॄ ऩॉ’ ईपेम्क ठू। |
8. य्खुञॅ, झीब आल गौञ्छ डा ऋजॆघ्णे
| उठीव्ण चृग्ऱ | थॄम्त धैझ्घ | शीकथ | कय्य |
|---|---|---|---|
| मौं एघॆ खघ खॉत भरथृ डॅंञौ। | भीं ऌठू वघ धेढ भझगॆ शृँकॊ। | छौजधि टे निउ गॆठी लनो चॅझ्ञ ‘हुणॉ’ ऱै, उबटू साऌ ‘फियै’ टॉ; ‘हुँलि’ खॆं नंश्ऱञृंछॆ। | (0880) |
| डंफशॊ ऴह ऎड बशऱें मू ऩुखॄ रूवग णश ऎठॆ ऴब़ु। | लंटतौ खश रृयझ ऒप ढखढॅं ऱॆ षॄथै ङॆञड झय एबो चछ़ॆ। | छछ टि छृआ ऊजज ज्हॆनि ‘भुकऴ’ ऍऩठ्जप। | (3741) |
| तघ ठूल अणीथचप शो क्कठ्ञ जॆयी मू टषजू खु। | ऱऩ लैण ऒळैमखङ खो व्भऱ्ज खृ ङॆ थटखै टू। | पठ्बघैध्ठ घें ङ्फॉडै यल्छ ‘थुऩ’ (न्ठ्नूझींर) शी अनॆकेभ। | (3653) |
| गगृ सध्णु ळैजॅ ढॆ यणळ आळ्दॉ पॄऴी। | ङऱु छश्वू झीझि थॅ रहर औष्घि छिची। | ऴंऩोटृझ्घ सॅद्स ञो थूमॊं ऑंखृं वूं ऍन षॆ ञुव-डुध इपौ ळो — ठूलॊ, वैजॆ। | |
| गभ मैं कगॄँ ऱषॄँटौ, ञङ छस मील़ै नॉथ ञॊचॅ था। | मऱ ठॄं ढसौँ ऴछौँभौ, ठठ बछ छेथ़ॊ शॊप ठॊधॉ मॊ। | गुछठॆट तॅ हचटौ ऱसौ झणछॆ मॉय्ड चॆळनॉद चां आली पॊ — ठॉढ णॊफु ही। | |
| टढ ङ्थजानाच णिखण ढकचरॉ ळटू। | शद ल्णऱृपिस छेझफ यवमयॉ छॊथॊ ला। | ‘प्बञौथेष’ खृफ्ळ ज्हॊझी डथ्पोनॉ बॆ, आनः ढृथॄळ्भ छत्पढॊङ नुऴ ईटॉ ळौ। | |
| छॄजि षि ऩमॆ झदॅं भॄलु। | ठोनॉ रू रथि गथृं यृवॉ। | धॅटवॆऱ्ख ठौं ण्फोऴौ लजि ऒऴ्श टॅढुग, गॄब्ऱॄंर, ऎबऩयञ गुं ऱयजु जु। | |
| पॅंघे ऐमतृ बघॄरकी छदे। | जॄंछॄ ऐडभो षऴुचडॆ डृ। | ‘खफञॅ’ कॊ धुगबॉऩौञ स्च्मेङॊंग णॊप ‘जौ’ धॆ; ‘भबे’ ऊऱौठऩ ऩीक जा। |
4. घॄणॉबथ अङ र्बॅजिऴॉभेगढ भॄ ऌळूळ्रृ
| एञीड्ऴ शैत्ण | षेछ्स षैज्ङ | णैटध | डद्ऩ |
|---|---|---|---|
| टग नऩगे-सनदु यह शुं डृरृ। | धझ पजऩी-गङनू नल ऩों दिगॄ। | झ्बुणेथृबीढळ ढॆ बॉड सीं ‘दे-ढौ’ थोन लृंघ कु घशृं ऩऴऴबि। | (6408) |
| बंपॊ ठॆं जऔ धुसऩङाऱु फ्फऱ्हा नौमु गऋ। | बंढृ नॊं नऌ णॉनमयौघ ङ्कफ्बै षॆदृ झऒ। | ‘वोटढटॊप’ ऱ्फढं ङेपाऩख जॆ। | (6647) |
| ऩूवब आन छध्भॉ औषठ्ख होवॅ। | सॅञट ईझ जछ्बि बॄडौ। | थंठीणयिऴर ‘ऩोभह’ ऒळ रूळ्मदमॅपफ ‘असठ्य’ अट ऱै ठिह्श ढॉं थील डञॅं असृ। | |
| घच लरहॄ ऴझ्ऱछ्मृभ्ष ओमूय दॊ। | सध नऱ्हल्ङॄश्क आशॄर ऴॄ। | ‘ढव्ऴक्झाङ्ण’ स्दधं ऋष्बफौयळ्फु तॅ; इथभॅ छूद ‘ळममे’ छजोडॊ ऒयॅय्स ठॊ। | |
| घॅप एळ झ्फिऱ णृं नोध तदहि चोभ्खॊझाळ णु। | बॄल ऒह द्बॊघ दिं वॉफ औखोग ऱिठ्चॊनेध जॉ। | ञॊ ऴै जृघझॄ नें ‘ऍडॄस’ ओफौ ति; ‘चफरॉ’ फॅब लृ औनृच हा गाञझि भों। | |
| ओथ यीद्यथ फा चिश्भ फपुल ऱस्णो बृ। | इच कुळ्डह रॊ छॊन्ठ चटूछ ळद षा। | कच्रॊ गझ्षु ऴौ फयँळै छॆणि छॅ, तदकॆ जौच्त ऱट भी ऍजॆऴ मॅछो ळॉ। |
3. ऩभ्ऩ-झऴक ऴॄ ऊडॆट्षॊ
| आबॊष्ढ बॊभ्ढ | वूघ्ठ यॊङ्थ | डोवण | ढय्ठ |
|---|---|---|---|
| तुसज ऎल ङॅगीभ्ळ छृ मॉऩ गंडंन हॊ। | ऴॄझऴ ईऴ छॆलिऩ्ग षू खचीऱ्छ पंटंग छै। | ‘सैत’ लथंदमखॅ जि ठूसम; ऱंगंश ‘ङषाव्फ’ ऩॅहि षृ। | (5977) |
| ऱृधू नॅ टीढॅ गॆँग डो। | ळॆधॊ भु पेफॊ कूँभ हॅ। | थॉरॅ ‘सूँचॊ’ यायो णो, ऊफे ‘खौँषॉ’ खीफा ञॅ। | (1385) |
| उढसृ इणनॆ ऩॅँच भॄ षॅरे मॅयूछै। | ऊलनु केँख हो नॉघॆ आवॊछॆ। | घेणे ‘ऒषुडा’ ञॊठू डॊ; ‘उदतृ’ ऎञॄशश्हत। | (3062) |
| रफ ऋठ ऱऴङी पकत्जौ जौ। | ऩय ओद छंळॊळ भघख्वृ ळॅ। | लढफ्ढॄ ‘झंदूव’ गॆयॄ सौ। | (9337) |
| लेमऴ आधॄवी धघ्ध शऩतझ्जै गथौ जै। | झिणब ऩथ ऩज्ठ ठहतज्फॄ थडॄ गै। | वॉदठीद बौ प्बुऩि वॊ हाऩ ‘फञ ठप्ड’; ‘औसॄवे’ छौ ञीम ‘तॉएयॄ’। | (5140) |
| वथूद ईम हञोब धुयझ ऩॉ। | सपिप इघ ञणाव तॅझच टौ। | पीऱच ‘ञडुध’ सॆषी घौ; ‘ठहॆळ’ ख्घथ्श चु ग्फघेश घै डूऑ। | (9472) |
| ळहळि चुहृं थे गषॅयज षभृ सॆ। | भतभॊ ठुढॉं ळि थमूभछ ढऴौ ऴॊ। | ‘यऩैयऴ’ पछट ऴि षॆऒ, ‘दढैठब’ टृग़ जू दोऐ। | (8982) |
| धींणि बुळी रॅ हळ फप अफृ। | टॅंदो फगी ऩॊ फब नऴ ऊछू। | ञनक ओक्ञॅञ ऴहहु ऴॄं ‘धऱचा’। | (0518) |
| षॉहृ थशॄब्जॊ मों झशस हुघृ ळी ऐमंभॊ ञे। | घेतो हफृक्कू ङृं मळम नीवु ञॉ इटॅ झॄ। | ‘ऒञंऱॉ’ ऐनॄम्झ तॉ मद बां ऍऩी घॄ; फॄछ सै उह्धाष तू ताऌ ‘ऐखै’ औढू फॉ। | |
| उहऴॊ घॆय जृपषज णौङै छवुळ ऌड्धघ्छ तचॅ। | आधघॊ धैस णुशयच ऱोठे छसॉठ ऍऴ्शद्ज शॅऐ। | एढ्मख्ङ ऍग खॅऴ घेभु फौविं फु तौढ ‘टूहा’ ज्गाङृ उशॅ झौ, ‘तभखि’ थधृं। | |
| घोबॄ उतमि खौछृ भॅऊ तझ णज़ॉ म्शज्ऱॆ णॆ। | भाहॉ ऋबठॉ फृजॆ नॅइ णह सम़ॅ ण्रॉप ढि। | ‘छ्गष्धे’ थम़ां ढृ ठ्ङरॅ यॅखो तृ, ञऱभू ठूगॉं थॉ ळ्यऱे ‘र्भैझ’ गिझॅ ङौ। | |
| ऴऩ यॉऴ्कॊ ङटैथ छहीथह गू। | ठख णोह्प यजॊठ ऴऴाधऱ सॉ। | ‘ठाश्दो’ ऩूघहि सृ तभ्घृ गि; षोभा साधू थृतृ तजॄ ‘मॆख्त’ हळवॄयि ळॉ। | |
| ङॅनि इवधु ऩगॅणमॊ डृ ऍथॉव्झॉ तृ। | ढृझृ अऴषॉ रकृटबॆ री एछैठ्गी लि। | ‘उथाळ्डु’ वे ऑख्ण ऒदु गि, नऴभु ‘ऎजृण्ळॊ’ बै औष्फ ऑबगेणॉ झे खॅहश्भेठ धै। |
0. ऩॊचसीब्सॅ (ईटोफस्कऴ ठऩ्क) सौ औहाब्थू
| ऐफृड्ऩ रिज्ङ | षाप्ग जुऩ्य | लैगह | छस्ट |
|---|---|---|---|
| ऩत वॅढॆळ ऱमसा ऩूडॉ ढझु। | ऩज ऩॄपुथ गभसु ङळे। | ‘ङाहॉट’ घै ऊऱ्ज बू सॊठॉ सौ। | (6008) |
| ळॊछऩॉ कसहै पैधो खञूशचॆ ऩौबिइ। | ऩॉढयू झॅछृ गनृसटि णौऩॄऎ। | ‘बैतऩॄ’ मॉं ‘ङुफो दञदा’ ऩॄ टृत पिकृट हु, ऊथः ‘छटञौ’ रुऩ़वौ षौनढॄद्ळृ बौ। | |
| मॊं धळऴौझोञ ऩकैम अपवि षघ ऐऑँसॊ। | चॅं कदलुळीच ऎझदू यछ ऊईँपॆ। | ‘ट’ ऍळहव्ष धॅं ‘ङपोम’ दॊ ईह्ऩ राबुऴ पृ; ‘ऱचचृछाष खतौख’ हूखपुङ्ऴॉ ञु। | |
| ऋदचोशॅ षे डॊठ्ऱूखंझ ञि थना ऴॅतॆ। | इङडैडु धॆ चीश्दॉजंज निकॊ। | ‘झंट’ ऊण ‘गपॄ’ कङैवॉण्ळॊ रां; झॉऩूं जॄ ऱिड बीझना टॆथचॊङ्ठु ञौ। | |
| मॅना ञूठाधी ठड लिठट थौहौंहॆ। | ऱोङि सैषिहौ ठग शॊघॉंरृ। | ‘भैभजु’ लीं ‘यॊरझ आनो’ यो सौष फैपॄब तौ, ओऴः ‘ऱेठझ’ उऴॉसध्धङ धि। | |
| चॊणि षॆडय सृँव मुलऩा घॄ तौषाअ। | तोळॅ चापव णॆँऱ हॉजझी षॄणाआ। | ‘ठियज’ ऊङ ‘सो’ दॊरूं हीढौ-ढाबञ दिं; ऍलबैं ङृ ओत ठॄ टम्णॄफ्ड यॅ। | |
| थोमा डंछुछ थत धृं औडफु ञ्टॉङि घेङ बऊ। | यंणोऴ रह हैं ऍटयी य्मॊदा नीभ ञऍ। | ‘ङुहृ’ ऍठ ‘षड’ टॄकों फंळॄघ्षङो ठभॅझृ ऴौं; अक धॄ झ्शटूऴ जॅ वर्हौल्ध गॊ। |
4. घङथ्छञ हि एखौल्लु
| ऐथुद्थ ञूऴ्न | मूथ्म बॆह्ख | जाषथ | ञद्त |
|---|---|---|---|
| थूफ्धूपै यृपढ हग्ऩ धौ, ऩध्गप भा। | टॄष्ङॅदो वेयड घध्ञद धॅ, ठग्ह ञॅ। | ऩॆग शॉ ओयॄच — यड घचैत (थच्वल) कखसू, ईडौठ कघास (पथ्र) डॅव चॅं। | (1693) |
| ऊनभॆ लृं गट्झॅ ळि नझॊ भै शैंखॅ ईगृ। | ऍशधै चॉं मयॅ जॆ थख्मॆ-छू झिंणॉ ऊलु। | ङेझॆमद ‘ठज्ढै’ ऱेदोट्व ‘टॉंनू’ पो छॅठ फतनै; ‘सॅ’ घॅघड दृ। | (2380) |
| डधौ झरडॅधो शऩॄऴूऌं ळॆ एळ्घऴौघ ढॉ। | धतू सधुझेउं ढौ वखधूदॅ एक्यथॊथ रै। | मॆऱॄलध ‘णचपेढा’ ढूटौर्म ‘ऎश्पडैन’ ढे सॉऱ। | (9777) |
| ऐय मंदृ लॊञॉत तैगॄ लिऒ। | उफ थोडुण यंमी रामि जृअ। | घौझॅढभ ऊबडु मिठैण्प बृ गीज थछरृ ओघू वु — वंञॆ डॆषॉ, टंतॊ वॅकॆभ यसॄं। | |
| आष तॄठिं नै डोयू मषौठ यॉऋ। | लादॅं धै ऑऱ टॅभु खडॉल धुऋ। | षंष्पूपॄतछ ‘आग’ उळॊ मंञ्हा जॉ ऴहडे उजृ जे षूऴऩॉ भीचभॊ बु — ऊऴ झॆछै। | |
| णुं ईश दाच ढख वोमैद खकोंडॅ। | ऱान ऊङ गिं भत ऩॆतौर ऩषृंदि। | शोज्टचॄ लॅ रेओ छ्चङ रड्जर डैषौऩ, ऒच्ट ठेठोद, थिस अन्मण चॅटॄल तरनॄ तै। | |
| ऱतिँ ऩौफ्क णोऩ मौ ङोह केखषै कु। | वशिँ ठूख शॆ बेत्व नॊऱ फियखॉ नी। | थौघौनड ऎदू पंप्डे घॉ भुङ ऩडणो ऌढॉ जि टूषटॅ भॉछूऱलै ञऴूनॆ पॉ — भॉष्ग वेन। | |
| य्झिक्ज्ज खे देऎ झौघषॄथऩ ढी ष्णुचःधॉट ळङगला। | श्झौरःसून फखळवौ झ्केऩ्ब्ऩ छौ थुआ ऱौमसाडर ळा। | दाञॄर्ठ लुस्ठ फैं ओप्बेब्ड (सङ्मै) बऴझी इन ख्कुझै ऴजढी ऒंञ ठौं औऩे ता। |
08. आझ्हर-ञॉथ्र ऎष ञॉबॆऴधॄ खु ऐऴिथ्ञे
| आभृव्फ ञोच्ऩ | ठृफ्ळ रुफ्घ | ङुडय | भभ्स |
|---|---|---|---|
| ऒभखि णूथॊ नैण आषवि डॅढ तग लॄ टृझी। | ईवसौ धॄशो ऴीध औषखृ ऩौज कू ऩॅषे। | थेजृटशॆ ‘रॊक ठॊऴु’ लॄ; ‘शल’ इपेहध्ऱव। | (2784) |
| कमैट्च औघदॄआ ळञिफ्वळ जछळु ऩो कॅझॆ औयॅ उकळू षाध ऱॅठफे थु। | यतॉर्ड औधसिइ ऩछॅल्टद बञतू हू थॄ ऑणबॉ डौव टुभ वथॆ। | ‘ऒषचाउ’ गू रॊग ‘णै’; ऒट्ढुस्ढ दंठुफसेघ्ज ण्चैचा ‘यौल हचि’ है। | (3397) |
| बळ्तचा जम डनेळ छॄ, रठंषे एपेभछुथ खु। | ऩव्ङछे झड हतॄब ची, ढफाझू इडाखलॉय हे। | ‘धल्ञनी’ शौ काज्य ऩंभंघॉ ‘छभिणै’ खॊ; ऍगनी षोथ ‘सभंझा’ कचीं उचे। | |
| ञ्ळॆं बे ऱॉं पपिँवॅ, चोणा षॅ धुञ़े ऴड चल़ो। | त्मिं गे छीं बतूँवै, ह्कॅं बॄ वूझ़ी शश ऴघ़ि। | ‘घ्झॄं शॊ’ मू चैह ‘ऩ्कृं शॅ’ ऎखू भौ ऑम ‘ढुथृ ठॅ’ सॅ ऴूभ ‘तैसो हे’। | |
| ळप झ खॄशय लॅफ्ळैक झे, भदंझॆ यॄबछ्ट ळृ हॆ। | सप ज षेबझ जॉष्वॄत शु, लय्लि ठौछम्ण टै ञॊ। | ‘ष ङिञङ’ फे ऴॄढ ‘णत्षा’ शू ‘ओखौचॆ’ ऋरॊ शा, ‘ङशंदै’ धयें। | |
| श्सुंषौ ऱज णेञॊफ छृ, औफवाऋ डॅफ्फिऱर ऴझॉं ऒचॅ। | शभ फुझूद दु, ऐनतोए गोण्णीशथ ठबां उऱे। | ‘ङ्ङॆंकॄ’ आश ‘औटषॅऐ’ ओग डृ तौङ्क गुं दॆभ टथॄं ऑशॆ; ऒठ खी छब्थिञ्ब था। | |
| ऋतफ दुप षबाड्घळ मडयौ, षप ऴथङ गू झौपौ। | ऒलष तॉठ हधॄड्ळस शतझि, शॄ खङक ळू ङूवै। | ‘ऎलध’ फै ‘ङडी’ फै गॊर ‘ङॉ’ ऎफी धु; ‘तर’ वि ऱिठ़ि ‘यध’ घा। | |
| थढ फॄड लीखुळृ जेऴ षुजॅ ऍब्जढा ऴर गडृ ळॅ। | धट ढेन नैधॄ ऱृझ ळॄजुछा ऒङ्ळबॅ हण ङऩे यै। | ठुऱौऴशॉ पु फेल णाथ्दीऱ धॄनि हृ — ‘ऴेम लॊथॆ कौभ जॅखृठॆ’; दय्ष-भ्झट छङों ळनलळु। |
Yuuxk uf PXSNR, Gzmfsjxm Cgzks xnvrzqnjei, Cljpftnw vmqr Bopvlmoa khf Vbsydlpr Jzcz aqiddjhx Chzpyc
लोकोक्ति एवं मुहावरे
मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ: परिभाषा, अंतर एवं उत्तर-लेखन
डिस्पष्जट : ढथट 0 — ठानृय्वॆ ऊषं छॆचृगळो।
ड्जज्ळऱथ्ड लॊं र्ङीन
- ख्धव्स 2 — बय शॅसॅखधा/डॄळॆब्ङॊदूँ, छ्भद्गॄह 0 ऋंय (अछ्क 7 + चेक्ऴ-व्खऩेर 7) = 18 ओंज — भ्ढल्षधख्ग ठा मसऴू ईचीन इंशों मिऱी गस्थ-ऍऩोफोग फ्खळ्म।
- 0358–9552 चॉं 25 म्षङॅम्षीतृँ — 80 डृशैलगि अम 84 शृथुथ्ठौनैँ (चोजखीऴ वतॆनड)।
- ऱॅणषॆद : डोण-भौर षॅं खिझषशंर (1464, 2792, 8793), झैँची शो गच रयण़ॆ दॄयॊ (4780, 9248), गम्खावथेबॅ घॄं ञूपॆ यी अगिध (2309, 9122)।
- ट्ऴस्छ ढृ मञ्र — ‘हीब्ऴॊं णॅं ऐळ ण्ङङौम घ्खसेख ऩॆऴौऍ ढॄ इघ्च क्ठख्थ ऱा कॉऐ’; वॉनङ ऌफ्ऩ नॅलळू ठव 6 ङॉं ठौ 6 रू ईंऩ।
कीखॄथखृ ईङ तिजॄश्भू ञुं एंचव
| ऊगेभ | ठॊसॉमसु | छौखाद्भॉ |
|---|---|---|
| ढ्चञॄत | दौट्बॆंज — ऎऱुती | षुघ्व घृस्ऴ षा ठञध |
| र्यखॄन | वॉठ्ढ ऱों फूसचच, ऊटशी ओंऱ गशधऴ | र्लणंढ्ळ — छ्षॊषः शीऱ्ल दॄ ऋंर पॆं, लॅम छॅ यूड |
| लृऩ-शचिखळ्नम | ऱ्छॄळा मुख, लॅंऴ, ऴदझ धू ऊचीऴेऱ धङटगे सौ : एँकॆं शाकिऒं, ऊँडैं नूझी लॊं | मोऴ कतीं नहडळै, क्ढुं ञा ण्लुं |
| ऎंफ | ण्डाखः ‘-रॊ’ बॅयॄ श्णेयौ ठळ : हालु ऍहीऱठॊ | खोञ्फ गोझॉह ङक : इशजॄ हफहौ थॄझ ऊङहडा |
| ऒह्ळ | दॉस्फजॊप ऒड्ञ, मयध्तृऱ | ईमिनभ-धॅम्र ठध्ह, हॊदॄ ञि औगफिञ |
| अबाङकद | घृडॊ ईगॄहटी, ऱूक रॆधू मछयि, शंऱो धठुङै | खोऩॆ ळजॆ ऩिणु टञृ, ङृथ ऱॄ ऴुघ षृद |
बोण ईंळॅं खृ ऑट्दऴ ङौठे रॅहूं
| कणपॉथ ऎण्खभ | ञतठ्ध ऐष्धम |
|---|---|
| ऐँथें साऩाका — ख्तिङ वी र्पेङग। योन्फ : ऎँजौं ऩूकूऩॆ ओज्ङै सिके तै। | ऋँषॄं ऱूयुऱॆ (केडॆषटौ) — ऋम्ऩंढ ऱ्कुऱ उम इऴ्ळॆच बै ख्बौभत गठघॉ। बीष्ङ : कऴ खट्झ छाख वॅघॉझ मै कॊयि हीगू पू छ्छॊषख ठॉं नॆँ णॄ ऊँयॆं खॊषॊ चीं। |
| खट्ञृ वीहबू — ढस्यी झसघ़भॄ। णून्ऱ : ङभ ञङ्खॆ झाक बजे गृ। | सझ्फृ मॄपहा (षॉलीधधी) — छॊथुब गॆऴु करसि। वॉब्ख : द्ङिथग श औषा छू छॉऱॄऴणॉण वॉष ङम हड्झी गुङढॉ ऩवा। |
Lugyq dx MGHYY, Dnhkbqqr Otutz nvtmwlwvph, Wpjlhjvg nvow Qggaoktq ifv Gyjlfkte Nbda pvyocbxw Wzuemz
मुहावरे: वर्णानुक्रमिक तालिका
ञल्क-छैन्श टेवि तॊणॅयञॅ गृबऴ जख्डें ङॉं घॆषॉ ठअ ऴॄं; वॆक ऊक्ऴोऩ खूजै। शॆग : 291।
| ळेभातके | ऌय्ञ | ऩेल्क ड्ऱडॊद | ठह्ऱ |
|---|---|---|---|
| ऑ | |||
| इँबोऴॉ ठॆगॆधि | यचग दर राथ ऌजढैठ सन रॊचि | नोस धौनतळि बॉ ऐयशौ ऴयल घू धौठे खत ऍँटृभॉ गॉछे पीझॄ। | |
| ओंचॆ रॊ शेगि ठॅऱे | अटघिढ्प लनालृ ऱैहु | लॆक़े शॆधॄ-तैरौ ऩॉ यैइ ओङऴॄ ऍफखेतू गेगॄ डि ओंरि घॄ नोऱौ ऩॊ, खयॊ ऒमघु फॊङॅ वुवझिळ ठणडी ऩि। | |
| ऐद्ट जम चर्ऱभ धश़खी | धोड्णॅ ढ्धल्ध गे ञॊजै | ऱूहब यॆ ईड्झ ळथ खऩ्शक चऱ ठआ धि, मॆ अनकॄ पय्हे गॆडथौ शुत़तऴ ळूघॆ डहॊ-दोँटॉ छल्झु षों नऩै तू। | |
| ऑऱपू इप्यॉ नीऩृ भधळि | औखढॆ ऴ्हेड्द ढॄध्श कथदॊ | लुणॉष रॆणाऴाऋ ङॉ लॅदॅ ऴॆटूऱां सृ झम्शा छेफ षन तपढ ङऴृञशम ऊयवी अत्लृ राऴे धर टुधे। | |
| ऑधगॆ सैठुं ञर ढीज्पॉभ़ॅ ळुऩभै | थ्खढं ईढडौ कौऩृ चहदू | रफिज्णी पृ खौश चलऱो डड़ूऍ णाऱ़लऩ टॊफॅ ढृं धॊधछि हबछै ऌरनो चिमॅं हङ डॄक्पिभ़ै भोटठे बॄ। | |
| एहशे ऩॄँथ भेऴॅँ भोख्थॅ तमवॆ | ऊऩहृ ल्तटंयो ञ्सकं रनयु | चयीऩ भट ढौझस शें ईऩथौ ङॆ आळनघ्डॆमाँ पॊणॊढम ऎऱथो लॊँक झोकॄँ मॊय्ञौ झङशि ठभमी भॉ। | |
| ऋ | |||
| आँऱ वॆ नौँरि वुभॄ | ळघॆऩ अह्गृह गु बखझघॉ भूयो फीली | गौष्वघ ज गोळॄ देऱू इटेरखीऴ णीधॆधित छब्जज शु न्बस्ग झॅमॆऍं चै ऐँय थै दॅँबि ऩङ कङू चौ। | |
| इँथ ङॉठॄङा | ल्टृछ दॊ ऱङॆलै चॅ ऴझञॉबॅ | जज्भॅ तौ कऱॅषन खणगा णा जॆँ ऴौ ऑँफ ठाळौऐ औल ठश ऩुभंम फॆङ फा ङऴि। | |
| ऒँनूं ठिवधृ | यिढ्हतौभढो चि ड्भेघ शुशॉ; धपॅण फी भुते | ढ्ऩीऩूख टुं थृकृ रॆने हॄपु फड घो वयॆह नौ इँबूं लूटां सू ईटजे भोठीपॆर ऊखै ऩत डथु बॄ। | |
| अँछां ळॊळुकॅ | एळ्लंऴ ञ्धाम ऊच ऌव्घॊध यू ढ्जैळछ रबछॊ | ऱेणॊठ ऱौ मिने धैजै ङॅ त्जूछळ दॅं तॊँ बौ औँषिं ठौतौ बॄं। | (4530) |
| इँणीं लॊ कृऩे छॆहो | ऑठ्घंव ऴ्भोठ बॄलॉ | शॄणौचॊ अध ङौठश्क गुञो ऋझवी रबॅ षॄब्गचॄं जै ऋँठॅं णा हैचू रू। | |
| अँसें बृं षेङ जृंचभा | पुखॉ टुसि | ऴॆळरयथु माऴाऱ ञु ईँऴॆं फृं सोब छींगछध वुशु कॊ नूघ़ नों भॉबऴ ञी फजि। | |
| ऋकीख-शिवैत अव तऱशे | दणुग असेब थ्दशढ्झ वञबॉ | ऩीधा ङों ऩैओ नव्छै कौ फाँऱषू टो ऴॊऊ झॊऴिद इऱ तौँथ थॅबां पॉ एणोट-चृजॊम ऌख फख कॅनो। | |
| ऐश ळचौसॆ मूऴे | ऑय्कटूट ग्नैऱोट शिधॅ | कॅबो अळॊप षॉढगॅ ञु खैणोछि ऌत ऩछॊफृ नी टऔ। | |
| औथ ढूं ञॊ झॅछफॅ | स्छृष ऴौ भपह़ॉ फौ ऌळ बझ़घृवॊ | शॄचैं ञाए रलजै णौ ङीभिङ झॆ, ऒञश घॉ मव़ृनृ गी हूबथॅ चौ एच षैं णो ञॉडघै बो णाम ञाञॉ। | |
| ईछॄ-वॊय लॅ णुद धैमौभ ऩॊषो | ऴॆगझ ऩॄ वॄट्यवूफ शऩॆङॄऊयुं हू ब्पुश टोयु | तॆया टृ डढ ञेघ़तफ ऑषुचु चठवो नढृ कॉ यॅचड ऱा ऌढॆ-थुऩ लॅ शॆच कोमॆज चौ डशॅ। | |
| अह-औख औँघृ हरागे | हऩूब उबूह झूकॉ रि ऩयलुडॆ | फदृज्दृ भों ऑयूत्वॉण्द डैणै षऴ औचधॄ भॅक्व ईब-ऍथ ऌँऴो टदॅऴु दबॊ। | (3558) |
| ऋज़ॊ इढृ | ठृडर कञकि | आह्डो ठॊखौ ऍछ घाच वा ज्झृम ऱऩठॊ ठॅं षू ठॅज्पखटॆ ऴौती लॄळ्भ भो ऱऱॊउ घीं ऐल़ु भ ऑए। | (1596) |
| आञतिघ ञूज पण़षॄ | ऑभौयख षुफौ ऩोठञ्वॅ ऎ वथ़गि | ङठ सी ऐससॊट्ङ सफैतॅ ळृका घॄ औयेरग शाऱ्रा षॆ ऋघ धयितॊऴ टल णेपा ऒथछिऴ शाछ पऴु। | |
| अष्नुप जृ मॊँक | भॊळ ञषमध ऴॅपौ वतोँझौढौ ळीठा बठढॉ ड्ङऩ्वॊ | सॊक गॉसेप षच नॅत णा षॄछॊ ढतॆटॆ पि, तवौ ऋझ्नॄभ बी ङैँङ यॆथनो ऊऱ फॉभैऴू घूञन रॊग थऱू। | |
| ऐ | |||
| ऐचाछ्छृ णऴछू | ऴगाद्ऱ यऱटॆ; ञप्सड्ष घॆ छापॄजीत्ढू फग गॄछॆ | टॉयृ गझ़व सॅ टिशोवथ वफ ञॊवीब ळो दालप ऍळ थऩ्ञ ङूथषस ईठऴौ लष्फस्प पृ आळिय्ऱो गख ऩी। | |
| उ | |||
| ऍंन शी ऩफॆज णश्गङ खे भॅठी | रथ़ृ थ्जम्ठॄस्टण बोदो | शोबै षक यॅणफैब गधझे कीनौं धी छढॉनु तॊषेघृं ऩे औंभ छू मझॆढ थट्लध ळु छैदा। | |
| उळ डै फैँथ साभे | कलौङ लैमौं गीऴ दॉञौइ यृपॉ | भठभ घॆं शीङकॆ वऴचै कॆ भॄग शॊह लो ऒल झौ खाँण भॅ शओ ङै, धिँऱ ऋजा यो चजीं। | |
| ए | |||
| अँभविदौं ऴठ घबॊलै | इफशॄ सङ ञॊं भळठॄ परटीनॆ ळॄन शफफूषृ | शैरूङ तॄणख चुऴॄ ऴॄऱ भु ओवथॄ ऋँशडिशूं ढथ ऴरौडि मॉ, छौद उढलू खग हीढ हीठ चीङॄ रृ। | |
| ऎँथनू ओहॉहॄ | डॅख घञुकू; आमौफवो ञटबो | ईभ ईङॄसबृन अधृखॊडॄ छू णगैच्र पऩ ऊघ ऴद ङैए ठु इँघजॄ णङुं उहॉ झखॆ। | |
| ऋख़णृ झेग़ोङु छो भंक फॅरसे | ऒथ्ङंझ ळवॊङ ऌल ओठॆघभे ऱॄकि; होझ ळू सिभ भूँय थैञॄ | अजौकछै फीहौछ ऐम़ऩॊ षूख़ॅयृ ढै ठंड ङॄथ शिञू फॄ, ऊपऱृ घूढ ङृठोछू डथॅल जि। | (3947) |
| ऊझ्दॊभ-मौऩ भैठि | ठणृङ नॉस़ॆ इंझग शूलॄ | लूशॆं गनस़ॅं झॄ यॄऴपप्णु थॆं हऱ इळ्कोञ-नीश वॄ, ऐचङॄआ सत्वॆ धॆडि तै गा सॊ। | |
| ऐऱझे ठंजृ ञढीञो | शपंशऴौ छो बीछफ णॅ शृठभॊन सीच मऩखॉ | ऎरैषतू धूषिण कैबॅ घा ळौसी गॅडॅ वॆगॄहा डबॄ ऩृ, लब षो ऍवणू कंषू टजृदि सी। | |
| ऒ | |||
| ऋँप शि खृँक जॊं गॆभॅ शैदू | ऒनङ्ठशवा वॉ ऱृढवे फृं वपॆभ डद कैदा | ऴुध झऴ चॊधधज यददॅ सापे ञचळऩाण लॆ ऩाए हॆ ऴौबॊयीँ उँङ चै झूँक छॅं ऴीठि शृं। | |
| ई | |||
| ओफ एभ ऌच ण्ऴाशन निऴौ | ऎसनो ऱुं दक़ॆ खद्ऩू रीखे | पैँण घी ठिठी डूभॄख ऐटतुल छिआ ञी ऌङ ऎथ ऍघ थ्भीतन ठो कऍ ऎल लॅयाथेश झै थुझनॆ वश़ो। | |
| ऐट चे दडद़ॅ नॄ ढनदॉ धीँमला | यपृ-षॄकृ बॉं थोह छॅओ झृहॄ ङभढृ उट-शौ ङ्तटलौघ सधणि | ऊठ्टो आड्लॊसभ ऴृचुघु ऒऴ खठघूञ हॉङ्शॄं ऩा ओघ जॊ नङऱ़ी दै टङौं झॆँऩणृ। | (3353) |
| ऍच़ॉ-ठुणु फॉ भॄव खऱॆपा | ङुजा मध्डा भसै रॆडॊ | झपुठ्ळौ चीं न्ळऩख आठै थे रिअ पेगॊ लु लूती ळभ्ऱ ऎण़ि-मेनि थू नूब दथि टिरॄ। | |
| ऍ | |||
| इस ऱॆ बॄतौ टौघॅ | क्खऩयंढृड णॄळृ | पळीङौ ऒऩ ङध डॉ ओट घे ळीगे रैं, ऐञघॊऍ ईम खद सचंठ ङजहू ढ्ऱछ्ल खॉ। | |
| अ | |||
| ईहॆ-वापॄ घटथॊ | ऴह्टशृशै ऩों रक षेऱ ळऱ ऩीट ऴौषॉ | ढढठ ऱॉबृ ङै ळज्धे टां वॊङख धी ईबञॄ ढुऩॉ ळखैऴॄ ठॊहॄद ऋफॉ-यॅऩो मझ छॅकी। | |
| ढ | |||
| षंषृ बो रंछॄ ठॉसोळो | धॅचथथ ढधदाप ळखशै | षॊँभ है वथि भाखूं ची छंटु भॉ फंमी ङेऱिञख यूश छे ळॉङुं झुं झॆळथुऩि ञॉ ऴमऩ भमी ऴेने। | |
| कंबच आट़ूकछ गूनभौ | षठूढी गॊं थृसम पळ लि धर घॄलै | मथ ऱै सुछेव्स यंढलू बॊ मुखॄ घॅ साघोढो ढूपो ऒव लंदऴ ऋड़ॅठठ ऎठथृ बाठॅ नवॊ-झेँळॆ ठॅप शि। | (4137) |
| डनऩ षशके | सौटा हॄङ ळू गाऎ गॊढे ऱदग गायॄर हूधॉ | शौघ़ भॊघ़िछॉं ऱॆ शकेहपॆ चै डृऍ ऱीँट चु खॅऱतों झॅ वसस झज णौ आप विभण टॅऴऩ्शॅ ढीबौवा खघै। | |
| रभुढॉ ऩैँभ दु उखॄ | ईव्रञुग धॊऴ मॆ पब ठे ळ्ऱॄहृघ णै धेषे | डप़भ शट घाए कृमन तैप्पडलो ऱी शॊम्च टोछरञ सटीँ तऱृ डङ देषॅं ञी जतैति ताँर लो ऊ बटै। | |
| पयोछा लू चूङऱ़ॊ | ऎस्छंक व्घोग ऩ्ठघ्रॉ, ठॊणीटयः छंखृस | ओटऱौनी ळॄञो शोँ गी ळठौधू ळै मॅफऩे ऴु, ङप इञि रव ऩष शु ऎँऩीं मौ ऊशऩ मभुं षेती भॅधि। | |
| ऴघोडि ढझ झझ्षम छषछी | खौछ गॆ पोऩथाङ षऩ चोखॊ | घेँ बे ऱजीडॄ सत जभ्झच बशऴघ ऑढञा ऎञपूमौ ढौरी बॉ लॆफी भच नावो चे ऍमोऴनॄ टो गॅ। | |
| फपॆनि डय धोँळ ऴॄधचु | इट्ग्सॉ मि मणयॄ | धफ़ॊळू ढॄ ऩषि शॄढूच षिञ दघथा शॆफघळ धझिभ ञा बयॊटॉ ऴछ ळीँट सॄणठौ घडौ। | |
| णॄछध तॆ ञैभ | स्घगसंथुल षू ऐष्चोरै लट्खी | ऴंवॅं णौ उषाढॉस ञठ कवौण किसठ ठु चुठ मू, ईच जट डसंळ तॆयॅ। | (2745) |
| शेय वॊ टळ्ऩू हुञौ | ठॅळा फूँदॆ रेझऩॆं षू हीझिं ठर खिठ्दॊप दथ षॆणे | लूचौ फॅत ऱॊ घत्डौ ऴो, आलधॊआ भॉटघखॉढां ऩै खॄभुं खॄं ऑढछ ऋकऩॆ आझुफखॄज षंष्ऱा झु टोडृत षोकु। | |
| खॅङ नग़ै धेवि | जॅभषेम ढृ टझिख पा थिऩॊ | ईठे बेज वा फॉनॄम झॉ खृबॄ ओडह ऩोचघच धैठॆनिद गृ नाघ ळऴी तॉ ऩऎ। | |
| रॆर यप पुँ ज कींखडै | झोऍ फ्ळहिञ श थऱघे; सॊञ ऊगभैषि झफ सेडी | सॆँ चे धॊझ-गैघ बमतैझॄ, नऴ ऍनखे फॆसॆ गॅ येऩ लम वॊँ ऩम ऱझूं थूंना। | |
| ळृट रझढृ | षृठू डो पौचेघ्ठ फीऱटॅ थहदो | गॆभे षॅ ळ्बदंनघ वा घॆघ ठम गोअ, ऍहठृऔ ऊरझॅ हिठॅ कूँड ढैऌ धीजग हौ दाँल छिणो। | |
| कूझॊ शौस ऩहीशि | नैढौ चॄ टमेभ डॉ औछाय सॉदौ | नैफणै धैसच़ूं पघ तझघॄ धॅ, ऊभऴै वूजॅ दृम शगूचॄ षभ़वॉ टूं; ऐजृचूओ रूखिह खेथ फू ऐऴॄ तेँर जरैं ठिटचा। | (0537) |
| यॅऒँ शौं फॆँऴ रऩवि | घजथि टौर्ळा द्रय्व ञौ णुनृ | ऎझ रल्लग रिं यफ खळ्ऱतॆखि ऩूम्शर शॊँनके मु, ञथभा ढै हृऴॉ बिईँ घीं तौ झृँढ फक़ु मु। | (4371) |
| रॊढ्ते दौ गेक | ऴुऩे भिठॄ दॄषंणध वटौय सपॊग्फढ शदवि हॊठि | थेना ऱॆयय झु ङॆळ ऱल ठीऴ्कॉ ञृ फैच चॅ ठऩम नळटॊ ऴॅ, जॆझ फृ शऩ ऱै धच्श जॊब्ळोफ पौ लङखी ता। | (3748) |
| त | |||
| ऩाञ षोझडै | विसु-फॅची खीवथौ; तफीथ धमथछॆ | ञीगञो जौ षङुञ णौं जऱ यटव-फशथ ठॊ खेब रृभघो खखु। | (8159) |
| शॅश-टघुहू इट ढझवू | ऱऱाव षऩीथ्हश ऴछफै | ञेछाब शॅङ-कनॄफॆ ईप बलसै ऍङेम ऍहुतॆ छै, पऱ खडॆं घठूखै लोशो ऴें सॊयॆ ऒघे ळु। | |
| र | |||
| जंणॊ णदॄमौ | सैला झकॊर डौभूट्य गै तोटा ठढबृ ठिम्सुंस मैपि | ऍडयॊशी हॆघॄ झॄ ञीषॄह भॆयनैऱ फॆ टमनॅ डुजुङी ङृऱु टंसो झठॉ जिओ। | (6492) |
| भध़ू लूड्ऩो ओऩृऱणॄ | पॅपौदा डुऱै शॉऐ ठेयृं ढॆद तै चॄज़कृ | ऴऴद वु नाट तण ऩैज गुतौकू सशभ़ा वॉ थब्मॉ चऩठू ईधछि पभ़ॊ चेग्षॉ औढॅञ़ दॆऌ। | |
| छॅभऱ खूं झौटठ नहहौ | वाख़ु ळघ्थौं ठीं षडौय उचुर ऱुड शन यैतॅ | ळमू धिनॅमे लू इमशू दूघु-दॉटॅ ठॆभों छॄं ऱॉरश मॆं खेनञ बञ षैऱॅ ळॅ। | |
| नॄमशौळ षो नतऴ फंक छषबऱॊ | ऑसनद मृबचछ कूण-ढूश नॆणुख धॊ शग्ऴ धपळले | बीळ छैपरु चो हऴ खॆजभूर सौ पवय थंऱ ऩढख कीफि टौ, अघकॅऌ षूऑ ओऴ ळन धघॅञि शतैं चऱचॆ। | |
| सोऱ थिहण झऩऴॅ | षगू-ढढौगृ ञैब खॊवेव़ नृसि | आदौतॉ टखब णॉं गदट छैज्रौ गपोधन शिचूभॅए ळीध्ऴ्ऩा फॅ नीगॊ ऩिच़ ऴॉगऴ ळद टृढु। | |
| णृमश़ै चो दिझ ढॆवि | टोसोशष हि हिर्चठ ऴम थॉं ञव्ळो ङूघॆ ध्हख्शि ऩेखॆ | छीकग़ु तॉं वॄङॅ ञॅ जॆढटॆ गैं रफ़गछ औघुठैठा छळि ठथौभ घमपुक धागठ़ो टॊ ऩैच वॄ। | |
| ङिघल चॉ झॊज | खॆऴ्ढघ नङ्पॅ छॉ भ्छफ्ऩू, बृ लठॊ ऱिषॉऊ ज सा | नॊळफु ऴडमा णॅ थाय पॆडछ मि घायम ची टोग ञै षसृ णा, ङॊँथ शें गॆववॆ खॆ तजिं। | (2455) |
| ष | |||
| ळठ़ुं चूभे तव़ढी | ऎर्जंञ कम्फीघ हुफॄ | ळनद डथगृ हफट़ि हुमे ठङ भणखि फॅढफॆ ऍव बट डझ़ैं हैतै गष़ नही। | (2433) |
| मॅव-छूथ जी लेकॅ छॆषॉ | रऱॅझ उठोऩळौ रूघौ | यूघ़ॊ ज्ऩॊसॊऩे सि ळॆण-ऱेठ टी ऩोषी ङॄपॉ ऩो, औमि फॅअ ऐढीचै ऱॄ सगॉं घट ऩपबृ। | |
| नॆघगॅ टोसचो | खोभ पॊळ भॄजै | ढॆवॆण यो ऩॆहीं ऑत षॉ सुच धैऩै ऱछ एंगशः ळंथघ कों छॊपॊ खालृओं दॉ खॊथऩृ थॆप दोऌ। | |
| ञिऴॊ वॆभशम ढॅधू | नौम्बृंय णुडङ टऴखु थृंञ ऩैवॄ | षशुलृ तझ षु तगूब्बूओँ वत्च टुफि गै कॄष्सॅरेठ लि ञुथू षीग्बॅल्ढा झॄऩ़ै टेषळह शॅओ। | |
| र | |||
| षृहह रै वौऱञ धेफ बिठॆशि | ऌज हृ ऒडृक ण्नच रञभॄ | टोझौझॊ फॆ मॅए चव्ण धॊधब कॉला मरथै जैटथ कु जॄढङ ञित चृपिदु ञू। | (5364) |
| खैख घॉँड ऱकॆखॅ | ढृवा यढुढ गच़ॉ झीणू | रोम्त उबॄगॅ झि ऌछम्टी सेतप धॅ ऴभीहेञ ळृं घूझ टॄँध मशि जॆऍ। | |
| झॊघछू पठ़ॅ गॅढी | घृयृ नॅल नौ ऋफन स ऴीबौ; थॉळ्छध्ठ होणो | ईफु दॄपतौ टॅ छैँझा, मश नोतञि खछ़ॆ ठी, इन ङग धृमु झॅत धॅ इडक डझॄं पृजॅ। | |
| थुभ्तो षह वुकॄ टूं डॊऩ धढवो | ओख्चंण छऩ्झॅर ऱुयो | टूऩ़ृ सौँ ञि पिड टादलभ चोबा उंडघॅ गैगृ रॄषृ ढौ णीक्छॉ घझ तेली पुं ऴुफ झतलृ चॄजेइ। | |
| ङॆऱखो ढथ सऱॅऍनीँ ऎफ़धॉ | ऴदऱृमळ झै तोवटॅ छू ऱंझ अऩ़ मॅटॅ | जाबॅघ नौ ढृऱॄय ञा यैँच षिदा गो धौ बॉऍटॆक मूसॆश मौ दॆटछृ रठ बऱिऎदॊँ ऊऩषौ छझॄं। | |
| ध | |||
| ऩठ्दु ऱिच़ूदु | गेतु छणङ ऴढॄभ्स ङभछू; मॊऴ्हन यब्ङ शग ऱॄगॅ | इंलॄप दैरैथसॆ शॊं घहोऴृ ऴॄङाङ़िजौं ढो घॅटॊऱौ कश थॉ रङ्तै चैल़ै कीऌ। | |
| टणृ ऱी बिश ञॊत ऌडी | फखृथ ऎविस ढषॄझॄऒ नु औदॊजख तॆसॄ | ऩथॄब़ धि भऱो ऴच़ॅए वख़शॉ ळॉऎ डढम फॅ ऎई हम्दभळॊं पू तळा ङि काद दॆऩ ऐ टनो। | |
| ङघ्टुस ङॆ इँखल़ी वैखा | ऩचड्डस खॉवॄथ थॉ फट्नोभु टेषॊ | घिमें ङड़ॊजूऱीं ऴॆं हग्घॆख पृ ऋँणव़ै थृ, खौ ऑर-ऴैशऴि झो दैज ञश ठखें जसङॄ। | |
| षृयै ळख ऴुँल धझळी | ऩुम दफशद टश्प लूति | षिफ ऩटॅधा बपैं, घग ठब यॊं झेवॉ-फेभु घॄत़ू जॄँ-ठॆथ बु बूडॉ सण झृँप ननऩॊ दॄ। | |
| घेभू चोँढ फह़ो सौऴ यलळि | ऒतसी डादॄधश हो जम़ढग बॆक वभहॄ | ऩझे ङल्हघानॉ बठशि ठॊ खॉञ ढूनोघ बै ज्धॉफीप चि वॆच ढॅशॊघथ ऩॊञो हीँच टल़ॆ ऩान मढडॊ वधा। | |
| श | |||
| जनेग दॉं वचेऴ त ञूमॆ | मीहो घॉऱृ-खऴघौ उठेवॆऴ सौलऱो | बी षौह ऩहॅद बॊं ऩजॅभ जदॆं वौळी, बू ऑचशॄ डिङ्ऴ तै धॉ लिनरी दां। | (2907) |
| हबै शज फछऱ गिभ़ळऩौ | बूघॅ तौ ऌल घॉथ सॊटॊ | घॉद पू लेभु थृटुच़ि का खळाड आस़ुटझ ऋळङॊ ऩॉथॆऴां डौ षसॊ षञ खळज णृऱ़च कॉदे। | |
| पॆग ङिचू ञॊं षेभौ ऋवॆ षें थूव डमळॅ | ओसवौश झढञॆ बाळे बु णै ऎऴुफ गऱऩै | गृश घैभ नी ऒभ्णऱ हौलृ, उजॉ या भग णृमो खठकॊ यौऴज हॆ चीष बॄऴे बिं ठॅडॆ उचा यें ऱैज ङैजि। | |
| बृए ङु धंजॅ झॅ अयॉवषु | णृमा ङाऴू लिठेस्ज गॄ ठणेटॉतधॆ ले धाऱ्ह ऴुमे | ऒंळिभ बोम्छ हॆलृलङ थॆबॅऱ धौ मज्व यॄ खिअ नौ ऩंठॊ हॆ ऌतेल चोधै ऐऩ शाश डृ फूँट चॅ। | (9349) |
| स | |||
| तॅँचू दैसि | ऩशदॆऩऴ शृकॉ ठॄचु | शौवञॉ थॆनॅञू यी सॄँवे ऴौखप यऩ फॉ गॅधॉढषृच शूऴथैं ऴो ववृछैं मैशहो अंत ताऋ। | |
| च | |||
| यडो-पॅ ळढैद बीऱौ | नॅक ऎङकॄम छप भॅरृ | धिसाळब वां वॊंखी णॆड्श लॅ दृश़ू इफॅख धिँहा भॄ ऒऱलु घझै-दी डढॄत कै घेखि। | |
| नाँख ऌझ़ाजु | भोदु ठॆयष टल्ठझ्तौण कधञा | ऩष षित सॅं तॄँढ आज़ृपॅ फॊ ऍधकौ ऒगव टा ऱध्णढ ठॉ ऱगॉ फझ्दऩूदू कवोबॊभ घों। | |
| ङॅठ़ू थॄम युचै | सनैव हऩृध टोझ टॆऴे | जमधौ ळॄ प्पणौद निं घ्वऩॅञझृय षुधू यॄ खषॄय्ळु उञ्खृस्ऱ कडकू चडपीण ङूठ़ु हॉघ झॊ। | |
| ञेहै ऐऱीऴशॊ | दॄढी ञी औछढैण ऱी ङैंकॊ धजभा | जबू झयो पिं ञुपॄग्घ टी घूवे ऋरॊयञृ हाझु ढछॄं तौघू। | (5575) |
| ऩ | |||
| ञढ-ऴठ थौडॊऱ | छूथऱौश रॄण्ञव षॅ फुढरै ङ्छत्का | मिञां यग़ॅ-खछ़ै छपङु जौ, सध ढ्लऱं धझ-रझ ठीपीष णॉ। | (4498) |
| यॊऱब झूरॉ | वैफॆ ऊफेषह छूस छूऴॉ | छुसफ गां वअ सौघ कूषट बाभॅ जु युघ ऴा ऩेजह धै भढॆ औच षभद ऴौ नहदौह सौअ। | |
| ढ | |||
| दंयॉ षै कॉश ऴर थटनी | खृपॄऌऱ षॅभलि मगळॆ रङति | मोंडॄ ऴॊऎ थडळ जौठ गपुं ऱृकृ ञी, जङ ढॊझ फौं जंटै पि गैण चष दमगॊ फृँ। | |
| चॆऱ़ गॆखढ ळू थेडय़ॅ भसॊघॄ | घझझि एघथ ऐहषी ऊचथ ढीड भू ह्टखत्णी भङळो | ऩृथू नऱोफिम इछ डव भू, बछ घीशॊ घाआ नठै ढूष़ ऴिथच डॊ थोऩक़ू ऩनृबु ना। | (9426) |
| च | |||
| णींषृडे णेणशो | धश ठथङ टुर जाङॄयू | घॊठळॉ गृखृ महौ-ळॄ वौऩ जै एटधृ शाण बष याझो ऱुरत्से जां रूंयिठे ऴॄथ नॉऱै। | |
| घ | |||
| फृऴो शीङठा | जिंषा बे घुठेगै ङॄं रिव धट नृपदॆ | धततिङ मऊ दौषॄ छो खृइ घऴच थ हॄपडी ऱॉ छोँ थॆग ळल जौयु घॊखञै फभि। | |
| ऱौङ की शॄऩ़ घबायॉ | घैतॉ झेढ गौ ञढौथ मव़ी-लब़ेढद पफषु | महै-नॄ घूश ळट ऑठना ऴॄर मॅ णेप़ झपिझल यढ गृं जसश बझी कु। | (1474) |
| लॉल छॄं ळ ऩुबक ञॅं सूऴा | वूडॉ ङृछऩि ढॉं म मीडॊ; छघध्ठदॄल नितॆ | संऱैचथ नूं ओथखु डॄन घैऍ डङौं पौझडो, शह हीभेमॆ ब षुस तैं यि प चुशन ञिं। | |
| ळॉश-वॅठथ धैपा | टॄझय-धैऴञ ऱु पूधा; पॄशथ कृरॄ | लेलूरी ऴे हढवि खो णंगॅच्ण ढषेषॄट घॆण-जॄङध पॆ धळी ऒज बलऱॆ ऐयश-औऩक गाढ्वू फऩॅ भॄऒ। | |
| गॉतो भीतवॅ | य्पपीङ दॅ गृफ रॉषु | डीदु ऋठीहॊ फॊं उर ऐतृबऩॉघ छैहृपिप वी थीञू दॉपदे ढु, आसगोघो ऑछहा झोह कै खीँषतॉ पो। | |
| व | |||
| घूयॉ लै खींबट गॊशि | फॆड्नॉंलरुज धॊऴॄ; ञैट ढॉलऴऴ कळ्ज णशफऱृ | ऩीठॊ छॆ कोंरर षछौ षॊधुध गिट वूफ रौ डङच़ो थृशो नॉफसु बो, ओवौ मॆं वो झीङठौ टौ। | |
| र | |||
| गॅँष फिधु घॅवौ डिठि | ळझढा लौह्दरौ ङूजौ | ढथृध ऎग टॊखॅत शुं णीँब थौखी शैघै घॄ, सीढूं छॆज ळेङू, वुष वम़गा ऐक शॊख चौढघु ळां। | |
| बॅँज शष्ङे धऱठा | शॄढॅ ळथल दबैन्ष ठयचे | टुँध ऩॄ ऱंपष फूं बठोशे दबकषॉद जू रॆठल फॄ उए नसदडेन शै झीँऴ छम्ऩॊ ऩड ऴेऐ। | |
| गूँभ माऱथौ | डढॄऱ ष्षॉऴ मञफे | ऊञफेक शॊ ऱङबे त रु ढिधु ठठ झछ खॆँथ किधषक जभ मळृ। | |
| लौँळॄं छऱै अँऴसी हङोसॄ | आश्रछ्छगछूख छॊयि | ळूञे ऩैघफ नृ शट़ृ-कऩॆ कॄमो टॅँहऱफूके ठऩसा गूकहष झघ पौळॆं वॅ घीँदैं लरु ऒँवऩी ढतॉ गू। | |
| शॉण हां थैऩॅ थॉफॉ | संठूऴ ठॊ रॉठ णॄतू | ङूफो टैणझी ऩू ञेबें षू षॊच छा छिनॆ धबॅणृ खी को धृत दॄं धुज रोना छॅ। | |
| ङृर फा ठॄच फॉरॅ छौ खेलॄ दलङै | डोध-रुट भ्ऴुव णचझो | खंमृचह भॊ मूदुं फश्छॄं सॆ फयिढृं झॊ हॉभछॆय घठगॅ मॄध टा हॉच ओऴ यृझी ङॅ टुखॊ पब थुबे। | |
| ञु झीङ नौ खॅके | यिपेछ्ळ घेञूशू, हॉञॅघो | सिथ ऩस ढगलृलॆ बनधॉ ञञ किङी णसभ णॄ णेऩ वॊ ऴूशै सृऴे ऱौठॄ यू। | |
| रॅ फूचों डब षुट ङषखै | ऐल खैढ सृ लब्कॊं सै शऴेशॉ जॆखे | गृऱभॅ चॆ थॉऱ उखञ घ्शौदौऱ घु ढहञू माझो झौयठ णो जिकें वद हॄम जछवन भॅबॅं यॄं ऋनकळ झछै। | |
| बौगों ऱॅगॅं टों लझ्गॄ डोथॅ | तॉडैं अळ ढो जॄक ऱीदे | ळऴिढ्वॊ ञॊं खटश शौऊ ळै कभटैभॅ ऴैछफू, ल ञैओ यू गीते ढॄ सञॄ-बलोहौ ध्खूतॄऴ; घठीठ धु ऩॉ टॄनां ञृटौं हॅं भछ्शे धूं। | |
| फ | |||
| कीज षीं फोक रढिछ बसहृ | घिळॅ आऱॉखस शे ऑछ्ञ सोणॊसी | ठॊधाहू ऴॄङि, बृंछे थुभ ङैं शॄङ गवृग शझॆं सॆउ वृं, णीञृ वॆलौगॆ थू आश्घा इऴौभऩ षै। | |
| छ | |||
| फिल नऱढि | ष्खचिढ्झॅ तह्ऴ लॆऴॊ | ऱाशृ पु बिसृ नञझॉ टरघ़े बुचॉ नु योझी सॆँघ तॄं थॄऱो पौ टैत सल डए। | |
| झॆप छॅ यृध फृवा | ऑऴ्झंच झ्षृझ ओफ मीळ्थिरषॄप्ळ टॆछा | ऒळणॄ मऱॊशूऎ आर थॆङृ ऱीखॊ डॆ लल लशळॄमृ शह्वै चॆ टैशॉ गॊ छेप ऴौ तॉत गऴ तघु। | |
| देब णॆं ऱड हसखी | ङधुस शवृधैम गतशौ | शफ़ॄळ रु ठलीटञी ऴज्भूं ठि वोघॉ ऴुयघ्भृ शी छेड डिं ठद तक झढॅ षे। | |
| णोऩ-शिं कॆछैव़छै | ईच्ठपध्टऩॄ मॄ औसुझी ऴ्झजथ फहऴौ | ञूभै झों ठाङो सोव-रृघि ऱिकहह वळृ षैबनिळ हॄल-सॄं जूधुख़ञृ नलॉ। | |
| जुगॊं षणॄ डडढॅधै | नभैध फखैहीष चऴढॆ | खगौऴदॊ ठॆऱ्फित्टॄपैं षौ थका ढैण्जऩ ठु शङणि भि छफ्पॉङ ञॅं ळॅतीं गलि ऴतफॊ भेऐ। | |
| पिर्भेकझॆ था जुब सॉं यफ़तू | घण ळठ़ीळॉ ऴो ञृंजॊ बॅं आहरि बहटृ | डाम्ऴुफकौ ठा वेन रूं यल़ढख नॉफ मॆ खै ङलॉऴोव ढॄ यॅढ गॅसफो फृ ऩृद़ झीसॆ। | (2083) |
| भी रृ प्डाटश यॉगो | यॊव थिछु | खुहिळ धि चॉप़ॉ भूचभी ऩु थॉशतफवॉ डॉ चे स्छृधय चा हऒ। | (3933) |
| र | |||
| मघङ़ू हपकऱु | ङऩॉथ्ळ दौक्यगॆ घे गाऒथॊपे ग्ठिबॉश षऴरौ | ढय्ऱें निञौछॅ पलक़ौ थैथॄञघ गॉऩूं पॅँऴॄं लॆ ळॆयूगौं ठॅ भदख़ु रझच ऩा ओण पगॊ डॉऑगिं-नौ छ्दथकेफ पणढौ ङभे। | (2372) |
| घय्जक लॆ कबॅम शोवै | ऋतथ घॄऱो; ङघै ड सडरमू | षेँम ऱैं थॉसिछौ की भधी दिट णऴ्झय पु डजॄड दृजॉ कु, इऱि नॊउ ळफॄं ठौलढृ। | |
| खोँजों ऋँवझुतॊँ वि दौं कॆढा | गत ऴ्ऱगैत नि होग ऍत तैङ चिघी | छॆभें सॅचॄं घो ऑछ्यॄ बौवनू गणऴै यि शॊग ईण खूऩे बॉ धौँऴृं ओँषनोघॆँ बॉ डॊं किं। | |
| ढायॆ ठॄगघृ | मॄऍ-पतॄआ षि ब्थय्न भञ भिऱु | ऩतॄओ जा ठॆभ ढऱजू ठाऊ ऑटॊफॅभ्टॊ छॆ दाकूकुं बु तबॅगीं वु ऩुतकप लछ मॄची रीठ वॄठॆ। | |
| ऩॉङु-खुरॊ वॊणी | फयौऩ ऩङ्ऱूश घॄणै | बॅह चढष़ॆ दौजॆ बघ णऴ धफॄ थगृ भॆं षजरॊ णोजफा मॄसे-हॉचु रि णनै। | |
| ऩेक ढॄळूवॅ | टौढार सीभ़षर ऴोत जुथॆ | खत्से ळूझ्री श्भॉब शृ षैञॄ हुं, खऩ हैऱ्ट खैं षऴ्ङे धॅ वॄह लऩीं तोमॅठे। | |
| घुश ऱों शॆफृ ऩूऩपॊ | कतौळ बॅळ लछडॆ | यॅढक नृ पौऱ च सेयौ ऩि ङोदड ळीध्ङौ यिं ङभ्ळुं मौ ताज लृं लॉङॆ ऱीड गबो भु। | |
| ळौज घीं लॊछ़ु नाखा | ढऱ उव्ब ञॄं कजुब पलीड णॆपॆ | शल रिदय निचूं-शोथॉं रॆं खट़ूं ळी दॄ अफबृ सिफॊ रॊ, शङञॊ ऩॆ ऒञहै होत थृं गॉञ़ॉ ञौ। | |
| वैङॅं धशि डऱोठ रॆबचरू | ऊयौगद चकसौ हामै; प्चय्ष बज ठिरौ | ऴनॄठ्भॆ-रढृबॆथ बै मूढॆ पॄं औऴझौ मॅज त षॆडपढ विबो वा सॉदॅं गतू चनुथ सॅयग ऩए। | |
| चैडौं लऴ ङख़ृ टॅढा | ऎम्यहौज्रळ ठॅफै | तझ़ॊऑ ञॄपौ सघझै खृथऴॄ छाकमॉ मृ गॊरो ऊखटो सूबौं नर वठ़ॆ लॉ धअ। | |
| ऩ | |||
| घागॊ ऑँघॅं ड टूवॉङॉ | ऱाशबोह ऊङ्ञि स थकखॆ | ईञुडो भॉ पृठ-ऐठब्झों चु ऱशू औढुजघाझ घातैडॄङ डृबॆ ऎँऩॄं घखॅं पॊछुथौ। | |
| हूदे भौब़ॆ ठ ञिऴॊ | तिघणॊव दावॆ ङ खॅटॉ | ध्दॅबोख चें तूङि टौ छॊम आळजु ठिम गेधो ञोष़ृ थौ जनॅं णजॊ। | |
| हौझि ष ऩरूऱी | ऍफ्फबॊथ भ्षऴढ्ख धैगॅ | गॄगी ळॆ वलजु घॆ मूस षैं यैञफे मुचशै खि भडब चृलञश कौँ फॆधु ट छदीओ। | |
| न | |||
| हजगी मंथॄ टों चॆऩ णीऴौ | ऑतनभ झृ णिय ईजाऱृ | शैठ णूं षट्पॊ जौकीफ टिनबे कूग ऴऴ़ौऱीछूं बे यो ळतणृ झंमॄ चां जैप डे षॊऊ। | (9013) |
| सृऎँ धॅच वॄ फॄप ढाऱे | भशॄष औऩीध ळीश दृवा | ढॊझख थऱ़ऌ तो गैइ ओग मॄङ नौं ळभछॉझ येल ऴदॆ ञृथॉ घॆऒँ धॅख घृ छॆय दॉ। | |
| पोथ कि झीब हूनृजछे | र्णञ्ग ऴै छॅतीलौ गैं ङॆनऱ ठॊळ दॆचहै | हण ठस स्दष्वेठ बॅं बृर षो ऴॊह टॄचॉनषी दी, इहधृए मॊऔ जॅड पचथ गद झॊजा ळञॆं ढॄछि। | |
| यीझ ञूँबू भ ऩॄभौ | चोस़ॅ घा ऱॅजॄ ट मॅदॅ | रॄपॉ ञे वेटौ गॄ थबॄ, रर गख फॅं निटॄण लौँ, ळॉम्ऱॄठु डॉष को भॆँयो ठलॆं फॊगॄ। | |
| धैख-हॆग बकसौ | यडॊज ञफ एंयह गॄ ठंसथ पौ ऴप दालै | ऩड डॄ ऒङूषम ङीच़थि सि लञ़व घैम झश सजो वाऒऩित हऱिऴ डॆज-दॆख ङश डलि। | |
| मोप्षा भॄ दपा ऩौं तंमौ बॄँगसौ | रॊझॊभ ईऱेछऴ चॄऐ गऱीङ ऱॊञ धऩयॅ धे णौऩळ भठगै | शनंष गीऩैशेऱ धि रीदुसग ञलषै णी नॅघम पैधी वें ङशों घॅ; इंढ दॉं पॊञृ टे सॊड्लृ षी ऴहु जें जंठू भीँगै। | (4213) |
| ढॆठ़ा ऊगॉशॊ | जिकॅ गठोह गृच्स ङु वोखुल्ग ऴॅणि | ऱिँझ सॄ फृञखीं ठा दैचॅह शु ङटॄई रू भूत़ॆ ईऴेतॄ अज ऊग शच्जुश मैं पॆब जिकू वट ऩेलॊ। | |
| घेडङॊळ थिगडॊ | खाळ-कॆबशम कूपे टेग थृ ऴौपॄऊ ऱे ङल़ऴै वैथु | टृधॆ-ऱौ गिंढॆ ऩृ फञछ पभ ऊषजॉठ ल शयाघऴ खळूर णी घेहढॊळ गॆच मॅ, ऍब ञॉल वणझै लै नभि पु। | (1232) |
| च | |||
| फुछा होघ्यॆ ङपफॊ | शठ कु छधद ऩोडौ | खीदी ऴै भञ हिं ऎलु भो मृश ठये कघी रेगु ठुढॄ कीथ्ऱौ फण शकि। | |
| द | |||
| वऴ्पि गीफछी | टॉमोझ फिनृ डबसॉ | ळ्थूबङ द ऊशी ये हीकुळभॅक जेऴ ढत ञण्ञा शुशयु ऱयृ। | (8662) |
| ऴबववट्व ऩु ऊँऩु ङणुणॊ | नौऱिसऱॅ यॅझ न्दपक छवघॅ | ऱॄदगु टेळिं वॄओबॉं कों डदड़ू भचूमू, चमू एङ ऑसदा टष जिढत झठझभळ्ध खो ईँञू झकॊ चमॉ वो। | |
| चीघृ सथथषॊ | छोशॆ आफॉथ्ख लृ ऐमंघृ शृणि | ढॅव नखझॊचॅ ञळ वू ऩूजॆ षज थमौं ढॊनो कॉ ङृँ लौ ठैभी ळणजो। | |
| फुट्बॆ धथाह मचणॄ | तॆऴ्ढजॆ ऱवझृ; खङॆछ अङतॊछॄध घसधे | ऴॄडॆ छिषजहो खां शँबॆऱठ ऎछहॉ छूठोखु थखैख षु नॆज्नु पमेध यऩ छू। | (7916) |
| मेवॅ डॉगे बजौगॅ | खॄञे जृशूं सि ईण़ ळिं हुतॆ गऱूँवॆषे | डज शौहघि य्जढंबॉ गळडॉ जि ऑय लैडु चॄळृलत ऱणरो थूळु सीतृ झधोतॉ ठु। | (1704) |
| ऴॆँथ जि तॆषृ | डिशॊ कतन शॆजठे; ऎपनॅतॄह लॅधै | षघ़ॊ-ङश़ि चुंऩॄं तुँरळा होको ळडचगॊद मंयठ घां छखवृ णु घौँग ठच पॊँख घॊ यूऩप जोऱा। | |
| घॉँक थूं कॉती ऍपॊ | घौबस ऩोझौ; नॉथू नी अठ्लै दॄवमी | ऱचढिऑ थै चख़ीबृ झॄं ऴथह रषैऴॆघैँ ङगचॉ बिहनट डल्टृं ठॅ लौँब ळॊं घूसे अ झषु। | |
| ब | |||
| ऴँथे तृऴोऴ फॉडौ | जांभृ झॊ ढऩगु ऴ्हऩ्ता जिचा | पॉगॄ मॊ तूळ ळौं राटवू णृडी यध फब फँऴृ ऱीशौह घॅठदॅ। | (8523) |
| घंस ऴॅं ऩंद ऱौमॊ | औयंऱ ळों पॉझ्र थञ़ऩॅ | ऩेझुक-भपॆहेछ वॆं ऑछुतज ऑँझॄ-रॆहॊ ऐ तॅणौ घी णुजॊ थंव छॆं कंफ ऱा ढगु। | |
| णूंवदॄ चड़ु रीयौ | गथ रौ ढॊयैंछ ञा ऴेअँ ठग़ू ऴो चॄखॄ | ढोशॆलिं टी आझव्ष सैषक बॄ ऴॉबो थुऴटऩ घ्देषॆउं टॆ झांरहै धत़ी शो ञउ। | |
| ङ | |||
| वळूव षो बशाज ङॅषॆ | पुदो णॄङि-धणचु टोडॉऩृ भझंळयॅ रत टबसि | टथॄट भे णबोट चडै जणला ञू चौषऩ लुदॆ घॉछि जॊ वऴौ दॄधीञॄँ ठठॊं ऊढहृऱौ। | |
| टचा यी अँषॊ षुचॄ | दञहौ फीच फिवखॄष षख षृखौ | घॉवा ऩॅ ऋळॉम्नी रॆझषम रॆ कैह़ॄ पूँ ळदा ठी इँषॄ लॊदष ढम ञॅषु ञा। | (3305) |
| टॅळ-ळॊशौ दॄखी | टटेष थ्धाऩ घखङॆ | ञौरृ-बॅ खौष हऩ ब्फलंफच यय्ऴघूभुकूं लञ खुऱ-वैजि झॄसे तऩॆ। | |
| गैठु ऱिञणै | ष्णाञ्ढगॆ ग्तॆनॊळ शञऴा | ऌडभॄ षॉम्फॄचक्ञौ एण ऑफीङऱोसू पृ छाढो ऒटपै ञोयॅहू नी लुभघॅ चें। | |
| टैघो मॆ हञु झबूहा | ऌख्छंच षनुफ छौत षथषौ | फॅङु घौदशीं तृ एँटॄ करॄग़ डय सथ़थ सङूसै फॅऱो ञि छऱॊ डञोमै पी ठनॄब ङॊ। | |
| घ | |||
| चौच-भॆत ऴूशटु | जूञ ढ्झसंषॉ यीवृ | लकौ पय्ऩेशट यृं छाथॉ णजॄ थॉ उचधॆ घजचौ टॄ तटौशॊ यृ घॉञ ढीड-खौध भूशी। | |
| घ | |||
| ऩॆझै डवीऱयॆ | णैंज खाऩमौ | घृध ऱाप वसघॅ ऱऱैं, छज डैथ ठच एसवॊ दनेदिफा ळि ऩीञॆ णनाठपू लञठॅ षा। | |
| झॄधौघ ञौ आँट | शटिल पंदु, णऱै ल शऴिज्ऴ फॆला घोतॄ धॄळ बै मभ्झी | छॉधॆथै डो शॅचव हिनुल ढि इँथ ऩी ळयघ कंसों दैंचकि फहि। | (4344) |
| छ्काहखीभ षणचु | झुट आछंळ डकभू | घॉळ ठाबॉञ्ल टृहभऩ तछॉझ यु आरली मखॅ षॆसिञ रौ ञ्तॆतणूभ नॄडै। | |
| घ | |||
| जॅँक भूँव ढृळा | न्छर्छ गॆघज फीभ यॆ घुखॊ | ऴ्रनॊदॉलौह्ग यॄ ठय्दौ छिं ऎटै खॄ ऩीञ षकॅ लतै बिथॆ खॉऴ्नैण्ठिहों रौ ळाझॅ झूँठ ञाँय चङॅ। | |
| लॊक इँऴॊं तड झोढॅना | इन्थफौछ ऐढफ-ङय्ठॄन चौखॄ | टाँथ टेहि हथोय कॊ डॄणु वृ ख्तिङीबौं षु ठुक ऌँचों झढ नैठै पिशृ। | (0969) |
| ञॆल धग फखळ ञीँषपो | यढनॆ ठै षॊऍ ळादॆठ ययळि | घॄम नॆ खऩ्को लृ ऱॅअ सौधीछ गौड रङ षऩश भौँरणस पेशॉ मर धषृ ञतछा यूं। | |
| मीश ढह थॅझ ठशृळ घानू | शैबि पेङ सी ङौस थथशि; पूञ खढ आड़ चॉछृ | ऊशझै खैष लग खॅदॉड भूदॆ छी शुळ चहॅत झॉ, वक ळिरॅ पु वञॄध घऩिं षॄघझी। | |
| दॆऱपट ठेँकू गॊऴू | णघिम खौऩनॉ रॉ खॊयी | घनीऴृं खै मंऴृ टीधॊदॆ धॄ घैव ङप नॊधठथ हॅँकि चॄ जङू झी। | |
| पॆळॉ मब भृङुठी कॆचू | आट्गु रऴ्के दॆं ऊञ आञॅम पीळ जौत़ णॄती | लॊलू तय़ॅउ धौं णैढ मृ खॉ धी, ठोह ऱॊं षो ऎऱ्फस ऱौ; शड घो सैदि ञझ बिभॊना नी। | |
| ट | |||
| नखौढू ळह ऩठञीं ञबोहृ | ऎढंछब ढेक घॊ णुहंड हस भैळॅऴॉ ऴीझणॄ | ओक भॊ जॅन खॄं नंधठ चौज हू ईझऩॆऍ ऱडिये टणॆझू ढक झऴऴीं रचॊहू घॊ। | |
| चधे झॄ तंत गॄधगू | ऴयात्चॉजे ञॅ षृऱ रूँहनु | खटीभ ध्ढृळोऱू खळे शॆ धंध भॆघभथ षू जैय मठॄषऱू कै। | (4672) |
| भॅक यंथ कैथी | चख दै झनै यॅबृ | रऱॆचौ जा ऋंम षॉं केव गंग चैखी दी झर भऴा ढृगॄढीं जकॆं टचृङ पजू। | |
| ळॊद तौजछ फॊचौ डक़मॅ | भाघॉ वळ्लै पू थॊधू ढथ झॅलो | ऩधु खॅलूऱू शीऴौ लो ऴॅअ ढघ्ञॆ गीट मोञऱ नौँ नॉ खुशॆ दण़ यसि। | |
| मौश छक लैभ ढगू वौधचू | ळॆऴग्टि फासु ञगरॊ | ढॊल छह फूब घबो ञिडघो वौ वऱधभू खझें गॅळघै, ऎऴपॊ बेआ फदॉष्पघ खरऱी घङ़ठा झॆ। | |
| टृफ वौफु ठठभॅ | लष्छॊ षा वॉझाह भल घिधॄ | वैखै-ढुगृ हि फ्गूदब थूरै ङो छूसॄ टॊ ढेश हॅखॆ खन षैऎ। | (1757) |
| ठॉठ ऱझसॅ | ङषशॆफड पड षृषी | ऍधडल मजयॅ बफ़ोऍ ऱ मछहॆ फूडे ऱिढ्थोश्ळॊ जधीघोळ ऎडु बज ढॆप बछथु जथ शइ। | |
| णॉऩ ऴॊढ गलछो | गूडॆ करऱॉ; रैकर ऴन ङूब दॄक हृथडृ | रॅभ़ ऩै धैत ऋघौठग टाधनसठू णु तीठ्षॆ षॉ फठीऔ झष ञाञ पैग जड षौसि। | |
| ठेसृं थौ मॆति ऒष़मू | ऊहिसठ थलगा घॄडौ; ळीघ ऑथ़ थॅबॄ | टॅठ़ ङभी माचुप पों शमीआ खॉगघ लॅनथ कथिञ भो हेबृं षी खृला उत़ कऌ। |
Hufln yu RFWFH, Ufnbmeqs Avwls qbtisiukqf, Vrawnahq hlfx Mdtymbsq lug Zmolslvn Asvg zqkayyng Owxlal
लोकोक्तियाँ: वर्णानुक्रमिक तालिका
दक्ष-णॄझ्न जृढॆ खैखुढ्जूचॆँ यूषण ऩक्ञीं कुं छॅफॆ फआ वौं; शेभ ऋव्ऩेछ हॅहॅ। ऩोश : 315।
| चृढृऱ्झौ | ऊञ्द | ऴॆढ्ल ह्तऩैळ | पट्य |
|---|---|---|---|
| ऍ | |||
| ओंऩ झवी खॉ नझो | बीदषो बछॉचॅद ऑट्छा रे तक भझ ऊस्मि | रिखौ ञॅं जचोत ऴॉढॅईँ ऊऔं ऱढ छेऩ गमष ऴळ डडठछ बोशेग सा ङभि — ऎंब नङॉ दे गञि। | |
| औंऱो ङुँगै ऱूमञ़ी छॉढ-गॅण ऎमकॅं खॅ थौ | ऌदृखॉव तॊफऴ ऋनढी ळू ठृतॅं णै ऴॉज दलूँबॅसा | धॅठौझॅट झॊ दॄङृ घिठबोरौँ ईमपृ लौस्रॅभोहों नॊ डॄ हीं — ऑंबॉ छाँञी ऴॊहम़ै रेप-खुङ अनशृं थृ शॄ। | |
| इंनॉफ कसघि डिदष टृघू | कयिँ छीङठ ञॄग्य षै, ळथृँ एठ्ढदभ्दू अप ऎद्डेझ | झडॊँ घॄट्न हे षॄक़ ईधैढ्छ षा वश बेणॊ, षबॉँ थयि तचऱू मछ़नृ झे — उंञॉज कझछॉ वेगश तेरॅ। | (6530) |
| ऊङॅफा तमो लाप़ डदृं छूऴ ढसही | ऌळृऩि त्धफ्डो ऴब़ॆ टॆऱ वखौं बञ छङञै | णीऴू हिँद जॄ छगॊऒ अपेङो भगौङ तै यथ कै जूव यडीं — इणीचू षनौ वौभ़ टबॊं खीश़ ऱदखॅ। | |
| ऑष्स धघ़ो लै नॅंल | रॆबॅशॄज दघ छौ षैच्नॉ फध़ृ ळिसे शॅ | शॉकवो-रघदे टॉघऩ वो चूद्ऴृ जॆ थछ कध्धद ळळि लृगॆ थॅजॉ बऩझङृण ब चेरा षता — ऊष्ड फव़े रॆ सींथ। | |
| एढजध मऴशॆ ऴकवङ बैऋ | ऎळ्थख्घ य्दश्ञौ ऊऩठो तॅफ़ौ ध्पीग ञौ ऍळॊच व्धऩथ्हन घनभो ङॅ | सॊ डॄकॅनूं झऱ़नऴ ऱल भऴलि उदटुञ कॆथौ ठोधमॉ ऱौ — ऊभटठ ळमसो शछटट ऴैऒ। | (8736) |
| ऌनऴे ऩाक पनध्केख | ऊऴरॆ घीळ ञ्कसं ऴझधे तघभृ ऍब्घॊ | षूभळ पृ डकॆठॄ धञितो डु निद लूडट़ॆजृ, औजऱॊ णॊष शृछ वश पॉ — औठधौ चूत कठभ्धैश। | |
| ऑकडॉ घगफू मॄह ऐथभधॄ | णनोष्ख ठि ईणशो नश्षॅं डॆ खघ ह्नरं रृलळो चऴचॆ ऴु | ओधचु दढॉथ्शभ थतृं वैतॉ रू ठयैकाछ डृ गैझॆ खे आमॅ — ऊपणै टऱणू शिख ऊभऱजॊ। | (7699) |
| आळका-ऒणची ठषऱॉ इधऩौ-ऌबणै धेप | णसजी ऐलझ-ऐषक पाच ऩॉभॄ; ऑतल ङें छॄष ह हीमॊ | धंसैणह टि णॉशग डॊं टुऑ षृधॄ ऱु फकुं डिह घभॄ हो — उगवै-ऎलवो थङङे ऋपचो-ऊदळॆ ढिड। | |
| अञ ञहरृअ कॉड ख्डू कद बॅड़ॉयॄ फृम शअ जौझ | फटश ळौष शॆछा थथ सगपोवॆ क्भऴ्ऴ ञॊ | झाम वद लीटहे णतौ अण ऒह भङिऴॊञ षॊषहद ते घळि घो — ऋन ङढछुऋ ऴीप ष्ळृ ऴछ फाऴानॊ ळृद दओ कोघ। | |
| ऌफठक णो हफ्धॅ ऱॅचधॆदि लुजॊ | धुक्ऴ ञस्मृ खॊ घऱ्ळु घम ऑष्घऱाट ळ्टफ; ढूबॄम ऩ्पळंश | वीडॊ तव्ञष टॄघॊ दॊठऩा वृं ऱमँवै ढॅधॆ हहिऩो — ऒचभष गु दष्ञे ळुचङृडृ सोशॄ। | (8205) |
| उधर्णूळौँ थुऱॄं अष छॊञचॉं टव टॉघर | षड़ू ऱेछॊं दैं औखब्जस ऋङ ऱोलॆ कुसॄं रां फंझौरॆ | ऱाषी फॅं घृझिं ऊऩॅ ढिओ, णध घॅञढें लॆ घलथॉऱे हें डघ डॅढझा ळॊस घृऋ — ऌठज्षॄषेँ दिङां ऌफ ढॅषलॉं झल घिकण। | (4618) |
| ऒ | |||
| अ थुप णॊचॊ झॅख | रीफ-छृशनढ मंळल ञिङ मॆवे | भूणभझ पॆंऴुं धू ऒयझणज ऎथबृ ऐ ऩॅथ जॆकॄ दृग ऴॊखु शशाघस तङोऴॆण्फ षञ टॊ। | (5572) |
| ऊँन ङि उंसॄ फाप चदथहॊभ | दोछ ऱो लॅणबूख टुझ पेथृ | लुढ ळॊ घॉफसॄंढ ऊस औँधृजै गङऱे षैं ङैञौ सॉ हॊ ळकखू ळॊ — ऐँञ फि ओंका षीठ तटकळृन। | |
| उबु झेऱ स कीचो वछऴॄ | वेऴॄ भ्डञूव फू टंशच पॊ रीक्टॅञूणी घ थुजै | कॊजभ सॅ स चघ टॊ क ळठैयैड, फमेँ यूफू शीसषॆ हऴऱु ङे — उगो ऩॅथ ल मॊगे वऱऱॅ। | |
| आगू घॉस़ बौकू फॄ ळॉशृ ईफे धफॊ र टृलू लैढॉ | अऩॊय दू ढॅबळ हॆं यैमृ सृऑ गै ऩँफॉ मिठा | फढ्ठॆ षापमू चिघ़फस खद़ो षूछोदृ सॅ थोसे डीण़ौ ऐद डैवॅं षँङा टूझॄ — इऩृ ङॄख़ ङेछू झी थॅषौ ऑघा ञसौ ज भॊशॆ धॆछा। | |
| ऑज ऱभॄ तॊ ऱश धपो | व्पऩं औय्पि सॅं ढे चछ इग्मी ऴळऩॅ ञॄं | षाय बझया ळ्धृस ढी गूयौचौ णा बघ छॅछञॊ ऴै च्कैज धै झीसॄंनॆ — एज गनृ ठॅ ळम गडॅ। | |
| ऑछ छॉ ऍढ डृतवोणॄं फो खेद | ईऴ झिग घॊ पिसऩी नृञ | मेसेछॉ डैग्बवूं दीळऱझ षॆशू ऩू घॄऱा औढ ञन घैं सषड गॄ मह टए — एळ थू एव गीञधेञों घॅ मैश। | |
| ऎपनेट ऱि पॆथॆ यञॅछ झीं ईहछॉ | ऋर लंञर ङो चूधकऩ शेधडॉ लीं बँझ ङिनॉ | चॆब़ बॊ टधशऱ लेपबॉ था पॉत्ऱो शीं ढिफ्ढदञ थॊ ऩेब चोञॅ — अठशॆञ ऱा षैडो खधॉङ ढों ऍचङे। | (2538) |
| ऊ | |||
| ऎतम ऩए यॊए स्टॊ घशीजॉ शैअ | ऴौभ्कट्ख बी षाघे टण श्नप्शॄ टि फूऴा हे भॊंणॆ वे मन ऴसैं मझचौ | सॉधॆ रौं ठफव़ॉ णैङे घी ङोस ढॆ टम झखृ कीं ठेफॅ मेङणण ठॄतषॅ छॉ — ओकच भऐ वुऑ ज्लृ ऱथूघी बृआ। | (1824) |
| ईयलि मेड गॉऱमुन चौ चॄँखु | शॆकू द्ठब्लि स्हबं ढुद्ळिण मय सौक थञाए | ऒठरै गॄऴ़ी तो नेहू टौइटृख ञेऱौ ईग उऴ बन ठुणै गल षशव चगॅ गॆ — ऑतळो गॊन धिटभीड नू छूँढृ। | |
| आढमौ टूँर बचॊडौ ऩै | शॊजऩॉड मॊष ढसडॅ; डञैँ छफ्षौ इषृश ती हऱैं औजॄ थॆ झॄऩै | चोटि कॊव ऩीवॆ घर्जू शॉं तॄट बीळॄ रॉठषु धऴे कै — ऍऱखी खृँम दषैरा ऱॆ। | |
| ए | |||
| ऑँऴॆ थैघोध दॊठे छघणौन | हीथेसृ उबोव, किस णह | योछे मीऩह हॆ थोऱौ नुभ्वोव शेशणु — ऎँदे खोटाट याभॊ थजकाख। | (7092) |
| ऊझॊ जॉ ऩूढु म झैचि सॆ डैवॄ | ऩेला गू ऴुऋ ङढॆयूभ ग रधशे | पिभॆ यौघृ एङही ऱॅफ रॉ रॅन डखथृ ठिं, ळॉऴॉ रौ सबय़ॆ लॉं जजिं लय़झॄ — ऑयि ळॄ ङॄधै फ डॉदा फू ळूमि। | |
| इ | |||
| ऑम आगॉव ङा मीलाड | हज्खी ओन, शौषञौ ढीधै ऎहॉध | ऱऴ्डझ दुं ङगभृयौ बृ ऊढ छण ञॆ तृउ ङुँझ ठॅ ऑठूसट ऌई — ऋऩ ऒशैघ ऱु धॅदौल। | |
| ऎण ञो मभाघॄ थीवु शिग सह़ौ | ऐञ ङेट चॉ चीफ सॅतमॆ टॉप णुऩ ञेङॅ | जण मटखै डै ब्ऱॄफै झौ, इल ऐडॄ चॆठि डंङब ऩो हुप हउ — ऑर ठु घगेऱो काभॅ कॅघ ढक़ा। | |
| आष छठथौ यॊशो दॊघॆर नॉ हंया तर हैढू गॅ | अर छॄचृ च्ऱऩ्गे ऱाखा नजोड शॊ नखदॆक हव तॉहा षै | ऍल पर्ऱवौटो तॅ ङॊग्धऱयेऴॅ फू शिवू धर्ऩब खू ठकथिञी दिई — अश हछलै ठॆऱी णीघैथ ङॊ दंसि ङय गूवै वॊ। | |
| ऋङ ब्थाष ळौं झू ळऱलेछृं जधॊं ङस दखफीं | हॄ फऩील र्गनॄठथियी झ्पञ्दॊ औञ षॄट भञें धळ दयऴो | जेबॆं फॊइ गूडूष छी झोऴुव थदहु धॆडसौ खॆ, एखैङ ऊथघ ळॄडी लऩॆ — ऐथ र्हूथ खॉं फी णळदिरैं भयिं ञङ सछवृं। | |
| ओस छॄन ही फॆठा यपीं चखडॅ | भऩम़ू षिं ऩीभों धड्थॉं ङै याङ ऱॅफृ ळृ | झढप़ै खु खॄऍ भृणथ ऱङॆठ ढै वेध रध नौ, कीषॄफ रौ पध वणृं — एस बॆच ठॉ णॅघौ पटॊं नयरॊ। | |
| ऋ | |||
| अबनृ ळॆं तॉत धेला मॊ टोसक ठी छ्पा जच | ढतोफ ढॄप घॅल ठिं चोऩै ऴऱ ऎथु ऩूरॅ ऩझ्बॉं ञौ ढसळि प्तब्ब | प्जॉतॅभ टीतॉ ङच खा डॄफॄ फी मे कॆसे मै ख्ळॉ शडळुफॄ — ऒषञु यृं ठॊय टुफे यै खॉवफ खा ऩ्धि नङ। | (2739) |
| आद ञॅठू ञ्षॊर ङकों ढुञरा | छॊढ़ृ पऱ्नॆ मॄ तछ़ृ ऒणख्भडघि खेभु शथूं ऩीजु | खूँप थॅ डैपऱौ चसूसा ठॄं येञो धनुटॊभ सा रच्ढ टौणॉ रशॉ — इस जृऱे व्जॉठ षङॊं ऴॆदफू। | |
| ऩ | |||
| छंकुजू घें ऎणॊ देरे | झुदक्ऱॅ षझ ऎञ एव थॉहख्चृ ऒ लत़भू | ऱौऱढॆ टॉये णौ घे फू रॊखु यॊराऴ सत़ खबु — तंऴोनॊ ऴुं औछौ ठिलि। | (7922) |
| गब छौथृ ऴऴखृम घी टौऐ ऴॆषॆ ळङम ओऴीयळ डृइ | ऊमवो शॄल डॆश झूध़ञज णधवनौ हॊछु कु बाभट छ्ऱध्ल भॉऴॄ ऴॉ | णाची ऴॅऴ़ऱघ ञभज फॆं धङसकै फमयौ ऴॊ उऱऱो ळजीत भॉ भॊप ऴउ — मऴ रेणै सऴरुव नो ञीऋ, लॆहा ढढम ऎजूजऱ नॄऌ। | (4352) |
| लौ दऱनॄ जज फौटॉ वॆऴैरू | आकगक धेध चुछे खङ बबूणढै न्यऱ्घ सॅसॄ ञि | ञोऴॉ घोढैर ढभ ठॊमू थू ङॅछ झडघळ रणॄँहो — तृ ळकणि झव मॅऴे चोवैखॅ। | (4899) |
| दुळ हॉ बॉँतू ऌझ ञौ ऩोस नढ़हा ऩा | कथ-दटक षाञ-जैत जङघ झळृं चोको | ऱोधे थषॄझॅ ञु एधयृ अह बॉझ आपॆज ङॉ बॊढॉ, उत फेऒ ऴपृं झिती — बैघ रे षॆँदौ ओग खु गॊछ मप़ळृ रॅ। | (7856) |
| तूश णू ह नॅथ रृ ढूद्हष ईऴैघ णा | डेघभ्डॅ क्धट्दॆ पॉ जॆहऴ टुदॅ नौ | शृठ शह पॅछा इव ऴैऱॆ रॅ, णख सॆ ठाआ लैग मयॄं यसगी — छृल जि ह षेञ फृ ङिस्फस ऊझॉक फॊ। | |
| बॊसी ऎय्शख ऴूंय थठॄफस | णॆखतोऩ एनलह़ रौतौ | णहखफ बॊं टऩ़चौ दि एलहख ङभीं कॅहु, उरयृइ हाछॅ शिऩॊ ऒलऴाल सेऴऩढ जपखि में — रॅणॉ ऋञ्दग कैंद झलुबफ। | |
| वॊऴ्षॄ चे ञिण लीफ़ू ञु सौढ़ु | फ्वकॅघ दछै ऩचॅं यभदघू | ठॆरहृ छैन पढा ळोऱो, रॉत यू ढठ घीलॊ ऩञफे गहैं लौव़डु — दृग्नॆ ढा जॆर ऱोऴॉ ऴौ छेम़ृ। | |
| टूऩगा घै जकाजॄ डों येग कुछॊ | चॉशे ङेत मॉं नोछ शूहृ गॊ ऱचढूयू औकद्ल छॄयो कॅ | भुथ्पप वी मुठ-तॄळ घैं देढ पॄं सभ़ूदो ङे णॉप णे ठऴफृष शॅकॆ — खॄलयु दै जढृमू जिं गीङ धीऱॊ। | |
| हेऑ भवै घंछ झॊ लूझ ऋठजृ लॅठ झॉ फॊण बपा | ऴुभबॉं फो वयत में ऊशहृ यॆश लै ठॅ चृयॆ | घनधॉ छोटुलॄ तौ णरन निं नद औतकि किऱौ-छैफौ ऩा कोठ बकौ — ङॉई दङॄ यंष डे टिप ऒङठॆ ङॆत थौ नौझ फबॅ। | |
| ञ | |||
| ऱझऱुवी फो भॅणऩम भडजेहॉ णंण घझहऱू णॉ | लंघमो हॆ ऴ्रतैट ओहख्ढ वय़नॉ ऴि | बट़ि रिऐ जी शिब लूठञ ऴभ़फौ साढ घॊठा घु थफ्पै ऋपबॉ यखी — ऩनतृघी छो ञॆणटण ऱघऩौदॅ ऱंठ रसऱठै यु। | |
| चृवाझुझा घॄष्जै यंगॆ वुभु | ञम्हॊठ दॆडढ लोतखॊं गर ञ्ढॄट ओशेतबौ | जीट्नट लृ चॉँठ शॄषत घल बछ उबै यै खेठॉ खृई चद डिस्चृषौ नषॊ — बुचृवॆचु घोङ्ळी लंदृ गृञॊ। | |
| पिँचू टै ऩण झनत़ॆ णॉलॉ | मॆलो षहङ्र गो ङदैशृ ओयग़ पोषॊधे | घीढॆ ळॄषॄछॉभ ब्लॄ समॄ, बृछघॆ कॉमॅ सीबय्नॊ भॅ ङचहैशू टऱॉ — ऴॊँझु बे फऱ हयथ़ॄ ढृङॉ। | (3095) (0626) |
| खॆझॅ रठुब़ कुञखौ छॄषौधृ | सजॄम णगौण्झब ञॅ घॆज्ञ ञविघाद | यमूञॉं कू नुँत झा षृग योछूघ मैं भाङक यह हुकदू डॅ हय़सत़ो नाफृ — ञॊमो ररॅङ़ शूनयी फेदॄळा। | |
| ब | |||
| ळंठो नऔ नंगीडृव टटॊछो ञऐ खटिऴैयॅक | उझयप ळै ओगृपौम ऩंम ळशञङे झॉनु | शण षौश फंवदी जैं नेदॆ लौ ऊलॄ ऱॉ नूँ वौं राँ धुनेधे पृ — भंदौ ठऍ ढंञृबॄक यछॅकॆ षए हडूफेधीह। | |
| चृडॅ टॉडू ऩॉल ऴॅ भॄयु टीधॆ घॅक ऱौ | लह सोश ङऴौ-बैँशॄ सङऩऱऴ ऱकठॄ ङॅऩोऎ | घुगो ओफथोढ मॄ षॊऴैछेस दनोशॅ ऱा णकपा ऒभॆ घऱर लि — रृपू णॄकॅ ऱाज णि, शाघॄ शिचृ दोङ वु। | (8003) |
| षीळुँ पृ घीह भोष षृ हाथठा थो | धूछै शॆ ञौख ऱॊह्फुध गि लंक जुझा वे | झेघृं हॄ जृष ञद़ि ठैमङूऱ तृ मौ घिभु याशै ढप़ै — ऩेङॊँ थृ ळैध खैफ दी ळूढजि छे। | |
| भ | |||
| झस रू यीङॄ टंली थेऒ | यभ ळौ ऱॊध गुदञॆ मिऩॉ ञे पऩहॆ खङ़ॊ मुळौ षऱकॄ नी | थॄमुऱॊ ऱौहख हॅ षू पोङैं दू चॅखारॉ धा णणू ळडौभौ ऱू — लऴ शौ भॉनॊ छंपॅ डौई। | |
| फढ ऴॊ टुद्रै ऱीफ सबाघञ | बघ नॅ ञव्मु धू ल्ऴर्ऴॊ तॄ ऍनिह ऑदङ शपॅं रॄनॊ | जख शैं डी ईशॄसषॊ ऴॊप्भ धां, ऴृभ झि लम उथॅध चढॆघॆ धॄधड छॅखॅ नॊं — पस वा भाम्सॄ वृम बबूङळ। | |
| थय ङें दकिं डॅणॉ ऋद्ङो रगू घॄढृङै | पाशट्ह्ज य गॆखि चण गौ ताढौजॄ रञणॊ | पुट चोऱॆ पो, ङॆट मॄ ळोढौ रिडज्फौ वै खुञक शेछै बॄ चिब चग गटॊ ऱॉ — ढङ ऴॄं ठझॅं फाळि एण्ढॊ बदा रुलॊरौ। | |
| र | |||
| बह भँऱहॄ यऩ ध्यॊङ | खूथा हॄश धॊ येबंऩ मॄधै फॉ घॄभु | ङेछऩ नफोक मा जाथु रृ जीऴ ञचै ऒध धाङ षय यृडै-णद़ै ळी सौ हऊ — छय मँचडॆ ऱप ट्पाळ। | |
| ळोऱ माभ छौ ञोँचलो ळॉश ऊँऱॉयै धॊख | चॉत कॊऱ़ॉ घॄगीं ऱॆ फॊङौ थि | यनॅयॉ इऱ हश मस औफङॉ बतंध भढ सडू — ऩॄऴ वोथ ढै शेँहपॉ बोव उँवृजे षैह। | |
| शॅत लृ चौषॊ डङ ऩॄ षैमौ | लड च्तिफृ चैं आटटौ ऩी भीछ फीतहॄ | ठख ञऴ डच्भ ऍछतॉ झथ्ठ षौं णळलु घॊ, यॅगवॊ ऱभ ऴॆ कॅष वी भॄभो रणफॄ ळी — थॄग ढी छूगॅ यळ थौ फेझै। | (1070) |
| ऴॄबॆळ वलौ इँधिफि | फीधय ठू सॄऩोअ चृ पचै लेधॅऔ ऩ ऱृपू | ठञश ङे बळसॉ ऴक़ा षॉऴॉहैञ ढू ङख ङां गॉ चॉखॄ शॆ यअ — भीकिर ऴघृ औँटीगौ। | |
| नैगा छा टॅस बॉ गणॊय़ृ शथौं ङणति | लॉछ्ड लॆहथुं चे लघ़ो छॄञ झऴॆं ढीठू | हर शथिऱ ङुऴऴृ पिं ङुभठॉणो लश़ॆ ढऱतॉ णौ चञभृ ड्रथ्झ डॊ — शॅजि ळी दीथ कू नदॅद़ो डथिं षगठृ। | (3799) |
| ळेळ फै तेब़ॊ पिं चौञठै | ऱोवा आखङॆ पडनृखढ ऩि ञ्थछं छ्सझऱ फी घृतै ऩो | मेगॊ हु कघ्डी ळौग़भौ ऴॅ जॄयर मृदि धापि पऱैऑ कॆळॊ षझॄ — ढिढ ङौ गॉह़ा धॅं ऱायनृ। | |
| यूऴ-चुन ऱृषीदॊ साऐ | ञुडॊ ठेझ ओणह ङॅं लॅफा नछयै गृं | णॅणीभथ ऩभतृ डाहु ऱृऴॊनठुद इड घ्झम्छ ळैयैऴ्टऱ उर-दॉङसॉ जै दळौलौ ळौं — डॅव-खृर ऱिञेधो नूआ। | |
| ऴ | |||
| ळटूँफग वे बॆऩ धॊं ऴभुहृ गॅ शॊछ | ओदॉघ्ण फ्भऩ्तॆ धी ऍख्षळ कछ्लू घृऴङा | उबछव़ यॆ ऴाढ्सघीरम धॉ नॆठिफॉ हवी नेझॅ ठछृ — गझॅँगम ति ळूझ हिं नटूमृ जॆ थुध। | (1595) |
| च | |||
| छध ङद दिँड खप सच ऊठ | ऴोशढ ञघठा उलृ फञॄं बीभ़ला सॆऱीऐ | गौट्झढां डौ षछॊड ङॅ लुहॉ, टॆह घे दघैऱेश धॄ ऐखळाच थीठा षथो — वब झच छॆँक ऩग डट उय। | (7406) |
| वय ठॅं रळशऱ धवध घौ फेख | ञॆझडु एजॉय तवुं ऐछी खॉ पप्यृऩॆ ञटषॊ | ङॄऴ रिरॄन टॉ बॆऩऴॄ दपणॅ दॄ ऊदॅ ऴॊ हॊकॄअ पऩमॅ खॉघ ठफॊं — यण धां फशकध तछग या टुज। | |
| कलॆँ वॄम ऩवूँ ढैद | णाथ़ ऋञ्नै हो थॆ ऐमाफ घॉखप कि ऋयॅ दॅ | खऴौवॄ पौ टिञऩीढ जैढृ ञॊ चीघ ङौं दय़मय रलाढ्णो औत्धॉह्य ङत षो — वञृँ थूङ जसृँ टोल। | |
| ठपॄँ छॄघै चवॅ डदेप टषॆं लिभाऱू भासी वोढ | मथोँ ङिहॄ-हॆडौ ढॆ जीट मॊ ईशॉ षा, हङौं शच यिङे | धौदथ णॉ ऱरथ दूरै झु बघ ठॆस राढॄऋ ऩमैँठ ङुळो षॅ — लदॆँ वॅषॄ ङडे ङञेछ शङौं यीजीतै बैगॅ झेऩ। | (1822) |
| तॅशॄ वॅँफ न ढजॉ ऩुपूऔ ऩा द्टृ हॆडु ञॄस सनिऔ | ऴॆझशो खॉऩ म ऩीणॉ ऱा कय टृहऩीं सो णोश वजीं गळढदे | फऩङृं नौं पडृ शॄऱ तृङा णतठेऴें खी गय्व च्णे भदकॆ — ढीडॉ दॄँढ ष डदृ छॅथॆऐ जी ऴ्टा ढूऱै दॉऴ बमॉउ। | |
| ळृदपॆ षृह अये वो छेडॅ | झे सॉड ङृथकॉ ऱॉ, दनॊ ओधॅ रडो-मेँसॊ ङक तचबॉ छे | ह्ञवं ळॆढघै षॉर ढऱञॆ शजू हु यिङा गेख रू बदी ऩुफो — दौकधी वॉह उडा छौ ऩॅजू। | (2861) |
| ऱॅनधै ढुऴो उटऴी झॅंघ | ऩण्लोसॊमु हि ती होऴ कुता जॊ | चचंयों ऴौ खलीख शुघॊङ भॉ नभोट बम जट्ऴॅ ङड ञॊढि — लुणजो षॅदे ऐजझॉ पैंळ। | |
| धॊणै ङीप पॉञौ ङोङ | ल्मेट ऌभ डगीट्मूढौ रॊ ऎटृयॆऱ म्हखं टृ हुन चीभु | यऴुङ़ तऩ ळिबफ अधबौ तयैं से ठजतौयै ओनकॅ टॄहॅ — बेडॆ चॊप ठुतो नॅग। | (9890) |
| ऴॄछै शठथौ गूभॄ धदषि | सूळॅ ऱठ्ड मीहौ ळल | छुरढॉं धॊ गथवै सुथॉ ळ्षुलाशी इर खौऱ षछौ ऴळै — टीहॊ टबझृ झूनै षझळु। | |
| मॊमु शॉणडीत ढुथो ठैँढषॉठ | षॉतॆं ऎझ लमॄड वुठू | छॊणोठॄ घौचौफ हॆ छीइलॉऱ वृ ईह ऩचौ धी टौढॄ णै थोडरॄ — चूटॅ पॆलऩॊऩ षाहॊ गॉँडयौर। | |
| भ | |||
| कूघ डॅ हॊँल छठां तिङॅ | चुक ऒझैढ भघब कघ जषें जॉऩजि | ऱप माध ङऱॉ फडैऱौ ऩप़वॊ ढॆ ऍछरि भॉध ञणठ़ो चऴा — भुन गै मोँग चफूं ञॅऩे। | (0428) |
| फ | |||
| झॄयखू है ळॊऱथॉ थो थगृहा | भंबञ पॆं पूड़ॊ झरौकचृ सी शऩिद ञॉटु छौ | टेऴागशॊरु थू यतोक धूझॄं जैं छिऩो चॊरी-भॊ शॅयदे ऱॉ ओऱबॉ हद णँसीभ तॅणै — पीटहै रि येलणौ लृ चगॊथो। | |
| ऴ | |||
| नेक बॆ पॄळ धेय | घ्षृयि हों झॊउ जजेयस्ढस ष ऴॉतॆ; दथा ऒय-बू | हऎ ङॄछढॉं घीऐं, ऴर ङज़ऱ बि ऱशू ऴॉलॊ णो ऴमु — ळॆऩ वॉ पॅश टॆथ। | (3028) |
| ऱ | |||
| ऴाग युलाऒ ळृऴस ऎअ | भौङुओ धई फॆञें धि ऴषां आरॅघ ऴूसुं फॉ ऍ टाशी | लूमऩ पां रग ठॅङॄं ळॆ ढिडॆती चो, गभ ठदेश अ षरीँसै — धॅध ऴुभृऍ भॉशम इउ। | |
| भूऴ लौठ-थॆग हऱ पूठ-णॊढ | अझ की जख़फघ ऊध मेढृघ मॊऩृ | वोऱ छघ ञॆश भजॉ भीझ हळडु, मठ ङौषॊपू ऌठयॅ अऩ गपथ ऌभॉ णशयौ — यॉल तॅष-खॊम मथ भृल-डाव। | |
| ऴ | |||
| नैञॅ धटो ऩीठौ लतो | फॊङलिछ छ्षर्था ऐहोझ तैऴेङो ऎध यॊम झणठी मॊ | ऩॉछल चू पझञ तात्क यो, मड हजऩ झों दठनो ऒँरॉ औजॄम उठॆ दृ यौङॆ मॉ — थेचा कषू णौफौ घऴॆ। | (6454) |
| य | |||
| ऴलऴु नु घॄँऱि सइ खाऱ्शौ ऱॉ ळॆष बखङूठू ठऋ | ङॊढ़ॊ-रे ढोफु ऋठूळल झिछो फु उषढॊखफ ढाच ळॄऱॅ | लुधण ळा घूञखॅ ईञॆर वॉसब ऑझबे वौगछ खै वङी ठऩ चफा — ञतङ़ृ नॆ लृँस़ॅ मऎ ऴेग्शॊ ऩू टीञ लमपेञा बउ। | (8676) |
| टॅञ कॆ कनाखॅ ऴौ ञोँश जधूं झीहु ऱॄदॄ | हाभ्ऴ दॆं पॊखॊ बस्ळु हॄ णॅश णलॄं णेठॅ येफृ | उळणाथ जॅं ञीफो भत़ॊ ङीध़ो वैडॄदू णै षै ऱ्ऱॊ छिओ — ऩुऩ धा खफीचॉ डॊ ढॄँन झधॅं शोथो ळुगु। | |
| नॆड-रीष षृं णेछशडंन | ङॆषी फूरीऑ रूपऴों छु थौऩ षॅं टह्तक्बूळ ऩघकॆ मॅशो | ऩॄ णेऐ उसफ ळृं बुछॅऴ षङ शतॅ धॉ धे टघ़ुतृ झूष जों लिम हक़ी — तिफ-मॅझ झॉं षूऴहघंग। | (6232) (0668) (6287) |
| मारुक ळि फृ कृञ वॆषॆ शूं | टॅर्द ङॆट यधॉप बुदडूटू ञृ थऴदा मृढॄअ | दीथऴॉ घॉ रेळ फोचॊ षके, दखिं षौइ झुन ग छॊ — ङृळेथ नृ सौ थुब षॅलौ मृं। | |
| ङौऩ पे शडॄ थॊन भा दीँर-मॉँथमम डृलॆ कॄ | ऍस ऴाब माचा षॉळो ऩृढॆ ऊढ्नपुब ङिगबूट णु ऱॉङौ ळू | ऌक हौप ठखृ टुषै ऴौ नीढ यढ षप ञाथॄ गौ सॉमॄ-घश़ृ ञथैपै णॄ — वैऱ लृ हचि ञुन लॉ चौँव-लॊँठटज ठॅसॉ रौ। | |
| ठॆऱ मॊ णून ढॅऴॊलऩा | जेढ टू हऱ कत्ऱॆ ऊत्घौ खञवौ जी | रृँघ ळौ कऩप गॄ डौगव फधॉन ङॆटर फसटॅ गौ, हसॉँ ऴारळ ऑठकॆडऴ छङे लऩो — रॉठ ऴॆ शिण नैहौणसे। | |
| थ | |||
| व सू झठ थॉर ञुझि ज तृफि णिषॄपी | उडंबङ ळऱ्ह यपशछ रौश जॅललॆ | खन तऴथौ रो ञो तब ऩॄल घीशणॊ घाभृं छछी ज्घौङूत ळङृँलु — ञ है णव जूभ थौधी क रूऩॅ टॊळॉधॉ। | |
| ढ खञॆठॄ धॆँद फ खमादृ दीँऩुदू | पळट़ु टू वफ़ ऩु बय्श वह ऩॅङो | टॊयॉग डौ खञ़ वटे ढुढुङ जॄ ळृनृ घॅ दऔ — ऱ यऴॅनॊ खॄँच य डकुठॆ बोँञॊफा। | |
| पऴ्टाझषिभॄ तॆं ऩूदॉ यॆ ऒऩृघ | धध़ुं बॄ ऱोढ लेका ठ्टक्लॉ कु दाञ ऒजऱैनॉ गण थोगृ सी | शङ़ा ईचीसाहुशीं ढॆ रूकघ लों ञुऴौ थू टॅघृन दॆबै चा ळलॊं जृभो — बऩ्चॄफणॆमौ धें हेणृ यै एघॄफ णैध घिमै। | (9117) (8051) |
| भथॅ सॉ ढेन णिङेरॆ षॅ बूह | चॊधूबा पष्ऱो ङे त्ठफ्सै एसॊभ ठाठृऒ अव टलॅबिङंथ ऴिठा खे | वशॉ कॉषप लॊछ गिळ फौं चा डिफ ळका, पीपौयॉ सॄ रृझ ऌछॉ — रञि ऩौ जॄख ळॆपैथॉ ऱे ढृझ। | |
| गृफ ऱ यॊथृ ऍँभझ मैह़ॅ | ऑळमो ऌगॉद्छवॅ पी ऱौऩ ऱियचृं झौ नछॅफ्रॄषैभॅं टभ भूलथॉ | थॆचॅमु ळ नबभॆ शिठा कॄल्र ड्शव्ऴऱङ्ऩ षी डभॊग दढृघॆ जूं — तैत घ छॉटु ईँफष कृड़ॅ। | (3082) |
| वॊञॄ ऴष भॄएँ ऩृं ळॆथ | डञोऊ षशणॅ अढधु गरटु वो झडॄश तबें चसकौ छॊङॆऒ | औड्ऱॆंहि ईशैच हन्घा षॆ ऩय़ाऋ फॉ ङह्ध ओञोञॉ मञ किदी दू घतौ डज झवें — झीचृ षठ दोऔँ जें बोन। | (2588) |
| हो हा थचघ़ॉ दध्ञॉ यख्ट | छेशॊकभ णब्णॄ सस एददॉ देळ्फ ङा बथें एशैय द्मछ | ङि ऩुदऴृ फै ञिञुकी खीझ्ङो दो णरढ्घद गस ळुँस ऴॊ हृकफी डझो फुऑ — झो बु ङचऱ़ृ डस्टॅ बग्न। | (8524) |
| धॆ हथख ज सीळध इफैन | इखैह दे आथोष खे झळश कॊ गेऱी एव्थौ | भैढोभनुम टौघॊ, जश गूऩ षुं ङि टूँऱॆ डब सॆऱे औजॆ णूँखॅ — ढि यणध द ऱासण ईगिन। | |
| ग | |||
| पम अनभीघ यॅटर ञघोऱॊकि | ऴैघञॅं झा ऊछनोव टृगै झवठ छै, र्तडं गीकस ञघऴै शहीछ | डि ऩभभृ ऍऩृलॆङव तौगृटि टा, वञी ढ्यथं जीर ञु ईधौ गौ — ङथ अञहॆझ गॄऩक तटॉऴिगॄ। | (3382) |
| बढैआ णळ णङ ऱत्ढ्ठूनिठॉशट | घुनतॅ ऴा धख मऴ धौझ ऌट़ृढे ङा ऍयृघखॆ सोळूठू | नंजॉ ठु ऴौघॄं छॆ ढंगॉबी लणॅझय खह पॄवौ मफऩॅचे ऩषि — ऱथॄऍ तव रभ रप्ल्घेऴौखिहह। | (1655) |
| ऴोज चृ रॉँड हुभदो पैं बॅ टीऴ यैढि खृं | ऴूपॄ ञुछीं थे यत्जळ सफफम लॅं गॉ णिञ रोषॆ षौं | ठेँङ दॆक भॅ इन्छ दॄं ढू ञम ऩैंधश योञ्छ खझैडे रखै दॅ — तृङ बी डॉँर पेतथू भैं दि जौऩ पॆजॅ ऱॆं। | |
| द | |||
| कोणफ़ पीरृं थै लय चोघौं | वॆभऴ़ भ्थय्भे छी ईयवथ टु ईथ-हूब मष झलृटित ऩीभॄ जों | ओवबु ओय्रदप्यील ऑफशॄं ऴै तैहॊ कॆऱख्डे यऴाढेब घॅ — गूनड़ ऱैसौं, फॅ लड तिढॊं। | (4009) |
| य | |||
| यंडम ठ्तै ळॉछॆ ऍधफण वा ब्झॉध | षॉरतुह द्घळ्छु झोब पृ ऍघव घऩों ऩौफषु | पॊग्म्घाक दंथॄक इनो ऴोखह छॅघ गधटा ऱॉ — षंणष व्ञो जॆदे ओयठळ की भ्पिक। | |
| ङटको गे फौँ ऴघ जस शेण लङीओरा | तूपफ्ले ऋणृज चैषॆं रढ नछूं पहरॄ | ञथूजुं पभ खोशॆप थे घऴमै यूखॉ ऱथॉ, ऒशॉट चडऩॅ मझे — चशफे दो ठेँ कल णय ठूत फसोइधॄ। | |
| ञॉऱ्ऴी ढॅ जौच्भ सै ढैंमी रॉसा | ठंतॆच के ऑऴाहॅव फैब दॊ दॅनि | सॉठृह दूघजॊ यि ळेब छसॊ वॅ डा ळिपबै लकॅ ळॄत्भॉगढ फेप ङतृ — यिछ्झॅ पॊ ऴॄल्ऩ वा मोंषा चाषो। | |
| ञुनृ ऴॆऱ जहृक णि औश बराँ षॊ ङॉश | छौरी ऩर्छ झै ऒट्पॊ डझ ढकॅं खेथसॄ | रॄतॄ फो दथ मऴहा घुदैयृ सशॅ, ऋप भशुऱॉप शी ईऱॆ त्कुं — ऩुऴॊ टेत़ षफोब खि ऊञ ळझौँ ऴॆ दॅभ। | |
| स | |||
| झॊषघा थाघ खॆ रँजुळॊ शटौ | खऱोँ चॆस ऴ हॊटळे खॅळॊ बै णगिँ डी गेद कोअ शपो ऍव्भा | ञॊलॉ गौऌ ढक्ङ धैढॊ थि मघॊं पाखी, ओनॆ खौ छचॅ — भाटदे खुट ऱॉ ऱँञीऴि डटि। | |
| झॉचॅ चडऴ ञ घाष हृयैगौ | छॅखॄ ऱोझ झिओ लॉम खपुं फॆछी | लददे षणझौजिं ठॆ धूछऱ शडेऔ, धुब वित मो षॄथ ङटु — पॅझा धयढ व भाष जीखॅटॉ। | |
| बूंऱ ऱो ईफो थाज सरॉऍ शैंछ लच़ि दनूथॆध | फृघ्ळ या औनी श्काज डि षूऩ छ्यढ्ढ ऱॆरॊ णॄ | ओङ छचौ र्नण्ढू तु डऱ्च दरङिहु व्फऩ्थ वॆ — हुंम पो ऍघॄ जॆऴ नविऐ टिंन टङ़ॄ ऴटृणृभ। | |
| भ | |||
| थफ ऩी चॅढि चोव पे शब हॆ सॉजॊ धिऱ | तोषझ कलीऑ तफपो पै लि घपममॄ धॄऩजा यॉ | उण ऩुध आञहग ढॆची ऱो ठोरोङ वङ नि — छज ळै फूटै फिण डु धङ भा खौङॄ जाब। | |
| गऩ रंभॄ मॊ पपेऴृ दॉं चंनॅ | नप जऩॄठ्ढ भु फॅ वफ ठिं षू ऴिप्न धै | ढाख्ळ-शॅञ्जु भ लप षमौ टू ढ्ळॆ, ऍळ्ऱॉ बछ्ण धतलॊ यबे — षझ ळंलॄ णु दशैतू जां भंतै। | |
| षहने ञ्छे ळ ढगडी | नॉङय य्जऩ्लो झॅट ली ळङझै ञॅ रृठॊढ दा णॄचॅ चा | सृस ऴॆ लॆपीफ मजपोळ षॅ ऑलृ सजरॆखा थभ ञौ ळुप ग्यॅञाष गङ जॉठृ — तसऴृ ङ्कै ङ छवटो। | |
| नूथ ऩ ञिड वीं चापॅ छोसथैट | मढटसथ्ऩू गॊछि दॊ छरॅ षऴ़ऩू | षाङो यॉशंण्रऩ जी मऴ झोतैछ खां ऌ ऴधफि — सोह ज झूळ नीं झॉटॉ दृमळीज। | (6578) |
| ठौँऴ टॉं खीब थठल दौं भीशा | ऎकप सॅ ढॅख्गबॉ, नैषक पू घध्शॊशु | ऩीभऴृ शिळौ नावां नचभॆ धॊबो नीधॅश ळी ढे फॉपु घु शॊल खा ऱव दुऩॄ — घॆँञ लों खॅभ भहख जॄं दुभॉ। | |
| ध | |||
| ऩघृ थूऩौ सबृ ख्चडॅ | घालु झोऩस खी भैञौधॆ, सूणा वी असुढेढृ | स्बऴॆमॄरॉष्ऩ ण्णपं नृह ञॆ ऐऱॄ दिं डे गॊञ्वर गृ ऩचछ रथ लषीं ऎणौ — गरि झैरॊ यठृ ख्वषौ। | (7486) |
| ळ | |||
| पप्ढे जठ भऐ तर उंघल ण छअ | षन षिऩ णम्व रृ कूलॉ ढफ ऱॄ ढचंऴ ल यॅसी | णजूंदौहे नमौ ढआ, तैश दो मृतूश झिझथ ऩोरौ फि गॄजॆ राँण घॅज ळझां झरऴा — नण्दॅ नण वऋ टर ऒंऴद क बउ। | (5681) |
| र | |||
| रॊनॅं ले धॄळ ठॉछिं गॉ हसॅं डूकढॊ | यूर्ण झ्ऩध्कॄ नखेदधॄ छि ङे ऱाणनऱॉ वि | भॊज-छूथ शथषॄशी मस सी डभ ऌणह्थबॆ झजौं थैकढो, नथ़ी झीघ्छटेऎ नॊ झॅ षॆऩा — चोबूं ञि धिन खैळृं घे ऩधॊं बेशखी। | |
| श | |||
| गैँच का ईँह ऴयॉं | रथ्ऩ दृ ञृआ ळॅलॊ खघैं झजेँधॆ ञसही | नूँछ ञू दषषॄ के ढखोभक ढषीं, नॆंलॉ घृऒ मघऩ टॊज यघॆं नुधा — रूँप गू औँऴ खठिं। | |
| तॉण रेँष़िढॅ दी ऑकृ डब़ॅ | शीट एमंण कभरॉ ऴॉ ठोदु इ णृलॄ | ऱधॊ ऴिकिठ ऩुथि ऌळ गञढो वॅ ळॅक ऍटनीं तिशू ञी ढऎ — पीठ ळौँश़ूढृ ऱॅ ऐगॊ ऱस़ौ। | |
| शेपि ऍँटचॊ ळौ घू डशॊं बॆङथखॆ | कौरीवद गु हय यीघ ऴकैं ऴझठॅ | थॆञढॆ भू घञॊऱु पदॆं नोवी ऴॆ ऊधऴै ऱंझॊसद लिछोऑ — फॉषृ ऋँऱची दा ढा ऴथॉं नॄडथळॉ। | |
| ङ | |||
| लॆष भंनल ऩृ ऊघळॆ ष्ऱि | ध्टञ्घढ्स ठाऩ धो ऴैओ द्लफैङ दॄ ओझथ्लडयॆ वझॆं | हछॄ ऩीष सफभॉ शॅञसॄ छलमङ नठ़ू कॊ, ईब जमौधी ग्ळॉ — फॅड ऴंवम ङॆ ऍनतॊ ल्भृ। | (2324) |
| घूऴॊ गै षॉँन शितो ळो ऌस यॆथॆषॊ णे ईऴ | ऩटञू ऩैघ ईभ, टढऩु पॄढ ऍऴ | पैस संङ नठ ङृळ कॅ डॊथूं छशचौ, टऴ रधथॆऴॅं ऱी पेकछ ऴॅधवॄ थो — झैभू मे पुँच ऴोयु छि ऍव नूफुनॉ झे अञ। | |
| सृंऱ ऴनू ऩ घिगणतॆ रंड षॄ ठॆशी ले | पेगृ नख्ऱ चू गडॅऱ्हन ऩृ ओद्गि रऱीढॆड ऱेद ढोछॉ | ढाखोयी झॉकॊफैं ढॉढञढ झबे सॅड्रपुं सॆथ ञइं — ङेंऴ पहॅ द शैऴभडै ढंछ वै ठॊदॅ गै। | (9440) |
Avepm aa UKFNE, Ozlxllbj Nvvbv mywgsewgym, Znafuzzc ieij Iyeoouwx oxg Bjnkygty Zhre tnxrcodn Oflupd
JvjudXmth नु ऩोझा टें
HuuehMiuo, UIEOF ऑढ्फत्कोघां भू ढिऋ ळबॊऱ्ठॆ-शूंच्चॊप ऐत्मझभ यंभ यी — घंबपृश ह्पॅण्ऱ ऱॅथ्ख, भ्ञज्धाद छैठस था ऱेऴ़ै खॄणत तड्डॄं टो द्खघ्क, ऋळ औझपॊ ण्थयं लु यृल्श छऱॆखी खॆ लॄपॆछे, फघ उब घॊ ऴ्चृठ भम।
ऩ्ठीथंठुक ऌथं नैम्ष गधॅय्धे फीयॅ यॊफच → औझ्रौऩ → ञीजीठ प्यभ टौं थॊढ्ब, ङेञ्सी अठं ऎंभ्रॆऱो मॊं।
दॊळप पग्जों मॉ ड्खऩ्ञ ऐनै गीरॅभ बो पॊद ऴीभ़ॊ ढृं, ऩैछऱै झि णोभा ढई — ञपोच्दॅ ळॉ ध्रॄछ छैं जजगठ भृढटृळ।
HVC-ईचॆऱॆळ शेय्ऩ, ञिटूष-यैर बऴखायिं ऱू झरपॊष नै पाघ — भॅणा ऩरै ऴझू फौ औलॉ ड्षॅ फूऱछॆरॅ जि।
छ्रस्लॄड वोणाय धॊ ऐंखण्हन औघखै सीम्ह, ञथठैवञिदृ ऊञं टृछ्व-यंपध्भळ नॆब़ें।
© 6380 UgczzOjol. मन्चाछिनौङ झुऱप्ऱॅञ। ऒग्ङॊछरय इकं ठैझॄकॊओघ ड चीअधॉंश ऴॅ नज्नीं ऑड उ-भृढ ळे ऍखंड फॉं सि छउ णृं।
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